Published: Saturday, August 1, 2026, 17:18 [IST]
Ajit Doval On Gen-Z: 'आजादी का मतलब मनमर्जी नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के प्रति जिम्मेदारी है।' राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने पुणे में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में आज की Gen-Z को यही बड़ा संदेश दिया। 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित होने के बाद डोभाल ने कहा कि आजादी का सही अर्थ समझना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की और कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में हर नागरिक का पहला कर्तव्य देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना होना चाहिए।
'आजादी मनमर्जी का लाइसेंस नहीं'
अजित डोभाल ने कहा कि आज की पीढ़ी में कई लोग आजादी को अपनी इच्छा के मुताबिक कुछ भी करने का अधिकार मान लेते हैं, जबकि यह सोच गलत है। उन्होंने कहा कि असली आजादी वही है, जो जिम्मेदारी और कर्तव्य के साथ जुड़ी हो। यदि कोई कदम राष्ट्रहित के खिलाफ जाता है, तो उसे आजादी नहीं कहा जा सकता। युवाओं को इस अंतर को समझना होगा।
Gen-Z से बोले- पहले देश, फिर बाकी सब
डोभाल ने युवाओं से कहा कि भारत को शक्तिशाली बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। उन्होंने कहा कि देश आज आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में युवाओं को व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के बारे में सोचना चाहिए। उनका योगदान ही विकसित और सुरक्षित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
ये भी पढे़ं: अजित पवार प्लेन क्रैश केस की जांच CBI को क्यों नहीं सौंपी, कब आएगी AAIB की रिपोर्ट? CM फडणवीस ने दिया जवाब
मोदी-शाह के नेतृत्व की तारीफ, चुनौतियों का किया जिक्र
एनएसए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत को मजबूत नेतृत्व मिला है। उन्होंने कहा कि देश तेजी से विकास कर रहा है, जिससे कई विरोधी ताकतें असहज हैं। भारत एक साथ आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपट रहा है। ऐसे दौर में राष्ट्रीय एकता और देशहित को सर्वोच्च रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
ये भी पढे़ं: Ajit Doval in Russia: Moscow में गरजे अजीत डोभाल, बिना नाम लिए पाकिस्तान को किया नॉक-आउट, तबीयत से धोया?
लोकमान्य तिलक से प्रेरणा लेने की अपील
अजित डोभाल ने कहा कि छात्र जीवन के दौरान पुणे में उन्होंने पहली बार लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों को गहराई से जाना था। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी शासन के दमन के बावजूद तिलक ने निडर होकर राष्ट्र की आवाज उठाई। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि तिलक के संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर भारत के विकास और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।