
राजस्थान के स्कूलों में जंक फूड पर बैनImage Credit source: Tim Graham/Getty Images/Pixabay
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को लेकर अहम पहल करते हुए जेनरेशन-जेड (Gen Z), जेनरेशन-अल्फा (Gen Alpha) और जेनरेशन-बीटा (Gen Beta) के कल्याण से जुड़े मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. जस्टिस अनूप कुमार ढंड की बेंच ने राज्य के स्कूलों में जंक फूड की बिक्री और बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम समेत शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर गंभीर चिंता जताई. कोर्ट ने स्कूलों में हाई फैट, शुगर और साल्ट (एचएफएसएस) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं.
कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूल कैंटीन और स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में एचएफएसएस खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जाएं. इनमें कार्बोनेटेड ड्रिंक, चिप्स, ट्रांस फैट वाले बेकरी उत्पाद और अन्य जंक फूड शामिल हैं. जिलाधिकारियों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को हर महीने निरीक्षण कर नियमों की पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है.
हाईकोर्ट ने कहा कि साल 2020 में सुरक्षित और संतुलित भोजन को लेकर नियम बनाए गए थे, लेकिन छह साल से अधिक समय गुजरने के बावजूद इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए. कोर्ट ने बच्चों को मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी बताया.
स्कूलों में पोषण समिति गठन का आदेश
आदेश के अनुसार, सभी स्कूलों में चार हफ्ते के भीतर ‘स्कूल खाद्य सुरक्षा और पोषण समिति’ गठित करनी होगी. आठ हफ्ते में कैंटीन में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी वाला मेन्यू बोर्ड लगाना होगा. मिड-डे मील और अन्य पोषण योजनाओं में भी संतुलित आहार के मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा.
कोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को जरूरी माना, लेकिन साथ ही चेताया कि तकनीक बच्चों की मूल सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं बननी चाहिए. हस्तलेखन, किताब पढ़ने, नोट्स बनाने और लिखित परीक्षा जैसी बुनियादी गतिविधियों को बनाए रखने पर जोर दिया गया.
कोर्ट ने 8 हफ्ते में जिला कलेक्टरों से मांगी रिपोर्ट
इसके अलावा ग्रामीण सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, इंटरनेट, स्वास्थ्य जांच, शौचालय, पेयजल और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. जिला कलेक्टरों को ग्रामीण स्कूलों का औचक निरीक्षण कर आठ हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा गया है.
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ध्वज आर्य
राजस्थान में 2008 से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत. 18 वर्षों के पत्रकारिता करियर में राजनीति, सामाजिक मुद्दे, विकास, अपराध और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम. खबर की तह तक जाने, तथ्यों की पुष्टि करने और जटिल विषयों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने में विशेषज्ञता. प्रिंट से डिजिटल मीडिया तक के बदलाव को करीब से देखा. प्रिंट ,डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्लेटफार्म पर काम का अनुभव. पत्रकारिता की शुरुआत के 10 साल क्राइम रिपोर्टिंग की. पूर्व में समाचार प्लस, इंडिया न्यूज, दैनिक भास्कर और अब नेशनल चैनल TV9 भारतवर्ष में राजस्थान ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी. इस सफर के दौरान ब्रेकिंग न्यूज से लेकर इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के साथ कई बड़े खुलासे, कई बड़े चुनाव, आपदा, बड़े आंदोलनों की ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज समेत भारत पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) को कवर किया. क्राइम की खबरों, बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और युद्ध कवरेज में सबसे ज्यादा रूचि. मेरा मानना है कि खबर सिर्फ एक घटना नहीं है, उसके पीछे का सच भी है. पत्रकारिता का काम सत्ता पक्ष से सवाल पूछना और जनता की आवाज़ बनना है. निष्पक्षता, गति और सटीकता मेरी रिपोर्टिंग के तीन स्तंभ हैं.
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