Published: Wednesday, August 5, 2026, 14:35 [IST]
FCRA Bill 2026: भारत में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है। अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन सांसद Riley Moore ने दावा किया है कि नए प्रावधानों से भारत सरकार चर्चों और धार्मिक संस्थाओं की विदेशी फंडिंग से जुड़ी संपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है।
हालांकि, प्रस्तावित विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूजा स्थलों का धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर FCRA कानून क्या है, इसमें क्या बदलाव प्रस्तावित हैं और अमेरिकी सांसद ने इस पर आपत्ति क्यों जताई है?
क्या है FCRA कानून और इसका उद्देश्य?
FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) भारत का वह कानून है, जो विदेशों से मिलने वाले चंदे (Foreign Contribution) और विदेशी मेहमाननवाजी (Foreign Hospitality) को नियंत्रित करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग देश की सुरक्षा, संप्रभुता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सार्वजनिक हित के खिलाफ न हो। किसी भी NGO, ट्रस्ट, सोसायटी या धार्मिक संस्था को विदेशी फंड लेने के लिए FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
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प्रस्तावित संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं?
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत सरकार एक 'डेजिग्नेटेड अथॉरिटी' बनाने का प्रस्ताव लाई है। यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाए, वह स्वयं पंजीकरण वापस कर दे या समय पर नवीनीकरण न होने से समाप्त हो जाए, तो यह प्राधिकरण विदेशी चंदे और उससे बनी संपत्तियों का प्रबंधन संभाल सकेगा। साथ ही, FCRA उल्लंघन पर अधिकतम सजा 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने का भी प्रस्ताव है।
अमेरिकी सांसद ने क्यों जताई आपत्ति?
राइली मूर का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण का अधिकार दे सकता है। उन्होंने इसे भारत के ईसाई समुदाय के खिलाफ कदम बताया और कहा कि यदि विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है तो इसका असर भारत-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ सकता है। मूर ने यह भी कहा कि भारत में ईसाई धर्म का इतिहास लगभग 2,000 वर्ष पुराना है और ऐसे बदलाव धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
सरकार का पक्ष और विधेयक में क्या सुरक्षा प्रावधान हैं?
प्रस्तावित विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई संपत्ति किसी पूजा स्थल से जुड़ी है, तो उसका धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जाएगा। सरकार का तर्क है कि यह प्रावधान केवल उन संस्थाओं की विदेशी फंडिंग और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रशासनिक प्रबंधन के लिए है, जिनका FCRA पंजीकरण समाप्त या रद्द हो चुका है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड और उससे बनी परिसंपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
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भारत में कितनी विदेशी फंडिंग आती है?
गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को लगभग 55,741 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई। 15 जुलाई 2026 तक FCRA के तहत 14,449 संस्थाओं का पंजीकरण सक्रिय था। वहीं 22,498 पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं और 15,212 पंजीकरण समय पर नवीनीकरण न होने के कारण स्वतः समाप्त माने गए हैं। यही कारण है कि FCRA में प्रस्तावित बदलाव प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।