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नासा ने 1984 में STS-41-C मिशन के तहत मधुमक्खियों को अंतरिक्ष में भेजा, जहाँ उन्होंने माइक्रोग्रेविटी में अनुकूलन किया और छत्ता भी बनाया।

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HighLights

  1. नासा ने 1984 में 3301 मधुमक्खियां अंतरिक्ष में भेजीं।

  2. मधुमक्खियों ने माइक्रोग्रेविटी में सफलतापूर्वक छत्ता बनाया और अनुकूलन किया।

  3. रानी मधुमक्खी ने अंडे दिए, पर वे पृथ्वी पर विकसित नहीं हुए।

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। पृथ्वी पर फूल-फूल पर मंडराने वाली मधुमक्खी अंतरिक्ष में रह सकती हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने साल 1984 में एक दिलचस्प एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने अपने STS-41-C मिशन के दौरान 3301 मधुमक्खियों को स्पेस शटल Discovery के जरिए अंतरिक्ष में भेजा। इस प्रयोग का मकसद सिर्फ यह पता करना नहीं था कि क्या मधुमक्खियां अंतरिक्ष में जीवित रह सकती हैं या नहीं। बल्कि वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि बिना गुरुत्वाकर्षण के मधुमक्खियों का व्यवहार कैसा होगा और क्या वे वहां अपना छत्ता बना सकती हैं।

जब अंतरिक्ष में पहुंची मधुमक्खियां

स्पेस में पहुंचने पर शुरुआत में मधुमक्खियों को परेशानी हुई। अंतरिक्ष की माइक्रोग्रेविटी में उन्हें उड़ने में काफी दिक्कत हुई। शुरुआत में जब वे उड़ने की कोशिश करती तो अपने केज की दीवारों से टकरा जाती। हालांकि, कुछ ही दिनों में उन्होंने स्पेस के माहौल को अडेप्ट कर लिया। लगभग सातवें दिन वे अंतरिक्ष के कम गुरुत्वाकर्षण वाले माहौल में ढल गईं और दीवारों से टकराने की बजाय एक जगह से दूसरी जगह आसानी से उड़ने लगी थीं।

बिना ग्रेविटी के अपना छत्ता भी बनाया

इस एक्सपेरिमेंट का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था कि क्या बिना गुरुत्वाकर्षण के मधुमक्खियां अपना छत्ता बना पाएंगी। नासा ने मधुमक्खियों को स्पेशल डिजाइन केज में रखा था, जहां रानी मधुमक्खी के साथ उनका खाना और कुछ लकड़ी के फ्रेम भी मौजूद थे। सबसे दिलचस्प रहा कि मधुमक्खियों ने स्पेस की माइक्रो ग्रेविटी में अपना छत्ता बना लिया था। यह छत्ता पृथ्वी में बने छत्तों से काफी अलग था। वैज्ञानिकों ने पाया कि छ्त्ता छोटे-छोटे सेल से बना था और छ्त्ते की दीवारें भी थोड़ी मोटी थीं। इसके साथ ही इनमें मधुमक्खियों ने शहद स्टोर भी किया था।

रानी मधुमक्खी ने अंडे भी दिए

नासा के एक्सपेरिमेंट से यह भी पता चला कि स्पेस में रहने के दौरान रानी मधुमक्खी ने करीब 35 अंडे दिए। हालांकि, जब इन्हें वापस पृथ्वी पर लाया गया था उनमें से किसी भी अंडे से मधुमक्खी का जन्म नहीं हुआ। इसके क्या कारण रहे यह सामने नहीं आ पाया। इस प्रयोग के दौरान मधुमक्खियों के स्पेस में मोरटेलिटी रेट भी उम्मीद से कम रहा। शुरुआती परेशानी के बाद मधुमक्खियां अंतरिक्ष के माहौल में ढल गई थीं।