Insurance Tips: जरूरत से ज्यादा बीमा लेना अतिरिक्त सुरक्षा नहीं, बल्कि अनावश्यक प्रीमियम का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय-समय पर सभी पॉलिसियों की समीक्षा कर ओवरलैप, गैरजरूरी कवर और बदलती जरूरतों के अनुसार बीमा पोर्टफोलियो अपडेट करना चाहिए।

insurance tips in hindi

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  • Published: 04 Aug 2026, 09:30 PM IST
  • Last Updated: 04 Aug 2026, 09:30 PM IST

Insurance Tips: बीमा लेना आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन कई बार लोग जरूरत से ज्यादा बीमा खरीद लेते। समय के साथ लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और बैंक या एजेंट के जरिए खरीदी गई अलग-अलग पॉलिसियां जुड़ती जाती हैं। हर महीने या साल प्रीमियम कटता रहता है, लेकिन बहुत कम लोग यह जांचते हैं कि क्या उन्हें वास्तव में इन सभी पॉलिसियों की जरूरत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा बीमा लेने का मतलब सिर्फ अधिक सुरक्षा नहीं, बल्कि कई बार एक ही जोखिम के लिए बार-बार प्रीमियम चुकाना भी होता है।

सबसे पहले सभी पॉलिसियों की सूची बनाएं
अगर आप जानना चाहते हैं कि कहीं आप ओवरइंश्योर्ड तो नहीं हैं, तो सबसे पहले अपनी सभी बीमा पॉलिसियों की सूची तैयार करें। इसमें नियोक्ता , बैंक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एजेंट के जरिए खरीदी गई सभी पॉलिसियां शामिल करें। साथ ही हर पॉलिसी का सम इंश्योर्ड, प्रीमियम, अवधि, एक्सक्लूजन और वह किस जोखिम को कवर करती है, इसकी जानकारी भी नोट करें। कई बार दो या तीन पॉलिसियां लगभग एक जैसा कवर देती हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस में अक्सर होता है ओवरलैप
हेल्थ इंश्योरेंस ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा ओवरलैप देखने को मिलता। एक से अधिक हेल्थ पॉलिसी रखना गलत नहीं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि क्लेम कैसे काम करेगा। इंडेम्निटी आधारित हेल्थ इंश्योरेंस में अस्पताल का वास्तविक खर्च ही मिलता है। यानी कई पॉलिसियां होने का मतलब यह नहीं कि आपको इलाज की लागत से ज्यादा पैसा मिल जाएगा।

लाइफ इंश्योरेंस में कवर की जरूरत समझें
लाइफ इंश्योरेंस के मामले में केवल पॉलिसियों की संख्या नहीं, बल्कि कुल कवर अहम होता है। कई लोगों के पास छोटी-छोटी पारंपरिक पॉलिसियां होती हैं, लेकिन परिवार की जरूरत के हिसाब से उनका कुल कवर पर्याप्त नहीं होता। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो होम लोन चुकाने और बच्चों के आत्मनिर्भर हो जाने के बाद भी पहले जैसा प्रीमियम भरते रहते हैं, जबकि अब उन्हें उतने कवर की जरूरत नहीं होती।

राइडर और ऐड-ऑन सोच-समझकर लें
क्रिटिकल इलनेस, एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट या हॉस्पिटल कैश जैसे राइडर कई परिस्थितियों में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन हर उपलब्ध ऐड-ऑन खरीदने से प्रीमियम बढ़ जाता है, जबकि जरूरी नहीं कि आपकी वित्तीय सुरक्षा भी उसी अनुपात में बढ़े। इसलिए केवल वही राइडर लें, जिनकी वास्तव में जरूरत हो।

बीमा की समीक्षा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • सभी बीमा पॉलिसियों की सूची बनाकर तुलना करें।
  • एक ही जोखिम के लिए कई पॉलिसियां तो नहीं हैं, यह जांचें।
  • शादी, बच्चे या होम लोन जैसी जिम्मेदारियों के बाद कवर की समीक्षा करें।
  • पुरानी पॉलिसी बंद करने से पहले नई पॉलिसी की शर्तें और वेटिंग पीरियड जरूर देखें।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा का मकसद सबसे कम प्रीमियम देना नहीं, बल्कि सही जोखिम के लिए पर्याप्त सुरक्षा लेना है। कम लेकिन सही उद्देश्य वाली पॉलिसियां अक्सर ज्यादा प्रभावी होती हैं। इसलिए समय-समय पर अपने इंश्योरेंस पोर्टफोलियो की समीक्षा करना आर्थिक रूप से समझदारी भरा कदम माना जाता है।

(प्रियंका कुमारी)