छिंदवाड़ा में महंगे मोबाइल का बढ़ता क्रेज अब बच्चों और किशोरों में इस कदर बढ़ गया है कि वे इसके लिए घर के गहने तक दांव पर लगाने से नहीं हिचक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शहर में सामने आया, जहां दो नाबालिग दोस्तों ने iPhone 16 Pro खरीदने की चाहत में अपने-

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दोनों ने नकदी, अपना पुराना मोबाइल और घर से लाए आभूषण देकर iPhone 16 Pro खरीद लिया। जब परिजनों को घर में रखे गहने नहीं मिले तो उन्होंने बच्चों से पूछताछ की। पूछताछ में पूरी बात सामने आई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।

प्राइवेट बस स्टैंड की मोबाइल दुकान तक पहुंची पुलिस

मामले की जांच करते हुए कोतवाली पुलिस प्राइवेट बस स्टैंड स्थित ट्रस्टेड मोबाइल शॉप पहुंची। यहां दुकान संचालक आकाश साहू से पूछताछ की गई। पुलिस ने पूरी खरीदारी की जानकारी ली और यह जानने की कोशिश की कि मोबाइल किस तरह खरीदा गया था।

नकदी, पुराना मोबाइल और आभूषण देकर खरीदा iPhone

पूछताछ में दुकान संचालक ने पुलिस को बताया कि दोनों नाबालिग कुछ नकदी लेकर आए थे। उन्होंने अपना पुराना मोबाइल भी एक्सचेंज किया और साथ में सोने-चांदी के कुछ आभूषण दिए। इन्हीं के बदले उन्हें iPhone 16 Pro दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने दुकान में मौजूद आभूषण अपने कब्जे में ले लिए।

सत्यापन के बाद परिजनों को लौटाए गए गहने

पुलिस ने बरामद किए गए सोने-चांदी के आभूषणों का सत्यापन कराया। जांच में पुष्टि होने के बाद सभी आभूषण उनके वास्तविक मालिकों यानी बच्चों के परिजनों को वापस सौंप दिए गए। इससे परिवार ने राहत की सांस ली।मामला सामने आने के बाद कोतवाली पुलिस ने दोनों नाबालिगों की काउंसलिंग की। उन्हें समझाया गया कि महंगे मोबाइल पाने की चाह में इस तरह का कदम उठाना गलत है। पुलिस ने मोबाइल की लत, उसके दुष्परिणाम और ऐसे फैसलों से होने वाले नुकसान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी, ताकि भविष्य में वे ऐसी गलती दोबारा न करें।

अभिभावकों को भी दी गई समझाइश

पुलिस ने बच्चों के अभिभावकों से भी बातचीत की और उन्हें सलाह दी कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखें। बच्चों से खुलकर बात करें, उनकी जरूरतों और दोस्तों के बारे में जानकारी रखें और उन्हें महंगे मोबाइल की अनावश्यक होड़ से दूर रखें। समय-समय पर संवाद करने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

बढ़ता मोबाइल क्रेज बना चिंता का कारण

पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ समय से महंगे स्मार्टफोन का आकर्षण बच्चों और किशोरों में तेजी से बढ़ा है। कई बार इसी शौक के कारण बच्चे बिना परिणाम सोचे गलत फैसले ले लेते हैं। ऐसे मामलों में परिवार की सतर्कता, बच्चों के साथ बेहतर संवाद और समय पर सही मार्गदर्शन ही सबसे प्रभावी उपाय है।