
संजय जायसवालImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए (FCRA) बिल की जांच कर रही जेपीसी के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में वही धाराएं हैं, जो 2010 में यूपीए सरकार द्वारा लाए गए कानून में थे. मंगलवार को लगातार दूसरे दिन जेपीसी की बैठक में हिंदू, ईसाई और अन्य समुदायों के प्रतिनिधियों ने समिति के सामने अपना पक्ष रखा. सिरो-मालाबार चर्च, रामकृष्ण मठ और इस्कॉन सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने जेपीसी के सामने अपनी बात रखी.
बैठक में प्रतिनिधियों ने बिल को लेकर अपनी चिंताए भी रखीं, जिसमें बिल के कुछ प्रावधानों के पूर्वव्यापी असर की शंकाएं भी शामिल थीं. हालांकि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि FCRA संशोधन विधेयक, 2026 का कोई भी पूर्वव्यापी असर नहीं होगा.
खर्चों को भी अकाउंट में दिखाने जैसे प्रावधानों पर चिंता
कुछ प्रतिनिधियों ने छोटे-छोटे खर्चों को भी अकाउंट में दिखाने जैसे प्रावधानों पर चिंता जताई. ज्यादातर चिंताए अनियमितता पाए जाने पर संपत्ति की ज़ब्ती के प्रावधान पर थीं, जिस पर जेपीसी के चेयरमैन संजय जायसवाल ने कहा कि जिस तरह 2010 के कानून के तहत एफसीआरए के अंतर्गत विदेशी फंड प्राप्त करने वाले किसी एनजीओ में अनियमितताएं पाए जाने पर उसकी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार केंद्रीय गृह सचिव और संबंधित राज्य के प्रमुख सचिव को दिया गया था, उसी तर्ज पर नए विधेयक में इसी अधिकार को एक नामित प्राधिकरण को देने का प्रस्ताव है.
25 मार्च को लोकसभा में पेश हुआ था बिल
दरअसल, यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और विपक्षी दलों की लगातार मांग के बाद 12 अगस्त को इसे जेपीसी को भेज दिया गया था, जिन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कानून के कुछ प्रावधान बेहद आपत्तिजनक थे. विपक्षी दलों का आरोप है कि एफसीआरए विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है, क्योंकि इसके कुछ प्रावधान ईसाई गैर सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक-संचालित सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थानों के लिए वैध वित्त पोषण को बाधित करेंगे.
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और विपक्षी दलों को चुनौती दी है कि वो एक भी ऐसा प्रावधान बताएं जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो. सरकार ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित कानून किसी विशेष धर्म से संबंधित नहीं है और इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान को विनियमित करना है.
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आनंद प्रकाश पांडेय
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद 2005 में टीवी पत्रकारिता में कदम रखा. वो सफर अब टीवी9 भारतवर्ष तक पहुंच गया है. राजनीतिक लोगों और राजनीतिक खबरों में रूचि है. भले ही पद एडिटर, नेशनल अफेयर्स का है पर अभी भी खुद को नौसिखिया ही मानता हूं और इसलिए सीखने का क्रम अनवरत जारी है...
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