Sawan Hariyali Teej: सनातन धर्म में सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पावन पर्व मनाया जाता है. ये पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में समर्पित है. सावन की हरी-भरी घटाओं के बीच आने वाली यह तृतीया तिथि शिव और शक्ति के सच्चे प्रेम और अखंड सौभाग्य का संदेश लाती है. इस दिन भक्ति भाव से पूजन करने से घर में खुशहाली आती है. जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन शांत रहता है. श्रद्धालुओं को सही नियम का पालन करते हुए पूजा संपन्न करनी चाहिए. सही समय पर काम करने से हर इच्छा पूरी होती है और ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त होती है.
हरियाली अमावस्या व तीज की सही तिथि और मुहूर्त का विवरण
तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 06:46 से हुई है और इसका समापन आज शाम 05:28 बजे रहेगा. पूजन का समय सुबह 05:54 बजे से लेकर सुबह 09:07 बजे तक है. इसके साथ ही शाम के समय प्रदोष काल में पूजन का समय शाम 06:38 बजे से लेकर रात 08:51 बजे तक रहेगा. इन दोनों समयों में पूजन करना बहुत ही उत्तम माना जाता है. सही समय का ध्यान रखते हुए पूजा करने से पूरे परिवार में खुशहाली बनी रहती है. जो लोग नियमपूर्वक इस समय का पालन करते हैं, उन्हें अपनी पूजा का पूरा लाभ मिलता है और जीवन की समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाती हैं.
सुहागिन महिलाओं के लिए व्रत और सोलह श्रृंगार का नियम
हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और निरोगी शरीर के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं. इस पावन अवसर पर महिलाएं पूरे नियम के साथ सोलह श्रृंगार करती हैं. इस दिन हरे रंग की साड़ी और हरी चूड़ियां पहनना तथा हाथों में मेहंदी लगाना बहुत उत्तम माना जाता है. सही भाव के साथ व्रत का पालन करने से मन को शांति मिलती है. पूरे दिन नियम में रहकर भगवान का ध्यान करने से घर का वातावरण पवित्र बनता है. जो महिलाएं पूरी निष्ठा से यह व्रत रखती हैं, उनके जीवन से सभी रुकावटें दूर हो जाती हैं. शास्त्रों के अनुसार सही नियम से किया गया पूजन जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आता है.
शिव-पार्वती पूजन की विधि और कथा से मिलने वाला लाभ
शास्त्रों के अनुसार इसी पावन तिथि पर माता पार्वती की 108 वर्षों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. इस खास दिन प्रातःकाल या प्रदोष काल में मिट्टी के शिव-पार्वती बनाकर उनका विधिवत पूजन करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है. सही भाव से पूजन संपन्न करने पर घर में खुशहाली बनी रहती है. मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजन करने की यह परंपरा बहुत पुरानी रही है. दिए गए नियमों का पालन करते हुए पूजा करने से जीवन की हर अड़चन समाप्त हो जाती है. जो भक्त पूरे मन से भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हैं, उन पर ईश्वर का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है.. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.com पर संपर्क करें.

चंद्रेश शर्मा
चंद्रेश शर्मा एक अनुभवी वैदिक ज्योतिषी हैं, जिनका ज्योतिष से जुड़ाव 35 से अधिक सालों का है. किशोरावस्था में शुरू हुई उनकी ज्योतिष यात्रा समय के साथ गहरे अध्ययन, निरंतर अभ्यास और आध्यात्मिक समझ में विकसित हुई. पिछले 15 सालों से वे पेशेवर रूप से लोगों को वैदिक ज्योतिष के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं. ज्योतिष के साथ-साथ उन्होंने लगभग 38 वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी कार्य किया. इस दौरान उन्हें टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, थिसेनक्रुप और भूषण स्टील जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला. व्यावसायिक जीवन के अनुभव और वैदिक ज्योतिष का गहन अध्ययन उनके दृष्टिकोण को संतुलित और व्यावहारिक बनाता है. उन्होंने भारतीय विद्या भवन से ज्योतिष आचार्य और ज्योतिष अलंकार की उपाधियां प्राप्त की हैं. उनका मानना है कि वैदिक ज्योतिष केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को खुद को समझने, सही समय पर उचित निर्णय लेने और जीवन की परिस्थितियों का बेहतर सामना करने की दिशा भी देता है. वे करियर, विवाह, व्यवसाय, वित्त, ग्रह गोचर, कुंडली विश्लेषण, पंचांग और वैदिक ज्योतिष से जुड़े विषयों पर अपने वर्षों के अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. उनका उद्देश्य लोगों तक प्रामाणिक वैदिक ज्योतिष को सरल, व्यावहारिक और विश्वसनीय रूप में पहुंचाना है, ताकि वे जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय अधिक स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ ले सकें.
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