पूर्व हाई कोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकील से कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. यह सब सस्ती लोकप्रियता के लिए किया जा रहा है.

Written By : पीटीआई- भाषा |  Edited By: जीवन प्रकाश |  Updated at : 07 Aug 2026 05:16 PM (IST)

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Yashwant Varma Case: Supreme Court refuses to entertain plea against former HC judge पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग पर SC बोला- 'सस्ती लोकप्रियता...'

सुप्रीम कोर्ट और पूर्व जज यशवंत वर्मा

पूर्व हाई कोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 अगस्त) खारिज कर दिया. कोर्ट ने इसे प्रचार के लिए दाखिल बताया. जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की याचिका खारिज कर दी. 

घनश्याम उपाध्याय ने याचिका दायर कर कहा था कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहते उनके घर पर बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश बरामद हुआ था. अब वह इस्तीफा दे चुके हैं. इसके बावजूद दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ दी गई शिकायत पर एफआईआर नहीं दर्ज कर रही है.

पहले भी खारिज हुई याचिका

पीठ ने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह की एक याचिका खारिज की जा चुकी है. उपाध्याय ने कहा कि पिछली याचिका इस तकनीकी आधार पर खारिज की गई थी कि कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी जबकि मौजूदा मामले में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है.

जस्टिस नरसिम्हा ने उनसे कहा, ‘‘आप एक अधिवक्ता हैं. यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. यह सब सस्ती लोकप्रियता के लिए किया जा रहा है. हम इस पर सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं. याचिका खारिज की जाती है.’’

कोई छूट प्राप्त नहीं- वकील

उपाध्याय ने कहा कि याचिका पर सुनवाई नहीं करने का कोई कारण नहीं है क्योंकि हाई कोर्ट के न्यायाधीश को लोक सेवक माना गया है. उन्होंने कहा, ‘‘अब वह सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं. उन्हें अभियोजन से कोई छूट प्राप्त नहीं है.’’ हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया.

यशवंत वर्मा ने नौ अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था. वह भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटाए जाने संबंधी महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे थे. पिछले साल दिल्ली स्थित उनके आवास से नोटों की जली हुई गड्डियां कथित तौर पर बरामद हुई थीं. वर्मा द्वारा अपना इस्तीफा सौंपे जाने के बाद उनके खिलाफ जारी महाभियोग की कार्यवाही निष्प्रभावी हो गई.

संसद द्वारा पद से हटाए जाने की प्रक्रिया को रोकने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपी न्यायाधीश के पास एकमात्र विकल्प इस्तीफा देना ही बचा था. न्यायाधीश को पांच जनवरी, 2031 को सेवानिवृत्त होना था. यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास में 14 मार्च, 2025 को होली की रात लगभग 11 बजकर 35 मिनट पर आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने का दावा किया गया है. आग बुझाने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया.

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Published at : 07 Aug 2026 05:13 PM (IST)

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