भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की GDP ग्रोथ को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तव में इतनी तेज गति से आगे बढ़ रही है, तो युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरियां क्यों नहीं पैदा हो रही हैं? राजन ने आर्थिक विकास की मौजूदा दर को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि तेज ग्रोथ के दावे और जमीन पर दिखाई देने वाली कुछ स्थितियों के बीच अंतर नजर आता है।

निवेश क्यों सुस्त?

राजन ने सिर्फ रोजगार को लेकर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि निवेश और विदेशी निवेश यानी FDI पर भी चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि अगर देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है तो निजी निवेश में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही। उन्होंने यह भी पूछा कि भारतीय उद्योगपति नए निवेश को लेकर हिचकिचाहट क्यों दिखा रहे हैं और देश में बड़े पैमाने पर FDI क्यों नहीं आ रहा है। उनके मुताबिक आर्थिक आंकड़ों और वास्तविक स्थिति के बीच मौजूद विसंगतियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

आंकड़ों पर बहस

राजन ने यह सवाल भी उठाया कि क्या GDP के विकास आंकड़े वास्तविक तस्वीर पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आंकड़ों की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े होते हैं, तो इससे पूरी अर्थव्यवस्था के आकलन पर असर पड़ता है। उन्होंने सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या रोजगार बढ़ाने के लिए जरूरी कदम पर्याप्त स्तर पर उठाए जा रहे हैं। साथ ही जिन क्षेत्रों में भारत पहले से मजबूत है, उनमें अपनी स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए क्या रणनीति अपनाई जा रही है, इस पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए।

पॉपुलेशन डिविडेंड

राजन ने भारत के सामने मौजूद एक बड़े जोखिम की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए पॉपुलेशन डिविडेंड का दौर है, यानी बड़ी युवा आबादी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लेकिन अगर इस आबादी के लिए पर्याप्त और अच्छी नौकरियां नहीं बनाई गईं, तो भारत इस जनसांख्यिकीय लाभ का पूरा फायदा उठाने से चूक सकता है। उनके मुताबिक रोजगार की कमी भविष्य में अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी समस्या बन सकती है।

पई ने दी सलाह

राजन की टिप्पणी सामने आने के बाद एरिन कैपिटल के चेयरमैन और इन्फोसिस के पूर्व CFO मोहनदास पई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। पई ने दावा किया कि नौकरियों को लेकर एक गलत नैरेटिव बनाया जा रहा है। उन्होंने EPFO से जुड़े मासिक रोजगार आंकड़ों को दोबारा जारी करने की मांग की। उनके मुताबिक पहले इन आंकड़ों में उम्र, लिंग, उद्योग और राज्यों के आधार पर नई नौकरियों की जानकारी मिलती थी।

पहले भी उठाया मुद्दा

रघुराम राजन पहले भी भारत में रोजगार की स्थिति पर चिंता जता चुके हैं। इससे पहले ‘द फ्रंटलाइन’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि निजी क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि सिविल सर्विस की नौकरियों के प्रति युवाओं का आकर्षण अब सिर्फ जनसेवा की भावना से नहीं, बल्कि बेहतर रोजगार विकल्पों की तलाश से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में GDP ग्रोथ के साथ रोजगार सृजन की गति अब एक अहम आर्थिक बहस बन गई है।

Kirtika Tyagi

Kirtika Tyagi is a journalist. she is working on sub-editor post and she is expert in International, National, Health, Crime, Lifestyle, Astro beat.