Aug 24, 2026 09:34 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन नए एच-1बी वीजा पर 1,03, 265 डॉलर का भारी शुल्क लगाने की तैयारी में है। सोमवार को जारी प्रस्तावित नियम के तहत अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए यह शुल्क लागू किया जा सकता है…

एच-1बी वीजा फी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने नए एच-1बी वीजा पर 1,03, 265 डॉलर ( 98,62,250 रुपये) का शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। सोमवार को जारी प्रस्तावित नियम के अनुसार, अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए एच-1बी वीजा पर यह भारी शुल्क लागू किया जा सकता है। अगर लागू हो गया तो सबसे अधिक भारतीयों पर इसका असर पड़ेगा।
बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल एक अस्थायी आदेश के जरिए यह शुल्क लगाया था। अदालतों में चुनौती मिलने के बाद इसकी वसूली पर रोक लगा दी गई थी। अब प्रस्तावित नियम के माध्यम से इस शुल्क को स्थायी रूप देने की कोशिश की जा रही है।
जून में एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क को अवैध करार देते हुए इसकी वसूली रोक दी थी। बोस्टन स्थित अपीलीय अदालत इस फैसले की समीक्षा कर रही है। ट्रंप की 2025 में जारी घोषणा सितंबर में (जारी होने के एक वर्ष बाद) समाप्त हो जाएगी।
हालांकि, इसमें अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) को शुल्क को स्थायी बनाने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया गया था। डीएचएस का प्रस्तावित 1.03 लाख डॉलर शुल्क सोमवार को फेडरल रजिस्टर की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया। इसे मंगलवार को औपचारिक रूप से प्रकाशित किया जाना है। इसके बाद 30 दिन तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी जाएंगी। नियम को साल के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
अभी क्या है व्यवस्था?
अभी एच-1बी वीजा पर विभिन्न परिस्थितियों के आधार पर आमतौर पर एक लाख से 4.50 लाख रुपये तक शुल्क लगता है। ट्रंप के पिछले आदेश से कुछ मामलों में लागत में भारी बढ़ोतरी हुई थी। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, फरवरी के अंत तक करीब 70 नियोक्ताओं ने 85 वीजा आवेदनों के लिए एक लाख डॉलर का शुल्क भुगतान किया था।
बता दें कि एच-1बी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षित विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। ट्रंप और अन्य आलोचक आरोप लगाते हैं कि कई कंपनियां इस कार्यक्रम का दुरुपयोग कर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को रखती हैं।
वहीं, कारोबारी समूह और कई कंपनियां कहते हैं कि कुछ क्षेत्रों में योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए यह कार्यक्रम जरूरी है। इससे अमेरिकी कंपनियों को दुनियाभर से प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती में मदद मिलती है।