आईएएस रिंकू सिंह राही और कोल्ड स्टोरेज मालिक से बीते दिनों जालौन में विवाद हुआ था। बाद में उनका ट्रांसफर कर दिया गया था।

यूपी के IAS रिंकू सिंह राही ने एक बार फिर बगावती तेवर दिखाए हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को 6 पन्नों का एक लेटर लिखा है। जिसमें उन्होंने डिमांड की है कि उन्हें बाकी के बैचमेट जैसे ही जिम्मेदारी दी जाए। अगर वह इसके लिए योग्य न

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IAS अधिकारी ने यह लेटर 15 जुलाई को लिखा है, जो रविवार दोपहर करीब 12 बजे वायरल हुआ। रिंकू सिंह वर्तमान में जालौन के उरई में जॉइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हैं।

रिंकू सिंह का 23 जून को भाजपा नेता और ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन से विवाद हुआ था। IAS रिंकू सिंह भाजपा नेता के 'बेतवा आइस एंड कोल्ड स्टोरेज' का निरीक्षण करने पहुंचे थे, जहां रिंकू सिंह ने निरंजन के मोबाइल पर हाथ मारा था और उन्हें धक्का दिया था। बाद में उनका ट्रांसफर जालौन से उरई कर दिया गया था।

रिंकू सिंह राही ने ब्लॉक प्रमुख के साथ धक्का-मुक्की की थी।

रिंकू सिंह राही ने ब्लॉक प्रमुख के साथ धक्का-मुक्की की थी।

अब पढ़िए लेटर में रिंकू सिंह ने क्या लिखा…

फेसबुक पर शेयर किया लेटर, लिखा- नौकरी कर पाना संभव नहीं होगा

IAS रिंकू सिंह ने फेसबुक पर लेटर पोस्ट करते हुए अपनी पीड़ा भी जाहिर की है। उन्होंने लिखा- सुप्रशासन और कम कार्य तो कम वेतन। एक साथी ने मेरी स्थिति की तुलना ज्वालामुखी से की थी। उनका कहना था कि जिस प्रकार ज्वालामुखी के भीतर निरंतर उथल-पुथल चलती रहती है, विशाल मात्रा में लावा बनता रहता है, किंतु बाहर केवल उसका एक छोटा-सा भाग ही दिखाई देता है, उसी प्रकार व्यवस्था के भीतर कुव्यवस्थाओं के विरुद्ध मेरा संघर्ष भी अधिकांशत: अनवरत चलता रहता है और उसका केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही सार्वजनिक रूप से सामने आता है, और यह लावा सृजन करता है।

इसका एक कारण यह भी है कि सिस्टम के भीतर इस संघर्ष के मार्ग पर मेरे चलने को स्वीकार (चलने की बात कर ही नहीं रहा) करने वाले लोग बहुत कम हैं। शायद उन्हें स्वयं अथवा अपने निकटस्थ लोगों के लिए डर होता है कि कहीं सरकारी व्यवस्था से होने वाले उनके लालच की पूर्ति को ऐसा कोई आकर न रोक दे। अथवा एक अहम होता है कि वह क्या किसी से कम ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हैं। वहीं व्यवस्था से बाहर के अधिकांश लोग इन आंतरिक प्रशासनिक संघर्षों को या तो समझ ही नहीं पाएंगे, या भ्रमित हो जाएंगे, अथवा इसे समय की बर्बादी मानेंगे। इसलिए सार्वजनिक रूप से केवल उतनी ही बातें साझा की जाती हैं, जितनी लोकहित में आवश्यक और उचित हों।

इसी क्रम में, शुभचिंतकों के लगातार आग्रह पर मैं अपना एक पत्र साझा कर रहा हूं। संभवतः इस पत्र से इस प्रश्न का उत्तर मिल सके कि आखिर मैं करना चाहता हूं? मेरी लड़ाई/संघर्ष से क्या आमजन को कोई लाभ मिल पाएगा? और क्यों लगभग हर स्थान पर मुझे इसी प्रकार की परिस्थितियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ता है? क्या जीवन भर में कोई आउटपुट दे पाऊंगा (जबकि zero output का कारण है किसी का विश्वास न होना कि ऐसा हो सकता है। हालांकि सुप्रशासन पर यदि चर्चा ही हो गई तो भी बहुत कुछ आउटपुट आ जाएगा.... यदि कुछ कार्य हो गया तो राजनीति ही सुधर जाएगी)।

जो साथी अथवा वरिष्ठजन समय-समय पर मुझे यह सलाह देते हैं कि मैं अन्य लोगों की तरह समझौता करके कार्य क्यों नहीं कर लेता, उनसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि कृपया मेरे बारे में एक बात स्वीकार कर लें- यदि सुप्रशासन (Basic Governance) नहीं होगा, तो मेरे लिए भी इस नौकरी को सामान्य रूप से करना संभव नहीं होगा।

रिंकू सिंह राही की बड़ी बातें…

1- बिना काम के सैलरी नहीं लूंगा

मौजूदा पद एसडीएम (न्यायिक) के पद पर रहते हुए मुझे दिनभर में करीब चार घंटे ही काम मिलता है। जब मैं अपनी पूरी क्षमता के मुताबिक काम नहीं कर पा रहा हूं, तो सरकार चाहे तो आधी सैलरी दे सकती है। मुझे ऐसी जगह तैनात किया जाए, जहां नियमों के मुताबिक काम कर सकूं। अगर उत्तर प्रदेश में ऐसी जगह नहीं है, तो उन्हें किसी दूसरे राज्य में भेजने पर भी विचार किया जाए।

उन्होंने डीएम के जनता दर्शन के कार्यक्रम को दिखावा बताया और कहा कि इससे अंतर्मन को ठेस पहुंचती है। कहा कि जनता दर्शन में डीएम के साथ समय गुजारना खुद को धोखा देने जैसा है।

2- बिना जिम्मेदारी के सैलरी मिलती रही

लेटर में रिंकू सिंह ने शाहजहांपुर में हुई उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें वकीलों के सामने उनके उठक-बैठक का वीडियो सामने आया था। उन्होंने लिखा- इस घटना के बाद उन्हें करीब एक साल तक राजस्व परिषद से संबद्ध रखा गया, जिसके कारण बिना किसी जिम्मेदारी के सैलरी मिलती रही। उन्होंने कहा कि यह उनके नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ था। बाद में उनके अनुरोध पर उनकी तैनाती जालौन में की गई।

3- सुशासन के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए

राही ने पत्र में दावा किया कि जालौन में सुशासन स्थापित करने के उद्देश्य से उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत और मोहल्ले के लिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाए। इनमें अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को जोड़ा गया, ताकि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ाई जा सके।

उन्होंने कहा कि इन समूहों के माध्यम से ग्राम पंचायत सचिव, लेखपाल, सफाईकर्मियों सहित अन्य क्षेत्रीय कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और कार्यों की सोशल ऑडिट संभव हुई। इससे कई मामलों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जानकारी सामने आई तथा आम लोगों ने साक्ष्यों के साथ शिकायतें और सुझाव भी दिए।

तस्वीर जुलाई, 2025 की है। उस वक्त IAS अफसर रिंकू सिंह राही ने वकीलों के सामने खुद उठक-बैठक लगाई थी।

तस्वीर जुलाई, 2025 की है। उस वक्त IAS अफसर रिंकू सिंह राही ने वकीलों के सामने खुद उठक-बैठक लगाई थी।

4- महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा न होने का आरोप लगाया

रिंकू सिंह ने लेटर में यह भी आरोप लगाया कि लगातार अनुरोध के बावजूद कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक सूचनाएं इन व्हाट्सएप समूहों में उपलब्ध नहीं कराई गईं। इनमें लेखपालों, ग्राम पंचायत सचिवों समेत क्षेत्रीय कर्मचारियों की डेली अटेंडेंस, लंबित कार्य और प्रतिदिन किए गए कामों से जुड़ी जानकारी शामिल है। उनका कहना है कि ऐसी सूचनाएं सार्वजनिक होने से प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही और अधिक मजबूत हो सकती थी।

5- काम न करने देने का आरोप लगाया

रिंकू सिंह ने लेटर में आरोप लगाया कि जालौन तहसील में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई के दौरान उन्हें प्रशासनिक और अन्य स्तरों पर बाधाओं का सामना करना पड़ा।

उन्होंने अपने पत्र में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और जालौन के भाजपा विधायक गौरी शंकर वर्मा का भी जिक्र किया है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि जालौन में एसडीएम रहते हुए कुछ अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी लिखा कि कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच प्रभावित हुई।

दरअसल, 22 जून को लखनऊ की एक इमारत में आग लगी थी। जिसमें 15 युवाओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद एसडीएम जालौन रहते हुए रिंकू सिंह राही ने रामराजा निरंजन के कोल्ड स्टोरेज पर जांच की थी। 10 मिनट तक आग लगने की मॉकड्रिल में कोल्ड स्टोरेज में किसी भी तरह से आग बुझाने के इंतजाम की शुरुआत नहीं हो सकी थी, इस पर रिपोर्ट मांगी थी। कोल्ड स्टोरेज संचालन संबंधी दस्तावेज भी नहीं थे। राही का दावा है कि इसी पूरे घटनाक्रम के बाद जांच समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही उनका तबादला एसडीएम (न्यायिक) के पद पर कर दिया गया।

2009 में रिंकू सिंह पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। उन्हें सात गोलियां लगी थीं।

2009 में रिंकू सिंह पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। उन्हें सात गोलियां लगी थीं।

जानिए कौन हैं रिंकू सिंह राही…

हाथरस के रहने वाले, पहले PCS फिर IAS बने

रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंकू के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी।

अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे।

परिवार में पत्नी सुलेखा योगा टीचर रही हैं। 10 साल का एक बेटा ध्रुव राही है। ताऊ रघुवीर सिंह राही बसपा शासनकाल में जिलाध्यक्ष रहे हैं।

परिवार के साथ रिंकू सिंह राही।

परिवार के साथ रिंकू सिंह राही।

भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर 7 गोलियां मारी गई थीं

पीसीएस बनने के बाद 2008 में रिंकू सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। रिंकू ने दैनिक भास्कर को बताया था- जांच में मुझे पता चला था कि 100 करोड़ रुपए गबन हुआ। इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के अलावा पूरा गैंग था।

उस समय बसपा सरकार थी। 26 मार्च, 2009 को रिंकू एक सहकर्मी के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी उन पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इसमें रिंकू राही को सात गोलियां लगी थी। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा तक बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया था। साथ ही एक कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी।

रिंकू राही को सात गोलियां लगीं, जिनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया।

रिंकू राही को सात गोलियां लगीं, जिनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया।

एक महीने अस्पताल में भर्ती रहे, धरना दिया था

इस हमले के बाद रिंकू को हायर सेंटर मेरठ ले जाया गया था। करीब एक महीने मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे थे। ऑपरेशन के बाद वह ठीक होकर लौटे थे। इसके बाद घोटाला के खुलासे के लिए रिंकू ने RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। लेकिन, एक साल बाद भी उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं। इसके बाद 26 मार्च, 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया था। पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हॉस्पिटल लखनऊ भेज दिया था।

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