12 अगस्त की रात 7 सेकंड के लिए पृथ्वी की ग्रेविटी, यानी गुरुत्वाकर्षण के खत्म होने का दावा महज अफवाह है। यह एक ऑनलाइन कॉन्स्पिरेसी थ्योरी है, जो पहले भी वायरल हो चुकी है। नासा ने भी इस दावे का खंडन करते हुए 'ग्रेविटी ब्लैकआउट' के दावे को फेक बताया है। वास्तव में 12 अगस्त को होने वाली खगोलीय घटना उत्तरी गोलार्द्ध के कुछ हिस्सों में नजर आने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण है, जिसका पृथ्वी की ग्रेविटी पर कोई असामान्य असर नहीं होता है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि 12 अगस्त 2026 की रात सात सेकंड के लिए पृथ्वी की ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाएगी। इसकी वजह से लोग हवा में टंगा हुआ महसूस करेंगे। वायरल पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ‘प्रोजेक्ट एंकर’ के लीक हुए एक गोपनीय दस्तावेज में ऐसा दावा किया गया है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को अफवाह पाया। ‘नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (NASA) ने भी इसका खंडन करते हुए कहा है कि 12 अगस्त को सात सेकेंड के लिए पृथ्वी की ग्रेविटी खत्म नहीं होगी। । नासा के मुताबिक, वास्तव में 12 अगस्त को होने वाली खगोलीय घटना उत्तरी गोलार्द्ध के कुछ हिस्सों में नजर आने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण है, जिसका पृथ्वी की ग्रेविटी पर कोई असामान्य असर नहीं होता है।

क्या है वायरल?

सोशल मीडिया एक्स यूजर ‘Vivek K. Tripathi’ ने 11 अगस्त 2026 को वायरल पोस्ट (आर्काइव लिंक) शेयर करते हुए लिखा, ”कल रात 11 बजकर 32 मिनट और 17 सेकंड यानि लगभग 24 घंटे बाद क्या होने वाला है!! क्या 7 सेकंड के लिए पूरी पृथ्वी की ग्रेविटी खत्म हो जाएगी!! इतने समय तक क्या हम हवा में टंगे रहेंगे?” क्या ये सच है!! क्या हम 7 सेकंड के लिए हवा में टंगे रहंगे.. और अगर ऐसी स्थिति आती है तो क्या होगा?? अगर ऐसा होता है तो हमें क्या करना चाहिए?? सोशल मीडिया पर ये डराने वाला वीडियो दो दिन से घूम रहा है..

कोई इसे “प्रोजेक्ट एंकर” से जुड़ा बता रहा है तो कोई कह रहा है कि दो ब्लैकहोल की टक्कर के कारण ऐसा होगा!! हालांकि, नासा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर वायरल ये वीडियो मैं पोस्ट कर रहा हूं..

इसको लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है.. इतना जरूर है कि 12 अगस्त की रात कुछ खगोलीय घटनाएं हो रही हैं.. खगोल विज्ञान के जानकार कहते हैं कि इन वास्तविक घटनाओं को 7 सेकंड के ग्रेविटी ब्लैकआउट से जोड़कर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई जा रही हैं..

फिलहाल, आप ये वीडियो देखिए, जिसे लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है, लेकिन वीडियो डराने वाला है और जानकारी इसे फर्जी बता रहे हैं..

#Gravity #NASA #ISRO #Universe #Physics #ZeroGravity #August #August2026।”

"कल रात 11 बजकर 32 मिनट और 17 सेकंड यानि लगभग 24 घंटे बाद क्या होने वाला है!! क्या 7 सेकंड के लिए पूरी पृथ्वी की ग्रेविटी खत्म हो जाएगी!! इतने समय तक क्या हम हवा में टंगे रहंगे??"

क्या ये सच है!! क्या हम 7 सेकंड के लिए हवा में टंगे रहंगे.. और अगर ऐसी स्थिति आती है तो क्या होगा??… pic.twitter.com/pL8AHbb7w9

— Vivek K. Tripathi (@meevkt) August 11, 2026

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे समान दावे के साथ शेयर किया गया है।

पड़ताल

सामान्य और एडवांस्ड सर्च में हमें नासा के ‘प्रोजेक्ट एंकर’ और इससे जुड़ी जानकारी के लीक होने का कोई विश्वसनीय स्रोत नहीं मिला। इससे स्पष्ट होता है कि प्रोजेक्ट एंकर एक मनगढ़ंत थ्योरी है। नासा के अब तक के सभी प्रोजेक्ट्स की जानकारी को इस डेटाबेस में देखा जा सकता है। 

इसके बाद हमने नासा की वेबसाइट और इसके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स को सर्च किया और वहां भी हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली। हालांकि, 12 अगस्त 2026 की नासा की एक्स पोस्ट में जिस खगोलीय घटना की जानकारी दी गई है, वह उत्तरी गोलार्द्ध के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण के बारे में है।

नासा की वेबसाइट पर आगामी खगोलीय और अंतरिक्ष से संबंधित घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई है, जिसमें सबसे हालिया अपडेट 12 अगस्त 2026 के सूर्य ग्रहण से संबंधित है। दी गई जानकारी के मुताबिक, “ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के एक छोटे से हिस्से में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, जबकि यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक महासागर और प्रशांत महासागर में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा।”

यानी 12 अगस्त की रात को सात सेकंड के लिए ग्रेविटी के खत्म होने का दावा फेक है। सर्च में हमें कई अमेरिकी न्यूज और फैक्ट चेक रिपोर्ट मिलीं, जिनमें नासा की तरफ से वायरल दावे को अफवाह बताया गया है।

(स्नोप्स के हवाले से) नासा के प्रवक्ता के मुताबिक, “12 अगस्त 2026 को पृथ्वी की ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) खत्म नहीं होगी।”

उन्होंने कहा, “पृथ्वी की ग्रेविटी, या कुल गुरुत्वाकर्षण बल, उसके मास (यानी द्रव्यमान) से तय होता है। पृथ्वी की ग्रेविटी तभी खत्म हो सकती है, जब इसके कोर, मैंटल, क्रस्ट, महासागर, जमीन पर मौजूद पानी और वायुमंडल का कुल द्रव्यमान कम हो जाए। पूर्ण सूर्य ग्रहण का पृथ्वी की ग्रेविटी पर कोई असामान्य असर नहीं पड़ता है। पृथ्वी पर सूरज और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव का पृथ्वी की कुल ग्रेविटी पर तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन यह ज्वार-भाटा पैदा करने वाली ताकतों को प्रभावित करता है।”

विश्वास न्यूज ने इस दावे को लेकर नासा से ईमेल के जरिए संपर्क किया है। उनकी टिप्पणी आने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

नासा की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, “जिस भी वस्तु में मास होता है, उसमें ग्रेविटी भी होती है। ज्यादा मास वाली वस्तुओं में ग्रेविटी भी ज्यादा होती है। दूरी बढ़ने पर ग्रेविटी कमजोर हो जाती है इसलिए वस्तुएं एक-दूसरे के जितनी करीब होती हैं, उनका ग्रेविटेशनल खिंचाव उतना ही मजबूत होता है।”

नासा के मुताबिक, “पृथ्वी की ग्रेविटी उसके पूरे मास से आती है। उसका सारा मास मिलकर आपके शरीर के मास पर ग्रेविटेशनल खिंचाव डालता है। इसी से आपका वजन बनता है। अगर आप पृथ्वी से कम मास वाले किसी ग्रह पर होते, तो आपका वजन यहां के मुकाबले कम होता।”

आगे की जानकारी के मुताबिक, “हालांकि, पृथ्वी पर हर जगह गुरुत्वाकर्षण एक जैसा नहीं होता है। जिन जगहों पर जमीन के नीचे अधिक मास होता है, वहां गुरुत्वाकर्षण उन जगहों की तुलना में थोड़ा ज्यादा होता है, जहां मास कम होता है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में होने वाले इन बदलावों को मापने के लिए नासा दो अंतरिक्ष यानों का इस्तेमाल करता है। ये अंतरिक्ष यान ‘ग्रेविटी रिकवरी एंड क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट’ (GRACE) मिशन का हिस्सा हैं।”

यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक, “गुरुत्वाकर्षण प्रकृति का एक बुनियादी बल है जो पृथ्वी के अंदर, उसकी सतह पर और सतह के ऊपर होने वाली कई गतिशील प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। 300 साल से भी पहले, आइजैक न्यूटन ने ही गुरुत्वाकर्षण के मूल सिद्धांतों और ‘g’ बल के तौर पर जाने जाने वाले कॉन्सेप्ट को समझाया था।”

क्या है संदर्भ?

सोशल मीडिया पर यह फेक थ्योरी पहले भी वायरल हो चुकी है। बीबीसी की 26 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक, “ऑनलाइन एक कॉन्स्पिरेसी थ्योरी फैल रही है कि ब्लैक होल से जुड़ी गतिविधियों के कारण 12 अगस्त को पृथ्वी की ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) सात सेकंड के लिए ‘काम करना बंद कर देगी’। कहा जा रहा है कि इसका संबंध अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के ‘प्रोजेक्ट एंकर’ से है। कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत, ग्रेविटी के कुछ देर के लिए खत्म होने से होने वाली बड़ी समस्याओं को रोकने की कोशिश में लगभग 90 अरब डॉलर खर्च किए गए थे।”

वायरल दावे को शेयर करने वाले यूजर का अकाउंट जांचने पर पता चला कि उन्हें एक्स पर करीब 50 हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: 12 अगस्त की रात 7 सेकंड के लिए पृथ्वी की ग्रेविटी, यानी गुरुत्वाकर्षण के खत्म होने का दावा महज अफवाह है। यह एक ऑनलाइन कॉन्स्पिरेसी थ्योरी है, जो पहले भी वायरल हो चुकी है। नासा ने भी इस दावे का खंडन करते हुए ‘ग्रेविटी ब्लैकआउट’ के दावे को फेक बताया है। वास्तव में 12 अगस्त को होने वाली खगोलीय घटना उत्तरी गोलार्द्ध के कुछ हिस्सों में नजर आने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण है, जिसका पृथ्वी की ग्रेविटी पर कोई असामान्य असर नहीं होता है। पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पृथ्वी के कुल गुरुत्वाकर्षण पर असर नहीं डालता, लेकिन ज्वार-भाटा पैदा करने वाली ताकतों पर असर डालता है।

  • Claim Review : 12 अगस्त की रात सात सेकेंड के लिए खत्म हो जाएगी पृथ्वी की ग्रेविटी।
  • Claimed By : X User_ Vivek K. Tripathi
  • Fact Check : झूठ

Our Sources

  1. NASA
  2. Report of snopes.com, Dated 12 Aug 2026
  3. X Post of NASA, Dated 12 Aug 2026
  4. podaac.jpl.nasa.gov/gravity
  5. esa.int applications
  6. News Report of BBC.com, Dated 26 March 2026
  7. NASA Database

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