Sep 14, 2026 08:37 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

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यात्री एयर इंडिया के 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के तहत यात्रा कर रहे थे। अमृतसर में उन्हें एयर इंडिया की घरेलू यात्रा के लिए 'D' (डोमेस्टिक) बोर्डिंग पास दिया गया था, लेकिन साथ ही म्यूनिख जाने वाली लुपथांसा एयरलाइन का बोर्डिंग पास भी वहीं जारी कर दिया गया था।

IGI Airport Immigration

दिल्ली पहुंचने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग-अलग करना अनिवार्य था, जो नहीं किया गया।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर एक बड़ी सुरक्षा लापरवाही सामने आई है। इस लापरवाही और सुरक्षा चूक के लिए फिर से एयर इंडिया निशाने पर है। दरअसल, एयर इंडिया के पैसेंजर-हैंडलिंग सिस्टम की लापरवाही के कारण तीन इतालवी नागरिक बिना किसी अनिवार्य इमिग्रेशन क्लीयरेंस (आव्रजन जांच) के ही भारत से म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में हुई इस गंभीर चूक पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

यह घटना 4 सितंबर की सुबह हुई, जब तीनों यात्री अमृतसर से एयर इंडिया की फ़्लाइट AI-1115 से रात करीब 12:50 बजे दिल्ली पहुंचे। लगभग एक घंटे बाद, लगभग 1:45 बजे, वे म्यूनिख के लिए लुफ्थांसा की फ़्लाइट LH-763 में सवार हुए और भारत से चले गए। इस बीच इन यात्रियों ने भारत से निकलने से पहले इमिग्रेशन नहीं कराया।

यात्रियों ने इमिग्रेशन को कैसे बायपास किया?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नोटिस के मुताबिक, ये तीनों यात्री एयर इंडिया के 'हब-एंड-स्पोक' (Hub-and-spoke) मॉडल के तहत यात्रा कर रहे थे, जिसके तहत छोटे एयरपोर्ट से यात्रियों को इंटरनेशनल फ़्लाइट से जुड़ने से पहले एक बड़े हब तक भेजा जाता है। इस मामले में, पैसेंजर अमृतसर से दिल्ली गए थे और उन्हें एयर इंडिया की फ़्लाइट के लिए "D" या डोमेस्टिक बोर्डिंग पास दिए गए थे। अमृतसर में, उन्हें म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा फ़्लाइट के लिए भी बोर्डिंग पास दिए गए थे।

एक्स्ट्रा बोर्डिंग पास जारी करने पर सवाल

अब इस लापरवाही के उजागर होने के बाद उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को एक्स्ट्रा बोर्डिंग पास जारी करने पर सवाल उठाया है, यह बताते हुए कि एयर इंडिया के SOP में सिर्फ़ दो कैटेगरी के बोर्डिंग पास दिए गए हैं – डोमेस्टिक पैसेंजर के लिए "D" और इंटरनेशनल पैसेंजर के लिए "I" – और इस मामले में अपनाए गए प्रोसेस के बारे में नहीं बताया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि दिल्ली पहुँचने पर पैसेंजर की पहचान इंटरनेशनल ट्रैवलर के तौर पर होनी चाहिए थी और उन्हें डोमेस्टिक पैसेंजर फ़्लो से इमिग्रेशन में भेज दिया जाना चाहिए था। मंत्रालय के मुताबिक, इसके बजाय, उन्हें गेट 39 से इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफ़र एरिया ले जाया गया। वहाँ से, वे डिपार्चर एरिया में गए और इमिग्रेशन चेकपॉइंट पर पहुँचे बिना लुफ्थांसा फ़्लाइट में चढ़ गए।

एसओपी (SOP) के 5 बड़े नियमों की उड़ीं धज्जियां

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने इस घटना के संबंध में एयर इंडिया के डोमेस्टिक-इंटरनेशनल (DI) ऑपरेशंस SOP के पांच नियमों को उजागर किया है। पहला बोर्डिंग पास के तय सिस्टम से जुड़ा है, जिसके तहत सिर्फ़ D और I कैटेगरी के पास ही जारी किए जाने हैं। दूसरा, डोमेस्टिक और इंटरनेशनल पैसेंजर को उतरने के बाद अलग करना ज़रूरी है। मिनिस्ट्री ने कहा कि तीनों पैसेंजर के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

कारण बताओ नोटिस जारी

तीसरे नियम में कहा गया है कि सिर्फ़ I-कैटेगरी के बोर्डिंग पास वाले पैसेंजर को ही इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफ़र डेस्क तक जाने की इजाज़त होनी चाहिए। मिनिस्ट्री ने सवाल उठाया है कि जिन तीन पैसेंजर के पास अपनी डोमेस्टिक यात्रा के लिए D बोर्डिंग पास थे, उन्हें उस एरिया में कैसे जाने दिया गया। बाकी दो नियम एयर इंडिया की हब और स्पोक दोनों एयरपोर्ट पर चौबीसों घंटे एक नोडल ऑफ़िसर और मॉनिटरिंग टीम रखने की ज़रूरत से जुड़े हैं। उनके काम में यह पक्का करना शामिल है कि पैसेंजर ज़रूरी फ़ॉर्मैलिटीज़ पूरी किए बिना किसी गलत रास्ते से इंटरनेशनल डिपार्चर प्रोसेस में न घुसें। मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में मॉनिटरिंग सिस्टम फेल हो गया। इसके साथ ही मंत्रालय ने कारण बताओ नोटिस जारी कर एयर इंडिया से घटना के कई पहलुओं पर डिटेल में जवाब मांगा है।