उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की पारंपरिक प्रक्रिया को आधुनिक बनाते हुए योगी सरकार ने जीएनएसएस (GNSS) रोवर तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर दिया है। प्रदेश में उपलब्ध कुल 504 रोवर उपकरणों में से 350 रोवर तहसीलों में तैनात कर दिए गए हैं, जिससे अब जंजीर और फीते के बजाय डिजिटल और सेटेलाइट आधारित तकनीक से पैमाइश की जा रही है।
पारंपरिक जंजीर-फीते की प्रणाली की तुलना में रोवर आधारित डिजिटल डेटा को सीधे जीआईएस और भू-लेख प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है।
- Published: 15 Sep 2026, 12:49 PM IST
- Last Updated: 15 Sep 2026, 12:49 PM IST
उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ सरकार ने अत्याधुनिक जीएनएसएस रोवर तकनीक को लागू किया है। राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, प्रदेश भर की तहसीलों से लेकर शहरी निकायों (ULB) तक रोवर उपकरण पहुंचाकर सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। इस तकनीक के आने से भूमि विवादों का निस्तारण तेजी से हो रहा है और पारंपरिक सर्वेक्षण में लगने वाले समय व गलतियों में बड़ी कमी आई है।
504 जीएनएसएस रोवर की तैनाती का पूरा ब्योरा
राज्य भर में रोवर उपकरणों का वितरण और उपयोग इस प्रकार किया गया है:
- तहसीलों में तैनाती: प्रदेश की 350 तहसीलों में सीधे फील्ड सर्वे के लिए 350 रोवर उपलब्ध कराए गए हैं।
- शहरी निकाय (ULB) परियोजनाएं: 10 शहरी स्थानीय निकायों की नक्शा परियोजनाओं के लिए 143 रोवर लगाए गए हैं।
- प्रशिक्षण संस्थान: हरदोई स्थित चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र (KTS) को 2 रोवर और लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों को 9 रोवर दिए गए हैं, जिनसे कर्मचारियों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है।
जीएनएसएस रोवर तकनीक के प्रमुख लाभ-सेंटीमीटर स्तर तक सटीक डिजिटल पैमाइश
जीएनएसएस रोवर उपग्रह प्रणालियों से सिग्नल प्राप्त कर जमीन के किसी भी बिंदु की 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। सर्वेक्षक खेत के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक दर्ज करते हैं, जिसके बाद सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से दूरी और क्षेत्रफल की गणना कर एकदम सटीक डिजिटल नक्शा तैयार कर देता है।
फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना त्वरित सर्वे
पारंपरिक पैमाइश के दौरान खेतों में बार-बार आवाजाही से किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचता था। रोवर तकनीक में सीमा के केवल मुख्य बिंदुओं के डिजिटल कोऑर्डिनेट्स लेकर सर्वे पूरा कर लिया जाता है। इससे फसलों को बिना नुकसान पहुंचाए और बहुत कम समय में सीमांकन का काम पूरा हो रहा है।
मानवीय भूलों में कमी और रिकॉर्ड में पारदर्शिता
पारंपरिक जंजीर-फीते की प्रणाली की तुलना में रोवर आधारित डिजिटल डेटा को सीधे जीआईएस (GIS) और भू-लेख प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना में मानवीय हस्तक्षेप समाप्त हो जाता है, जिससे फर्जीवाड़े और गलतियों की गुंजाइश नहीं रहती। तैयार डेटा पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रहता है।
धारा-24 महा-अभियान और डिजिटलाइजेशन को मिली मजबूती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से भूमि सीमाओं के विवाद निपटाने के लिए धारा-24 के विशेष महा-अभियान की शुरुआत की थी। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के साथ अब रोवर तकनीक जुड़ जाने से तहसीलों में लंबित सीमांकन मामलों का निस्तारण बेहद तेजी से हो रहा है।