Sep 15, 2026 01:08 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का असर ऑटो सेक्टर पर भी दिख सकता है। इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत में बनी कारों को कम इंपोर्ट ड्यूटी पर अपने मार्केट में एंट्री देगा।

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भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का असर भारतीय ऑटो सेक्टर पर भी दिख सकता है। इस समझौते के तहत यूरोपियन यूनियन भारत में बनी पैसेंजर कारों को मौजूदा दर से काफी कम इंपोर्ट ड्यूटी पर अपने मार्केट में एंट्री देगा। शुरुआत में हर साल 2.5 लाख भारतीय कारों को सिर्फ 8 पर्सेंट ड्यूटी पर यूरोप भेजने की अनुमति होगी। यह संख्या धीरे-धीरे बढ़कर 10वें साल में 4 लाख कारों तक पहुंच जाएगी। खास बात यह है कि समझौते में सिर्फ पेट्रोल-डीजल कारों को ही नहीं, बल्कि हाइब्रिड और बाद के सालों में इलेक्ट्रिक कारों को भी ड्यूटी में राहत देने का प्रावधान है।
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₹ 53 लाख
₹ 12.52 - 23.52 लाख
2.5 लाख कारों पर सिर्फ 8% ड्यूटी
समझौते के ड्राफ्ट के अनुसार, भारत में बनी पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों को 50,000 यूरो तक की सीआईएफ कीमत पर यह छूट मिलेगी। पहले साल 2.5 लाख कारें 8 पर्सेंट इंपोर्ट ड्यूटी पर यूरोपीय मार्केट में जा सकेंगी। दूसरे साल यह ड्यूटी घटकर 6 पर्सेंट, तीसरे साल 4 पर्सेंट और चौथे साल 2 पर्सेंट रह जाएगी। पांचवें साल से इन कारों पर ड्यूटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। वहीं, कारों की संख्या भी हर साल बढ़ेगी और 10वें साल से हर साल 4 लाख कारों तक पहुंच जाएगी।
महंगी कारों का क्या होगा?
बता दें कि 50,000 यूरो से ज्यादा कीमत वाली आईसीई और हाइब्रिड पैसेंजर कारों के लिए पहले साल 8 पर्सेंट ड्यूटी रहेगी। हालांकि, इन कारों को कोटा बेस्ड छूट नहीं मिलेगी। इन पर भी ड्यूटी धीरे-धीरे कम होगी और समझौते के 10वें साल में पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यहां सीआईएफ कीमत का मतलब कार की कीमत के साथ उसे यूरोपीय संघ के बंदरगाह तक पहुंचाने का फ्रेट और इंश्योरेंस खर्च जोड़कर बनी कीमत है। यानी सिर्फ कार की एक्स-फैक्ट्री कीमत देखकर यह सीमा तय नहीं होगी।
इलेक्ट्रिक कारों के लिए अलग नियम
बैटरी इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड और आईसीई-हाइब्रिड के अलावा दूसरी तकनीक वाली पैसेंजर कारों के लिए अलग टैरिफ कोटा रखा गया है। बता दें कि 40,000 यूरो तक की कारों के लिए यह रियायत समझौते के पांचवें साल से शुरू होगी। उस साल 27,500 कारों को 8 पर्सेंट ड्यूटी पर यूरोप भेजने की अनुमति होगी। यह कोटा नौवें साल तक बढ़कर 60,500 और 14वें साल से 1.25 लाख कारों तक पहुंच जाएगा। इन कारों पर भी नौवें साल से इंपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
दूसरी ओर 40,000 से 60,000 यूरो तक की कारों के लिए पांचवें साल से 16,250 वाहनों का कोटा 8 पर्सेंट ड्यूटी पर मिलेगा। यह संख्या 14वें साल से बढ़कर 75,000 वाहन सालाना हो जाएगी और इसके बाद ड्यूटी शून्य हो जाएगी। वहीं, 60,000 यूरो से महंगी कारों के लिए भी पांचवें साल से 6,250 वाहनों का कोटा 8 पर्सेंट ड्यूटी पर मिलेगा। यह कोटा नौवें साल में 13,250 और 14वें साल से 25,000 वाहन हो जाएगा। इन कारों पर भी नौवें साल से ड्यूटी खत्म हो जाएगी। भारत-ईयू समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने और अगले साल से लागू होने की उम्मीद है।
