उत्तर प्रदेश के हापुड़ से पकड़े गए एक संदिग्ध से पूछताछ के दौरान सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को बड़ा सुराग हाथ लगा है। पकड़े गए आरोपी का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान और विदेश में बैठे गैंगस्टर शहजाद से जुड़ा पाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस, यूपी एटीएस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ विभिन्न संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
- Published: 15 Aug 2026, 12:01 PM IST
- Last Updated: 15 Aug 2026, 12:01 PM IST
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने एक बड़े संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। हापुड़ जिले से हिरासत में लिए गए एक संदिग्ध से लगातार की जा रही गहन पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि यह संदिग्ध पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में शरण लिए गैंगस्टर शहजाद के इशारे पर काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सतर्क हो गया है और वेस्ट यूपी के कई जिलों में फैले इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
विदेश में बैठे गैंगस्टर शहजाद के इशारे पर चल रहा था नेटवर्क
खुफिया सूत्रों के अनुसार, विदेशी धरती पर छिपे गैंगस्टर शहजाद द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं को भड़काने और उन्हें अवैध गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई जा रही थी। हापुड़ से पकड़ा गया आरोपी स्थानीय स्तर पर युवाओं को जोड़ने और उन्हें निर्देश देने के लिए मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ सुरक्षित मैसेजिंग ऐप्स और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए लगातार संपर्क साधा जा रहा था।
वेस्ट यूपी के 25 से अधिक युवक एजेंसियों के रडार पर
हापुड़ के संदिग्ध से मिले डिजिटल डेटा और मोबाइल संपर्कों के आधार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आसपास के इलाकों के करीब 25 युवक सुरक्षा एजेंसियों की जांच के घेरे में आ गए हैं। इनमें से कई युवकों की गतिविधियों पर खुफिया विभाग लंबे समय से नजर रखे हुए था। सुरक्षा टीमों ने कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए चिह्नित किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे इस नेटवर्क में किस हद तक सक्रिय थे।
हवाला के जरिए फंडिंग और हथियारों की आपूर्ति की आशंका
जांच एजेंसियां अब इस पूरे गठजोड़ के वित्तीय स्रोतों को खंगालने में जुट गई हैं। प्राथमिक जांच में संदिग्ध बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के जरिए धन मुहैया कराए जाने के संकेत मिले हैं। एजेंसियों को आशंका है कि इस अवैध फंडिंग का इस्तेमाल आपराधिक और विध्वंसक वारदातों को अंजाम देने तथा अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए किया जाना था। संबंधित बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स का विस्तृत रिकॉर्ड मंगाया गया है।
संयुक्त सुरक्षा एजेंसियों की छापेमारी और आगे की कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस, यूपी एटीएस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ विभिन्न संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पकड़े गए आरोपी से बरामद फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और नेटवर्क से जुड़े अन्य प्रमुख चेहरों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।