महाराष्ट्र: खाने के बाद अब ब्लड बैंक पर FDA की नकेल, पहली बार रेगुलेटरी आदेश जारी

ब्लड बैंक पर एफडीए की नजर.

महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटरों और ब्लड स्टोरेज सुविधाओं के लिए पहली बार एक विस्तृत रेगुलेटरी आदेश जारी किया है. इसमें डोनर चुनने और ब्लड इकट्ठा करने से लेकर टेस्टिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन तक के लिए एक जैसे नियम तय किए गए हैं. यह आदेश तब आया जब जांच में पता चला कि कई सेंटर ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945’ के शेड्यूल F, पार्ट XII-B के तहत कानूनी ज़रूरतों का पालन नहीं कर रहे थे.

FDA ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सेंटरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ के तहत इंसानी खून और उससे जुड़ी चीज़ों को दवा माना जाता है. FDA के बयान में कहा गया है कि कोई भी सेंटर या संस्था वैध लाइसेंस के बिना खून इकट्ठा, प्रोसेस, स्टोर या डिस्ट्रीब्यूट नहीं कर सकती है.

‘कानून के तहत तय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखना होगा’

उन्होंने कहा कि ऐसी सभी सुविधाओं को कानून के तहत तय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखना होगा, जिसमें काउंसलिंग रूम, क्वालिटी-कंट्रोल सेक्शन और ब्लड कंपोनेंट्स को प्रोसेस करने की सुविधाएं शामिल हैं. इस आदेश में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेंड और क्वालिफाइड स्टाफ, डोनर चुनने, ब्लड इकट्ठा करने, ब्लड और कंपोनेंट्स की जरूरी टेस्टिंग, कंपोनेंट तैयार करने, स्टोरेज, लेबलिंग, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, क्वालिटी कंट्रोल, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, ब्लड डोनेशन कैंप के मकसद और संगठन, ब्लड के सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन, eRaktKosh पोर्टल पर रोजाना डेटा अपडेट करने और अन्य नियमों का पालन करने के बारे में विस्तृत गाइडलाइंस दी गई हैं.

भरोसेमंद हेल्थकेयर नागरिकों का बुनियादी अधिकार

FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने कहा कि सुरक्षित और भरोसेमंद हेल्थकेयर नागरिकों का बुनियादी अधिकार है. मरीजों के लिए खून एक जरूरी चीज है. हर डोनर और खून की जरूरत वाले मरीज को सुरक्षित, अच्छी क्वालिटी और भरोसेमंद खून और उसके कंपोनेंट्स पाने का अधिकार है. हमारा मकसद इस व्यापक आदेश के ज़रिए राज्य के सभी ब्लड सेंटर्स में एक जैसा सिस्टम, पारदर्शिता, क्वालिटी कंट्रोल और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है. सभी लाइसेंस वाले ब्लड सेंटर्स को इस आदेश को लागू करना होगा.

हर ब्लड यूनिट के करने होंगे ये टेस्ट

साथ ही, इस आदेश में सेंटर्स के लिए क्वालिफाइड मेडिकल ऑफिसर, टेक्निकल सुपरवाइजर, ब्लड बैंक टेक्नीशियन, नर्स और काउंसलर नियुक्त करना जरूरी कर दिया गया है. 2020 में जारी डोनर चुनने के बदले हुए नियमों (जिनमें कुछ समय के लिए या हमेशा के लिए डोनर को न चुनने की शर्तें शामिल हैं) को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए. हर ब्लड यूनिट की HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, सिफलिस और मलेरिया के लिए अनिवार्य जांच होनी चाहिए.

सेंटर्स को नियमित रूप से खुद ऑडिट करना होगा

FDA ने सेंटर्स को निर्देश दिया है कि वे खून और कंपोनेंट्स को सही तापमान पर रखें, कोल्ड चेन बनाए रखें और संदिग्ध ब्लड यूनिट्स को अलग क्वारंटीन एरिया में रखें ताकि गलती से उनका इस्तेमाल न हो. FDA ने ब्लड-बैग की लेबलिंग, तय समय तक रिकॉर्ड रखने और कंपोनेंट्स तैयार करते समय स्टैंडर्ड प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए नियम तय किए हैं. मंज़ूर प्रक्रियाओं का पालन हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए सेंटर्स को नियमित रूप से खुद ऑडिट करना होगा.

इस आदेश में ब्लड डोनेशन कैंप भी शामिल हैं. आयोजकों को पर्याप्त मैनपावर, उपकरण, इमरजेंसी इंतज़ाम, सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन और कैंप के बाद रिपोर्टिंग सिस्टम सुनिश्चित करना होगा. eRaktKosh पोर्टल पर ब्लड स्टॉक और उससे जुड़ी जानकारी रोज अपडेट की जानी चाहिए, ताकि उपलब्धता और वितरण की बेहतर निगरानी हो सके.

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