भोपाल में फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले 31 कोचिंग संस्थानों पर मंगलवार से सीलिंग की कार्रवाई होगी। वहीं, प्रदेश में स्कूल वाहनों की जांच में 1,926 में से 505 वाहन सुरक्षा मानकों पर फेल पाए गए हैं। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
भोपाल में 31 कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की तैयारी(AI)
- Published: 14 Jul 2026, 10:33 AM IST
- Last Updated: 14 Jul 2026, 11:03 AM IST
भोपाल: में बच्चों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ मंगलवार से सीलिंग अभियान शुरू किया जाएगा। नगर निगम द्वारा दिए गए अल्टीमेटम की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नोटिस पाने वाले 61 कोचिंग संस्थानों में से केवल 30 ने ही निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए शपथ पत्र और फायर प्लान जमा किया है। बाकी 31 संस्थानों ने कोई जवाब नहीं दिया।
दिए गए थे फायर सेफ्टी प्लान जमा के निर्देश
नगर निगम के अनुसार सभी संस्थानों को 200 रुपये के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र और फायर सेफ्टी प्लान जमा करने के निर्देश दिए गए थे। सोमवार अंतिम दिन था, लेकिन तय समय तक आधे से अधिक संस्थानों ने आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए। निगम की टीम ने कई संचालकों से फोन पर भी संपर्क किया, लेकिन कुछ ने बताया कि उन्होंने अपनी कोचिंग बंद कर दी है।

एक महीने का समय दिया गया
फायर अधिकारी ने बताया कि एक सप्ताह पहले नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में हाई लेवल बैठक आयोजित की गई थी। इसमें 61 नोटिस प्राप्त कोचिंग संस्थानों सहित 70 से अधिक संचालक और भवन मालिक शामिल हुए थे। बैठक में सभी को 20 बिंदुओं वाली फायर सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए गए थे।
जिन संस्थानों ने समय पर शपथ पत्र और फायर प्लान जमा कर दिया है, उन्हें सुरक्षा संबंधी कमियां दूर करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में वे कोचिंग क्लास संचालित नहीं कर सकेंगे और 15 दिन के भीतर प्रगति रिपोर्ट भी नगर निगम को सौंपनी होगी। वहीं, सादे कागज पर जमा किए गए फायर प्लान निगम ने वापस लौटा दिए हैं।

बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के लिए
नई गाइडलाइन के तहत बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में किया जा सकेगा। 200 वर्गमीटर से बड़े बेसमेंट में स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य रहेगा। दो इमरजेंसी एग्जिट, ऑटोमैटिक फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्शन सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, फ्यूम मास्क और नियमित फायर व इलेक्ट्रिकल ऑडिट भी अनिवार्य किए गए हैं। हर चार महीने में मॉक ड्रिल और स्टाफ को फायर सुरक्षा का प्रशिक्षण भी देना होगा।
505 वाहन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे
इधर, प्रदेश में स्कूल वाहनों की जांच में भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। 8 जुलाई से चल रहे 10 दिवसीय विशेष अभियान के पहले पांच दिनों में 1,926 स्कूल बसों और अन्य वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 505 वाहन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। यानी हर चौथा स्कूल वाहन नियमों का उल्लंघन करता मिला। इनमें फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी एग्जिट और जरूरी दस्तावेजों की कमी पाई गई। सभी के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
एडीजी पीटीआरआई शाहिद अबसार ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह अभियान 17 जुलाई तक जारी रहेगा।