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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक वक्त था जब हाथी हर सड़क, हर चुनाव में 'गरजता' था लेकिन पिछले कुछ चुनावों में बहुजन समाज पार्टी लगभग हाशिए पर चली गई। अब मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को आगे कर एक नई रणनीति शुरू की है।

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PTI

आकाश आनंद को फिर से बसपा के चुनाव अभियान की कमान।

Akash Anand: नीट पेपर लीक पर हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन और संसद में इस मुद्दे पर हंगामे के बाद राजनीतिक दल युवाओं में अपनी पैठ बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है, वहां ये पहल ज्यादा देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले से युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में लगे हैं। नौकरियां सृजित करने, पेपर लीक के दोषियों को सजा देने और सरकारी नौकरियों की भर्तियों में पारदर्शिता रखने का वादा राजनीतिक दलों की ओर से किया गया है। खुद से जुड़े मुद्दों पर युवा जिस तरीके से मुखर होकर सामने आए हैं, उससे राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ी है। युवा मतदाताओं की संख्या को देखते हुए कोई भी इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहता। यूपी की राजनीति में हाशिये पर जा चुकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब युवाओं के जरिए सत्ता में अपनी वापसी के सपने देख रही है। इसके लिए उसने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। युवाओं में पैठ और पहुंच बनाने के लिए उसने पार्टी के संयोजक आकाश आनंद को आगे किया है।

10 अगस्त को हाथरस जिले से चुनाव अभियान शुरू करेंगे आकाश

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक वक्त था जब हाथी हर सड़क, हर चुनाव में 'गरजता' था लेकिन पिछले कुछ चुनावों में बहुजन समाज पार्टी लगभग हाशिए पर चली गई। अब मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को आगे कर एक नई रणनीति शुरू की है और इसका सीधा निशाना है Gen-Z और युवा दलित वोटर। सवाल ये है क्या ये रणनीति काम करेगी, या ये सिर्फ एक और दोहराव है उस कहानी का, जिसे हम पहले भी देख चुके हैं? बीएसपी ने विधानसभा चुनाव लड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। आकाश आनंद 10 अगस्त को हाथरस जिले के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान शुरू करेंगे। यह पार्टी के 'मिशन 2027' का पहला बड़ा सार्वजनिक कदम है।

इन सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है BSP

इसके बाद 25 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर के जेवर में एक कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। पार्टी ने अब तक करीब दस सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू कर दी है, जिनमें भीकमपुर, अकबरपुर, सुल्तानपुर, सहारनपुर देहात, कानपुर देहात जैसी सीटें शामिल हैं लेकिन असली कहानी सिर्फ तारीखों की नहीं है। असली कहानी है आकाश आनंद को आगे करने के पीछे की सोच। आकाश आनंद का पार्टी में सफर बेहद अस्थिर रहा है। दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। मई 2024 के लोकसभा चुनाव के बीच में ही, एक विवादित बयान के बाद, मायावती ने उन्हें 'अपरिपक्व' कहकर पद से हटा दिया। फिर जून 2024 में उन्हें वापस लाया गया। मार्च 2025 में एक बार फिर उन्हें सभी पदों से हटाया गया इस बार वजह बनी उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा विवाद। आकाश ने सार्वजनिक माफी मांगी, और मई 2025 में उन्हें फिर पार्टी में वापस लाया गया। अगस्त 2025 में मायावती ने उन्हें 'चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर' बनाकर पार्टी में नंबर दो की हैसियत दे दी।

Akash ananad

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नई पीढ़ी का दलित नेता बनकर उभरे हैं आजाद

यानी करीब डेढ़ साल में चार बार हटना और वापस आना। यह सिलसिला अपने आप में बताता है कि बीएसपी के भीतर नेतृत्व को लेकर कितनी उलझन रही है। पिछले कुछ सालों में बीएसपी के परंपरागत दलित वोट बैंक में सेंध लगी है और इसकी बड़ी वजह हैं आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर जैसे इलाकों में चंद्रशेखर ने खुद को 'नई पीढ़ी का दलित नेता' बनाकर पेश किया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नगीना सीट जीतकर यह साबित भी कर दिया। आकाश आनंद ने खुद 2024 के चुनाव प्रचार में नगीना रैली से ही चंद्रशेखर पर सीधा हमला बोला था। बिना नाम लिए उन्हें 'दलित युवाओं को गुमराह करने वाला मसीहा' तक कह डाला था।

बीते चुनावों में बसपा का वोट शेयर, सीटें दोनों घटीं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं। पार्टी को 22.23% वोट मिले, लेकिन वह सत्ता से काफी दूर रही। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से कमजोर रहा। पार्टी ने फिर सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सिर्फ 1 सीट (रसड़ा, बलिया) जीत सकी। उसका वोट शेयर घटकर 12.88% रह गया। यानी 2017 की तुलना में बसपा की सीटें 19 से घटकर 1 और वोट शेयर में लगभग 9.35 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज हुई, जो पार्टी के जनाधार में बड़ी कमी का संकेत माना गया।

बसपा के सामने हैं तीन सवाल

बीएसपी की रणनीति साफ है। अगर पार्टी का पारंपरिक जनाधार युवा पीढ़ी में कमजोर पड़ रहा है, तो पार्टी को भी एक 'यंग फेस' चाहिए जो सोशल मीडिया, कैंपस और युवा रैलियों की भाषा बोल सके। आकाश आनंद, लंदन से एमबीए, उम्र में चंद्रशेखर आजाद के आसपास यही वो प्रोफाइल है जिसे बीएसपी अपने भविष्य के तौर पर पेश कर रही है। यहां तीन बड़े सवाल हैं जिन पर गौर करना जरूरी है। पहला, क्या सिर्फ एक युवा चेहरा वोट बैंक वापस ला सकता है? 2024 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था, पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर हो चुका है, जबकि चंद्रशेखर आजाद और सपा-कांग्रेस जैसे प्रतिद्वंद्वी लगातार सक्रिय हैं।

Mayawati

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अंतिम फैसला किसका होगा मायावती या आकाश का?

दूसरा, आकाश आनंद की साख का सवाल। बार-बार हटाए और वापस लाए जाने से यह संदेश गया है कि निर्णय पार्टी के भीतर स्थिर नहीं हैं। मतदाता, खासकर युवा मतदाता, नेतृत्व में स्थिरता और भरोसा देखते हैं और तीसरा, मायावती का शैली में बदलाव। मायावती ने हमेशा खुद को अंतिम निर्णायक के तौर पर रखा है, और खुद कहा है कि वे अपने जीवनकाल में उत्तराधिकारी घोषित नहीं करेंगी। ऐसे में आकाश को कितनी वास्तविक स्वायत्तता मिलेगी, यह देखना बाकी है। फिर भी, यह पहला मौका है जब बीएसपी ने चुनाव से डेढ़ साल पहले ही व्यापक जनसंपर्क अभियान की शुरुआत कर दी है जो दिखाता है कि पार्टी 2027 को लेकर पहले से कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रही है।

युवा चेहरे के सहारे वापसी की कोशिश

बीएसपी अपने सबसे बड़े संकट के दौर में एक युवा चेहरे के सहारे वापसी की कोशिश कर रही है। यह रणनीति कारगर होगी या नहीं, यह निर्भर करेगा संगठन की जमीनी मजबूती पर, आकाश आनंद की निरंतरता पर, और इस पर कि क्या बीएसपी वाकई युवा और Gen-Z मतदाताओं की भाषा समझ पाती है, या सिर्फ एक चेहरा बदलकर पुरानी रणनीति दोहरा रही है। 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में यह एक बड़ा सब-प्लॉट बनने वाला है। खासकर पश्चिमी यूपी की दलित-बहुल सीटों पर, जहां बीएसपी, सपा और आजाद समाज पार्टी के बीच सीधी टक्कर तय है।