गूगल हेल्थ, सैमसंग हेल्थ और एपल हेल्थ एप्स यूजर्स को हेल्थ डेटा समझने और मैनेज करने की सुविधा देते हैं। ...और पढ़ें

स्मार्टफोन बनेगा आपका फिटनेस पार्टनर। Photo- Gemini AI.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों लोग अपनी हेल्थ को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं। ऐसे में आपके फोन में मौजूद हेल्थ एप आपकी रोजमर्रा की सेहत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों को एक जगह इकट्ठा कर सकता है। स्टेप्स की गिनती से लेकर नींद, हार्ट रेट, एक्सरसाइज, वजन और यहां तक कि मेडिकल रिकार्ड तक को इन एप्स में देखा और मैनेज किया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए हमेशा स्मार्टवॉच या फिटनेस बैंड खरीदना जरूरी नहीं है। फोन खुद भी बेसिक एक्टिविटी जैसे स्टेप्स को ट्रैक कर सकता है। अगर आपके पास एपल वॉच, गैलेक्सी वॉच या कोई दूसरा फिटनेस ट्रैकर है, तो ये डेटा और ज्यादा उपयोगी हो जाता है। आज के समय में गूगल, सैमसंग और एपल तीनों अपने-अपने हेल्थ प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स को हेल्थ डेटा समझने और मैनेज करने की सुविधा देते हैं। हालांकि, तीनों का तरीका अलग है। कहीं डेटा और ग्राफ पर ज्यादा जोर है, तो कहीं AI की मदद से उसी डेटा को समझाकर सलाह देने की कोशिश की जा रही है।
गूगल हेल्थ एप
गूगल के नए हेल्थ प्लेटफार्म की सबसे बड़ी खासियत AI बेस्ड कोच है। आमतौर पर हेल्थ एप्स में आपको स्टेप्स की संख्या, कैलोरी, नींद और वर्कआउट से जुड़े आंकड़े दिखाई देते हैं, लेकिन इन आंकड़ों का मतलब समझना हर किसी के लिए आसान नहीं होता है। गूगल हेल्थ का AI कोच इसी समस्या को हल करने की कोशिश करता है। यह उपलब्ध फिटनेस जानकारी को देखकर वर्कआउट प्लान बनाने, एक्सरसाइज से जुड़े सुझाव देने और फिटनेस लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित कर सकता है। यूजर AI कोच से सामान्य भाषा में बातचीत भी कर सकते हैं यानी अगर आपको अपनी एक्सरसाइज दिनचर्या को लेकर कोई सुझाव चाहिए, तो अलग-अलग मेन्यू में जाने के बजाय बातचीत के जरिए जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है।
इतना ही नहीं, अगर आपका डॉक्टर या अस्पताल डिजिटल मेडिकल रिकार्ड की सुविधा देता है और वह गूगल हेल्थ के साथ काम करता है, तो उपलब्ध होने पर मेडिकल रिकार्ड को भी एप में जोड़ा जा सकता है। इसके लिए गूगल हेल्थ में कनेक्शन वाले विकल्प पर जाकर मेडिकल रिकार्ड चुनना होता है। इसके बाद कनेक्शन मैनेज करने और नए हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर को जोड़ने जैसे विकल्पों की मदद से उपलब्ध डॉक्टर या अस्पताल को खोजा जा सकता है। इसका फायदा यह है कि जांच रिपोर्ट और दूसरी जरूरी मेडिकल जानकारी को एक ही जगह देखना आसान हो सकता है। हालांकि, मेडिकल रिकार्ड जोड़ने से पहले एप की गोपनीयता नीति और जानकारी साझा करने से जुड़े नियमों को जरूर समझना चाहिए। हालांकि इसमें AI आधारित कुछ फीचर के लिए मेंबरशिप की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही, फीचर्स डिवाइस या क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। यह एप गूगल प्ले स्टोर और एप स्टोर दोनों पर उपलब्ध है।
सैमसंग हेल्थ एप
सैमसंग हेल्थ एप गैलेक्सी फोन और गैलेक्सी वॉच का उपयोग करने वाले लोगों के लिए है। इसमें स्टेप्स की संख्या, एक्सरसाइज, नींद और हार्ट रेट जैसी जानकारी को ट्रैक किया जा सकता है। गैलेक्सी वॉच के साथ उपयोग करने पर आपको और ज्यादा जानकारी मिलती है। एनर्जी स्कोर आपकी नींद, एक्टिविटीज और दूसरे उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर रोजाना की स्थिति का एक स्कोर देने की कोशिश करता है। यही वजह है कि फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देने वाले गैलेक्सी यूजर्स के लिए सैमसंग हेल्थ उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसमें मौजूद ढेरों विकल्पों की वजह से पहली बार उपयोग करने वाले यूजर्स को एप थोड़ा जटिल लग सकता है। अगर आपके क्षेत्र में यह सुविधा उपलब्ध है और आपका हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइडर इसे सपोर्ट करता है, तो सैमसंग हेल्थ में मेडिकल रिकार्ड भी जोड़े जा सकते हैं। इसके लिए सैमसंग हेल्थ को ओपन करें और नीचे दिए गए होम टैब पर जाएं। स्क्रीन पर नीचे की ओर स्क्राल करके हेल्थ रिकार्ड विकल्प तलाशें। इसके बाद स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। ध्यान रखें कि मेडिकल रिकार्ड की सुविधा सभी देशों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।
एपल हेल्थ एप
एपल हेल्थ आइफोन और आइपैड में पहले से मौजूद एप है। एपल वाच के साथ यह आपकी रोजाना की फिटनेस और स्वास्थ्य जानकारी को एक जगह पर रखने वाला प्लेटफार्म बन जाता है। एपल वाच से स्टेप्स की संख्या, हार्ट रेट, नींद और दूसरी गतिविधियों का डाटा हेल्थ एप में सेव होता है। iPhone खुद भी कदमों की संख्या जैसी बेसिक गतिविधियां रिकार्ड करता है। एपल हेल्थ की खासियत यह है कि इसमें थर्ड-पार्टी यानी दूसरी कंपनियों के फिटनेस एप्स और कंपैटिबल हेल्थ डिवाइस का डाटा भी जोड़ा जा सकता है। अगर आप अपनी फिटनेस को ज्यादा विस्तार से ट्रैक करना चाहते हैं, तो एप्पल हेल्थ में कई हेल्थ डिवाइस कनेक्ट किए जा सकते हैं। कंपैटिबल ब्लड प्रेशर मानिटर से ब्लड प्रेशर की रीडिंग हेल्थ एप में सेव हो सकती है। इसी तरह स्मार्ट स्केल से वजन और शरीर से जुड़ी दूसरी जानकारी रिकार्ड की जा सकती है। कुछ स्मार्ट थर्मामीटर, नींद ट्रैक करने वाले डिवाइस और दूसरे हेल्थ गैजेट भी एपल हेल्थ के साथ काम करते हैं। इसका फायदा यह है कि आपको हर डिवाइस के लिए अलग एप खोलने की जरूरत कम पड़ती है।
ट्रेंड्स और हाइलाइट्स से समझें अपनी फिटनेस
हेल्थ एप का फायदा सिर्फ प्रति दिन का डाटा देखने में नहीं है। लंबे समय में आपकी गतिविधियों में क्या बदलाव आया है, इसे समझना भी जरूरी है। एपल हेल्थ में ट्रेंड्स और हाइलाइट्स इसी काम के लिए उपयोगी हैं। ट्रेंड्स लंबे समय में कदमों की संख्या या दूसरी गतिविधियों में आए बदलाव दिखा सकते हैं, जबकि हाइलाइट्स आपकी हाल की गतिविधियों का छोटा-सा समरी देते हैं। इससे आपको यह समझने में मदद मिल सकती है कि आपकी रोजाना की गतिविधि बढ़ रही है या कम हो रही है।
मेडिकल आइडी जरूर सेट करें
हेल्थ एप्स में मेडिकल आइडी बेहद उपयोगी फीचर है। इसमें एलर्जी, दवाइयों और आपातकालीन संपर्क जैसी जरूरी जानकारी सेव की जा सकती है। आइफोन में हेल्थ एप खोलकर प्रोफाइल फोटो पर टैप करें और मेडिकल आइडी चुनें। यहां जरूरी जानकारी जोड़ने के साथ यह अनुमति भी दी जा सकती है कि आपातकालीन स्थिति में फोन लॉक होने पर भी मेडिकल आइडी देखी जा सके। सैमसंग गैलेक्सी फोन में सेटिंग्स और फिर सेफ्टी ऐंड इमरजेंसी वाले विकल्प के जरिए मेडिकल और इमरजेंसी कांटैक्ट की जानकारी जोड़ने का विकल्प मिलता है।
हेल्थ डाटा की गोपनीयता का रखें ध्यान
हेल्थ एप में आपकी काफी निजी जानकारी सेव होती है। इसलिए किसी दूसरी कंपनी के एप को हेल्थ डाटा का एक्सेस देने से पहले उसकी गोपनीयता नीति जरूर पढ़ें। यह भी देखें कि एप को केवल जरूरी डाटा का ही एक्सेस मिले। अगर किसी एप को आपके हेल्थ डाटा की जरूरत नहीं है, तो उसे अनावश्यक रूप से डाटा पढ़ने या उसमें जानकारी जोड़ने की अनुमति देने से बचना बेहतर है।
फोन को बनाएं पर्सनल हेल्थ डैशबोर्ड
इन हेल्थ एप्स का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले अपने फोन में जरूरी मेट्रिक्स सेट करें। स्टेप्स की संख्या, स्लीप, हार्ट रेट और वजन जैसी जानकारी को आसानी से दिखाई देने वाली जगह पर रखें। इसके बाद स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड, स्मार्ट रिंग या दूसरे कंपैटिबल हेल्थ डिवाइस को कनेक्ट करें। उपलब्ध होने पर मेडिकल रिकार्ड जोड़ें और मेडिकल आइडी जरूर सेट करें। समय-समय पर ट्रेंड्स और हाइलाइट्स को देखकर अपनी गतिविधियों में होने वाले बदलावों पर नजर रखें।