Hanuman Ansh: आज के दौर में जब कोई फिल्ममेकर किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू करता है, तो उसके कमरे में हाई-एंड लैपटॉप्स, मल्टीपल स्क्रीन्स, एआई टूल्स और सॉफ्टवेयर का जाल बिछा होता है. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कारोबार कर पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर देने वाली फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कहानी किसी डिजिटल स्क्रीन पर नहीं, बल्कि सादे कागज पर नीली स्याही से लिखी गई थी.
संत नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित इस आध्यात्मिक फिल्म के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने अपनी राइटिंग प्रोसेस को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जो सभी को चौंका देगा. विशाल ने बताया कि जब उन्होंने इस विषय पर लिखना शुरू किया, तो सबसे पहले खुद को आधुनिक डिजिटल दुनिया से पूरी तरह काट लिया.
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विशाल चतुर्वेदी ने अपने इस अनूठे अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मैंने अपने कमरे से सभी तरह के डिजिटल डिवाइसेज (मोबाइल, लैपटॉप आदि) पूरी तरह हटा दिए थे. सिर्फ फिल्म की मुख्य कहानी ही नहीं, बल्कि हर एक नोट और सीन मैंने खुद पेन और कागज की मदद से अपने हाथों से लिखा. इसके बाद मैं उन लिखे हुए पन्नों की तस्वीरें अपने असिस्टेंट्स को भेजता था और वो उन्हें कंप्यूटर पर टाइप करके डिजिटल फॉर्मेट में तब्दील करते थे. इस डिजिटल डिटॉक्स ने मुझे बिना किसी भटकाव के पूरी एकाग्रता के साथ कहानी पर ध्यान लगाने में मदद की.”
विशाल ने ये भी साफ किया कि इस संवेदनशील और आस्था से जुड़े विषय पर उन्हें निर्माताओं का पूरा क्रिएटिव सहयोग मिला. प्रोड्यूसर्स ने उन पर कभी किसी बात की जल्दबाजी नहीं की और रिसर्च के लिए पूरा वक्त दिया.
पहले सीन में लगे 45 दिन, फिर 15 दिन में पूरी हो गई स्क्रिप्ट
आमतौर पर राइटर्स पूरी स्क्रिप्ट लिखने में महीनों या साल लगा देते हैं. लेकिन विशाल के साथ मामला बिल्कुल उल्टा था. उन्हें पूरी कहानी लिखने में ज्यादा वक्त नहीं लगा, बल्कि फिल्म के महज पहले सीन को कागज पर उतारने में ही डेढ़ महीना लग गया. विशाल ने बताया कि दिलचस्प बात ये रही कि पूरी कहानी लिखने में मुझे ज्यादा वक्त नहीं लगा, लेकिन फिल्म के सबसे पहले दृश्य (ओपनिंग सीन) को तय करने में ही पूरे 45 दिन लग गए. मेरे लिए पहला सीन सबसे अहम होता है, क्योंकि वही पूरी कहानी की आत्मा और दिशा तय करता है. एक बार जब मुझे वो पहला सीन मिल गया, तो मानों रास्ता अपने आप खुलता चला गया. इसके बाद मैंने बाकी की पूरी पटकथा सिर्फ 15 से 20 दिनों के भीतर लिखकर खत्म कर दी.
कागज और स्याही से 150 करोड़ तक का सफर
विशाल चतुर्वेदी का ये समर्पण और श्रद्धा ही है कि महज 2 करोड़ के बजट में शुरू हुई एक इंडिपेंडेंट फिल्म आज देश के 2,000 से ज्यादा थिएटर्स में गूंज रही है. हाथ से लिखे चंद पन्नों से शुरू हुआ ये सफर आज 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का इतिहास रच चुका है.

सोनाली नाईक
सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.
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