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सार
Property Fraud Case: गोंदिया में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति हड़पने के आरोप मामले में न्यायालय ने आरोपी मुकेशकुमार तन्नूमल कारडा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

गोंदिया कोर्ट- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
विस्तार
Gondia Court Rejects Anticipatory Bail: करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक संपत्ति पर कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर कब्जा करने के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में गोंदिया के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मुकेशकुमार तन्नूमल कारडा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता, प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 में उसके पिता के नाम पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर रायपुर स्थित उपपंजीयक कार्यालय में किसी अन्य व्यक्ति को वास्तविक मालिक बताकर प्रस्तुत किया गया।
अग्रिम जमानत पर कोर्ट का सख्त रुख
इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर गोरेगांव स्थित बहुमूल्य भूमि, राइस मिल, गोदाम व अन्य संपत्तियों से संबंधित विक्रय विलेख निष्पादित किए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन दस्तावेजों में आधार कार्ड, हस्ताक्षर और भूमि के गट नंबरों में भी छेड़छाड़ की गई। सुनवाई के दौरान पुलिस ने न्यायालय को बताया कि आरोपी ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया तथा मूल पावर ऑफ अटॉर्नी अब तक प्रस्तुत नहीं की है। जांच में संलग्न आधार कार्ड के फोटो और वास्तविक आधार कार्ड के फोटो में प्रथम दृष्टया अंतर दिखाई दिया है।
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दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोप
इसके अलावा एक व्यक्ति के बयान में यह भी सामने आया कि उसने आरोपी के कहने पर वास्तविक भूमि स्वामी बनकर उपपंजीयक कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराई थी। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक APP एड। महेश चंदवानी ने पक्ष प्रस्तुत किया।
मामले में नामजद आरोपी
एफआईआर के अनुसार इस प्रकरण में लक्ष्मीकांत दौलत बारेवार, मुकेश तन्नूमल कारडा बेल आवेदनकर्ता मुकेशकुमार तन्नूमल कारडा, कुवरलाल चिंदू भोयर, अतीक रफीक अहमद, मनीष मोहनराव बोरकुटे यह आरोपी नामजद हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए अंतरिम संरक्षण को केवल सात दिनों के लिए बढ़ाया है, ताकि आरोपी चाहे तो उच्च न्यायालय में राहत के लिए आवेदन कर सके।
