आखिर कहां छिपा है केयरटेकर वरुण कुमार? रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद से गायब, तलाश में जुटी पुलिस

रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हुई थी हत्या.

Bhopal News: भोपाल के सूरज नगर में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस की जांच 33 वर्षीय केयरटेकर वरुण कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही है. वारदात के बाद से वरुण फरार है. CCTV फुटेज में वह हत्या के कुछ देर बाद घर से निकलता दिखाई दिया है. पुलिस को उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई-बीना रोड पर मिली है. अब पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें रेलवे स्टेशन, संभावित रास्तों और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वरुण वहां से किस दिशा में गया और फिलहाल कहां छिपा है?

हत्या के बाद से गायब है वरुण

सूरज नगर में 1982 बैच के 70 वर्षीय रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस ने घर में काम करने वाले लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की. इसी दौरान 33 वर्षीय केयरटेकर वरुण कुमार पुलिस की जांच के केंद्र में आया. बताया जा रहा कि वरुण मूल रूप से पंजाब के पटियाला जिले के नाभा का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, वरुण को राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए घटना से सिर्फ दो-तीन दिन पहले ही 24 घंटे के केयरटेकर के तौर पर नौकरी पर रखा गया था. उसके रहने के लिए घर के पिछले हिस्से में एक कमरा भी दिया गया था, लेकिन हत्या के बाद से ही वह लापता है. पुलिस अब उसके पुराने पते, पहचान, संपर्क और नौकरी से जुड़ी पूरी जानकारी जुटा रही है.

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एजेंसी के जरिए मिली थी नौकरी

पुलिस जांच में सामने आया है कि वरुण को भोपाल की वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के जरिए राकेश अग्रवाल के घर पर नौकरी मिली थी. उसका काम रिटायर्ड IAS अधिकारी को समय पर दवाएं देना, घर के अंदरूनी हिस्से की देखभाल करना, पानी भरना और जरूरत का सामान लाना था. हत्या के बाद पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के कार्यालय पहुंची. वहां से वरुण से जुड़े दस्तावेज जुटाए गए हैं. अब पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि एजेंसी ने उसे नौकरी देने से पहले किस तरह की जांच की थी और उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था या नहीं.

चरित्र प्रमाण पत्र की वैधता भी जांच के घेरे में

पुलिस के मुताबिक, नौकरी के समय वरुण ने पंजाब पुलिस की ओर से जारी चरित्र प्रमाण पत्र दिया था. यह प्रमाण पत्र साल 2025 में जारी किया गया था, लेकिन उसकी वैधता करीब पांच महीने पहले खत्म हो चुकी थी. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि वैधता खत्म होने के बाद भी एजेंसी ने वरुण को दोबारा सत्यापन के बिना नौकरी कैसे दी. वरुण के रजिस्ट्रेशन, पते, पुराने रिकॉर्ड और पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी भी खंगाली जा रही है.

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हत्या के बाद CCTV में दिखा वरुण

पुलिस के मुताबिक, राकेश अग्रवाल की हत्या रात करीब 12 बजे से 2 बजे के बीच होने की आशंका है. वारदात के वक्त उनकी पत्नी भी घर में मौजूद थीं, लेकिन वह दूसरे कमरे में सो रही थीं. पुलिस को जांच के दौरान एक अहम CCTV फुटेज मिली है. रात करीब 2 बजकर 15 मिनट के आसपास वरुण सूरज नगर से भदभदा की तरफ जाने वाली सड़क पर एक दुकान के CCTV कैमरे में दिखाई दिया. फुटेज में वह अकेले सड़क पर जाता नजर आ रहा है.

इसके बाद वरुण किस रास्ते से आगे गया, इसका पता लगाने के लिए पुलिस आसपास के दूसरे CCTV कैमरों की फुटेज भी देख रही है. पुलिस को उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई-बीना रोड पर मिली है. इसके बाद उसका पता लगाने के लिए रेलवे स्टेशनों और संभावित रास्तों की भी जांच की जा रही है.

घर में बिखरा मिला सामान, गैस की नॉब भी खुली थी

हत्या के बाद राकेश अग्रवाल के घर की अलमारियों का सामान बिखरा हुआ मिला. इसके अलावा घर में LPG सिलेंडर का पाइप और गैस की नॉब खुली मिली थी. पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि गैस खुली छोड़ने के पीछे क्या वजह थी. पुलिस को आशंका है कि घर से निकलने से पहले गैस खुली छोड़ने का मकसद आग लगाने का हो सकता है. हालांकि पुलिस अभी हत्या के कारण को लेकर किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है. ACP अंकिता खातरकर के मुताबिक, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घर में जबरन घुसने के कोई निशान थे या नहीं, घर से कोई सामान गायब हुआ या नहीं और वारदात के दौरान घर में मौजूद लोगों की गतिविधियां क्या थीं.

केयरटेकर से जुड़े दूसरे मामलों की भी पड़ताल

राकेश अग्रवाल हत्याकांड के बाद पुलिस ने भोपाल में केयरटेकर से जुड़े पुराने मामलों की भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है. 25 सितंबर को अवधपुरी में 71 वर्षीय मोहन चौधरी पर घर में हथौड़े से हमला किए जाने का मामला सामने आया था. इसके अलावा जून में ऐशबाग में 64 वर्षीय हेमंत वारिक और 62 वर्षीय शकुंतला की हत्या के मामले में भी परिचित व्यक्ति की भूमिका सामने आई थी. अप्रैल 2025 में इंद्रपुरी में 99 वर्षीय पूर्व DGP एनएम जोशी के साथ उनके केयरटेकर से जुड़ी वारदात का मामला भी सामने आया था. पुलिस इन मामलों को राकेश अग्रवाल हत्याकांड से सीधे तौर पर जोड़कर नहीं देख रही है, लेकिन शहर में बुजुर्गों के लिए काम करने वाले केयरटेकरों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है.

शहर की केयरटेकर एजेंसियां भी पुलिस के रडार पर

इस हत्याकांड के बाद भोपाल में काम कर रही केयरटेकर एजेंसियों की कार्यप्रणाली भी पुलिस की जांच के दायरे में आ गई है. पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने शहर की केयरटेकर एजेंसियों और उनके कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच कराने की बात कही है. पुलिस अब इन एजेंसियों के जरिए काम करने वाले केयरटेकरों की पहचान, पता और पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी जुटाएगी. खासतौर पर यह देखा जाएगा कि एजेंसियां कर्मचारियों को नौकरी देने से पहले उनके दस्तावेज और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच किस तरह करती हैं.

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल- वरुण कहां है?

फिलहाल राकेश अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल वरुण कुमार का पता लगाना है. CCTV फुटेज में घर से निकलने के बाद उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई-बीना रोड पर मिली है. पुलिस अलग-अलग रास्तों और रेलवे स्टेशनों के CCTV फुटेज को जोड़कर उसकी गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है. साथ ही पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड, नौकरी पर रखे जाने की प्रक्रिया और घटना के समय घर में उसकी मौजूदगी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

शिव चौबे

शिव चौबे

शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.

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