Hariyali Teej Vrat Katha In Hindi: हरियाली तीज एक महिला प्रधान उत्सव है जो हर साल सावन मास में मनाया जाता है। इस उत्सव से जुड़ी अनेक परंपराएं और मान्यताएं भी प्रचलित हैं।

Hariyali Teej Story: हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव 15 अगस्त, शनिवार को मनाय जाएगा। इस व्रत में महादेव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि हरियाली तीज का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। इस उत्सव से जुड़ी एक कथा भी है जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें हरियाली तीज की रोचक कथा…

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हरियाली तीज व्रत कथा

समय बीतने पर कई देवताओं और ऋषियों ने पार्वती के विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन उनका मन केवल भोलेनाथ में ही लगा था। जब उन्हें लगा कि उनकी इच्छा को कोई नहीं समझ रहा, तब उन्होंने संसार के सुख-सुविधाओं से दूर होकर तपस्या का मार्ग चुना।
कहा जाता है कि माता पार्वती घने जंगल में चली गईं और वहां वर्षों तक कठोर साधना की। कभी फल खाकर, कभी पत्तों के सहारे और कभी बिना अन्न-जल के भी उन्होंने भगवान शिव का ध्यान किया। मौसम बदलते रहे, लेकिन उनका संकल्प नहीं डगमगाया। उनकी भक्ति और समर्पण देखकर देवता भी आश्चर्यचकित थे।
लंबे समय तक चली इस तपस्या के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती की परीक्षा ली। जब उन्हें विश्वास हो गया कि पार्वती का प्रेम और समर्पण सच्चा है, तब वे उनके सामने प्रकट हुए। महादेव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने का वरदान दिया।
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का यह दिव्य मिलन हुआ था। तभी से इस तिथि को हरियाली तीज के रूप में मनाया जाने लगा। माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यता है कि हरियाली तीज की कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पुण्य बढ़ता है। यह कथा केवल व्रत की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, विश्वास, समर्पण और सच्चे प्रेम का संदेश भी देती है। माता पार्वती की अटूट श्रद्धा हमें सिखाती है कि दृढ़ निश्चय और भक्ति से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।