Published: Monday, July 27, 2026, 15:20 [IST]
Prof. V. Kamakoti: NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार NTA की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई है। इसमें शिक्षा और तकनीक से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल हैं।
इस समिति में IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि भी हैं। वह भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI के विकास से जुड़े वैज्ञानिक हैं। कंप्यूटर साइंस और साइबर सिक्योरिटी में लंबे अनुभव के कारण उनसे परीक्षा सिस्टम में तकनीकी बदलाव और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम सुझावों की उम्मीद की जा रही है।
कौन हैं प्रो. वी. कामकोटि? (Who is Prof. V. Kamakoti?)
प्रो. वी. कामकोटि का जन्म 1968 में चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ। उनके पिता मद्रास विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफेसर थे। बचपन का काफी समय उन्होंने तमिलनाडु के गांवों में अपने दादा-दादी के साथ बिताया। वह मानते हैं कि गांव में बिताए बचपन ने उनके व्यक्तित्व और सोच को मजबूत बनाया। स्कूल के दिनों में कामकोटि क्रिकेट खेलते थे और टीम के ओपनिंग बल्लेबाज थे। सातवीं क्लास में एक मैच के दौरान गेंद उनके चश्मे पर लगने के बाद पिता ने उन्हें क्रिकेट से दूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने वायलिन सीखना शुरू किया, जो आज भी उनके जीवन का हिस्सा है। पढ़ाई में भी उन्होंने शानदार वापसी की। एक समय गणित में 25 अंक पाने वाले कामकोटि ने मेहनत के दम पर बाद में 100 में 100 अंक हासिल किए।
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IIT मद्रास से PhD
उन्होंने 1989 में श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर साइंस में BE किया। इसके बाद IIT मद्रास से 1992 में MS (Research) और 1995 में PhD पूरी की। उन्होंने IISc बेंगलुरु और इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमैटिकल साइंसेज, चेन्नई में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च भी की। प्रो. कामकोटि को भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI के विकास की रिसर्च टीम का नेतृत्व करने के लिए खास पहचान मिली। इस परियोजना का लक्ष्य भारत को चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाना था।
2022 से IIT मद्रास के निदेशक
जनवरी 2022 में उन्होंने IIT मद्रास के निदेशक का पद संभाला। उनके नेतृत्व में AI, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप, रिसर्च और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में कई पहल हुईं। साल 2026 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं और कई राष्ट्रीय तकनीकी समितियों में काम कर चुके हैं।
NTA सुधार में क्या करेंगे?
प्रो. कामकोटि का मानना है कि परीक्षा सिर्फ कंप्यूटर पर कराने से सिस्टम सुरक्षित नहीं बनता। अगर किसी छात्र को 90 अंक मिलते हैं, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसका स्कोर कैसे तैयार हुआ। उनके अनुसार, परीक्षा की हर प्रक्रिया ट्रैक करने योग्य और हर अधिकारी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उनका मानना है कि परीक्षा सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत छात्रों का भरोसा है। इसी भरोसे को मजबूत करने के लिए तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देना जरूरी है।
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