क्या पुलिस आपके फोन का लॉक तोड़ सकती है? IIT बॉम्बे के छात्र साहिल का iPhone बना चुनौती

लॉक की वजह से नहीं मिल पा रहा डेटाImage Credit source: getty image

आजकल लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में फोन काफी अहम है, ऑनलाइन पेमेंट से लेकर दूसरों से कनेक्ट करने तक फोन के बिना कुछ भी पॉसिबल नहीं लगता. एक हथेली भर के फोन में लोगों की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी अहम जानकारियां भी होती हैं. ऐसे में फोन की सिक्योरिटी काफी जरूरी है और इस मामले में एप्पल कंपनी का नाम सामने आता है. एप्पल के फोन का सिक्योरिटी सिस्टम काफी अच्छा है, लेकिन कभी-कभी ये ही सिस्टम मुश्किल वक्त को और मुश्किल बना देती है.

दरअसल, आईफोन के सिक्योरिटी सिस्टम का जिक्र इस समय इसलिए किया जा रहा है क्योंकि IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत की जांच में ये एक रुकावट बन गया है. मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने साहिल का लॉक iPhone 17 बड़ी चुनौती बना हुआ है. पुलिस को फोन का पासकोड नहीं मिला है और जांच कर रहे लोग मानते हैं कि फोन में मौजूद डेटा से 18 सितंबर की घटनाओं को समझने में मदद मिल सकती है.

क्या है साहिल का पूरा मामला?

18 सितंबर 2026 को IIT बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के सेकेंड ईयर के स्टूडेंट साहिल वाकोडे का शव पवई कैंपस के हॉस्टल कमरे में फंदे से लटका मिला. मौत से कुछ घंटे पहले सेमेस्टर एग्जाम के दौरान साहिल पर मोबाइल से ChatGPT इस्तेमाल करने का आरोप लगा था.

उनके माता-पिता ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला पर जाति के आधार पर प्रताड़ित करने और मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है. IIT बॉम्बे ने उन्हें डीन पद से हटा दिया है. जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है. इस मामले में अब फोन को अहम कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि एग्जाम हॉल से निकलने और साहिल के हॉस्टल पहुंचने के बीच तकरीबन 47 मिनट का गैप है.

Iit Bombay Sahil Wakode

साहिल वाकोडे का पूरा मामला

47 मिनट की कड़ी का हिसाब

क्राइम ब्रांच अब इन 47 मिनटों की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि साहिल इस दौरान किन लोगों से मिला और क्या किया. हालांकि, इस में सबसे बड़ी परेशानी फोन का पासवर्ड बना है. दरअसल, साहिल के पास iPhone 17 था, जिसमें पैटर्न लॉक है, जिसके बारे में किसी को भी नहीं पता है. हालांकि, ये कंफर्म नहीं कहा जा सकता कि फोन से अहम सुराग मिलेगा.

फोन लॉक होने पर पुलिस के सामने क्या चुनौती होती है?

  • फोन का पासकोड या पैटर्न पता न होने पर सीधे डेटा देखना मुश्किल हो सकता है.
  • आधुनिक iPhone में डेटा की सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्शन जैसी तकनीक इस्तेमाल होती है.
  • पुलिस फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से फोन से उपलब्ध डेटा हासिल करने की कोशिश कर सकती है.
  • जांच सिर्फ फोन पर निर्भर नहीं है; CCTV, लैपटॉप, कॉल डिटेल और गवाहों के बयान भी अहम हैं.

क्या पुलिस किसी भी iPhone का लॉक तोड़ सकती है?

एप्पल के मुताबिक, iPhone में सुरक्षा और डेटा एन्क्रिप्शन को इस तरह मजबूत बनाया गया है कि कंपनी भी आधुनिक iPhone से सीधे डेटा निकालने में सक्षम नहीं है. एप्पल का कहना है कि iOS 8 और उसके बाद के सिस्टम में पासकोड-आधारित एन्क्रिप्शन के कारण पुरानी डेटा-एक्सट्रैक्शन प्रक्रिया काम नहीं करती.

कंपनी लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसियों से कानूनी अनुरोध मिलने पर उपलब्ध जानकारी साझा करती है, लेकिन लॉक स्क्रीन की सुरक्षा कमजोर करने वाला कोई खास सिस्टम बनाने का विरोध करती है. एप्पल के अनुसार, ऐसा सिस्टम बनाना कई दूसरे iPhone को भी खतरे में डाल सकता है. कंपनी ने इसे लेकर सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं जताई थीं.

फेस आईडी के अलावा पासकोड भी जरूरी

iPhone का पासकोड सिर्फ स्क्रीन लॉक नहीं करता, बल्कि फोन में मौजूद डेटा की सिक्योरिटी में भी अहम भूमिका निभाता है. कंपनी के मुताबिक, iPhone में मजबूत एन्क्रिप्शन और सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं, इसलिए बिना सही पासकोड डेटा तक पहुंचना आसान नहीं है. कई बार गलत पासकोड डालने पर फोन की सिक्योरिटी और सख्त हो जाती है. Face ID होने के बावजूद कुछ स्थितियों में पासकोड जरूरी होता है, जैसे फोन रीस्टार्ट होने के बाद.

iPhone से क्या पता करना चाहती है पुलिस?

क्राइम ब्रांच यह जानना चाहती है कि 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान साहिल ने फोन का इस्तेमाल किया था या नहीं और उस दौरान उसने क्या सर्च किया था. इसके अलावा फोन मेंCTV फुटेज में परीक्षा के दौरान साहिल के जेब में रखे फोन की तरफ देखने और उसके बाद प्रोफेसर द्वारा उससे पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है.

Iit Bombay Sahil Wakode Case Update

किन सवालों का चाहिए जवाब?

पुलिस अब इस घटनाक्रम को फोन और दूसरे डिजिटल सबूतों से मिल मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड से परीक्षा खत्म होने के बाद की गतिविधियों के बारे में भी सुराग मिल सकते हैं. CCTV फुटेज में परीक्षा के दौरान साहिल के जेब में रखे फोन की तरफ देखने और उसके बाद प्रोफेसर के उससे पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है. पुलिस अब इस घटनाक्रम को फोन और दूसरे डिजिटल सबूतों से मिलाकर देख रही है.

अंकिता पाण्डेय

अंकिता पाण्डेय

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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