दुर्ग के प्रोफेसर ने एंडोस्कोपिक कैमरे से IGKV का एंटोमोलॉजी पेपर लीक किया, इस सिलसिले में पुलिस ने 36 घंटे में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक निजी कॉलेज से जुड़ा एक प्रोफेसर और उसके पांच छात्र अब सलाखों के पीछे हैं। वजह है इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की परीक्षा का पेपर लीक होना, वो भी एक ऐसे तरीके से जो सुनकर पुलिस वाले भी हैरान रह गए। आरोप है कि प्रोफेसर ने सील बंद लिफाफे में छोटा सा छेद करके अंदर एंडोस्कोपिक कैमरा घुसा दिया और पूरा प्रश्नपत्र वीडियो में कैद कर लिया।

मामला बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष के एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा से जुड़ा है, जो 20 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक IGKV से संबद्ध 28 कृषि महाविद्यालयों में होनी थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से महज दो घंटे पहले पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

कैसे खुला राज

घटना की जानकारी सबसे पहले 20 अगस्त की सुबह 8:41 बजे मिली, जब कवर्धा स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र को एक ईमेल मिला जिसमें पेपर लीक होने का दावा किया गया था। इसके कुछ ही मिनटों बाद, 8:54 बजे अन्य अधिकारियों को भी ऐसा ही एक ईमेल मिला। इतना ही नहीं, छात्रों और उनके प्रतिनिधियों ने भी व्हाट्सऐप के जरिए विश्वविद्यालय को पेपर से जुड़े सवालों के घूमने की जानकारी दे दी थी।

विश्वविद्यालय की स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ की प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एन आर रंगारे की शिकायत पर रायपुर के तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाने के सौ से ज्यादा जवानों की टीम बनाई। साइबर टीम ने लीक हुए पेपर, स्क्रीनशॉट, तस्वीरों, मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट की बारीकी से जांच की, जिससे सूत्र दुर्ग के छात्र अनुज मिंज तक जा पहुंचे। पुलिस उपायुक्त (अपराध एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला के मुताबिक, यह पूरा मामला महज 36 घंटे के भीतर सुलझा लिया गया।

प्रोफेसर निकला मास्टरमाइंड

जांच में सामने आया कि दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में पढ़ाने वाले प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ही इस पूरे खेल का सरगना था। साल 2019 से इसी कॉलेज में कार्यरत सोनकेसरिया का काम रायपुर स्थित जोरा के कृषि महाविद्यालय से आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लेकर आना और उत्तर पुस्तिकाएं जमा करना था। पुलिस के मुताबिक, 17 अगस्त को उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के बाद उसने अगली परीक्षाओं के पेपर कलेक्ट किए। ज्यादातर पेपर तो उसने कॉलेज में ही रख दिए, मगर सील बंद एंटोमोलॉजी का पेपर वह अपने घर ले गया।

आरोप है कि घर पहुंचकर उसने लिफाफे के निचले हिस्से में एक छोटा सा छेद किया और उसमें एंडोस्कोपिक कैमरा डालकर पूरा प्रश्नपत्र स्कैन कर लिया। इसके बाद उसने वीडियो से करीब 15 सवाल हाथ से लिखे और इन्हें अजय नायक व दो अन्य छात्रों को 11 हजार रुपये में बेच दिया। नायक ने आगे यह पेपर त्रिदेव पटेल, नितिन पांडेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू के साथ बांट दिया।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल और मोबाइल कनेक्टर बरामद किए हैं। गिरफ्तार छात्रों में अजय नायक (20), त्रिदेव पटेल (22), नितिन पांडेय (22), अनुज मिंज (22) और आदित्य साहू (20) शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इस मामले से जुड़े दो और आरोपी अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि पूछताछ में प्रोफेसर ने कबूल किया कि उसने इसी तरीके से 7 अगस्त को प्लांट पैथोलॉजी का पेपर भी लीक किया था। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2008 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज किया गया है। रद्द हुई एंटोमोलॉजी परीक्षा को अब सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा कराए जाने की योजना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस मामले की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए आगे की जांच जारी रहने की बात कही है।