Updated: Sunday, September 6, 2026, 15:11 [IST]
ISRO Privatization: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब तेजी से प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला जा रहा है। सरकार के इस कदम से जहां निजी कंपनियों को काम करने का मौका मिल रहा है, वहीं ISRO के कर्मचारियों के बीच अपनी नौकरी और संस्था के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने अब ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन को चिट्ठी लिखकर कई सवाल पूछे हैं।
कर्मचारियों ने जानना चाहा है कि आगे ISRO की क्या जिम्मेदारी रहेगी? क्या रॉकेट और सैटेलाइट बनाने का काम भी प्राइवेट कंपनियों को दे दिया जाएगा? और अगर ऐसा हुआ तो ISRO के कर्मचारियों और नई भर्तियों का क्या होगा?
क्या ISRO का काम प्राइवेट कंपनियों को दिया जाएगा?
ISRO के कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्राइवेट कंपनियों को ज्यादा काम मिलने के बाद ISRO खुद क्या करेगा। 9 कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन को चिट्ठी लिखी है। उनका कहना है कि सरकार प्राइवेट कंपनियों को अंतरिक्ष के काम में आगे बढ़ा रही है, लेकिन कर्मचारियों को यह साफ नहीं बताया गया है कि आगे ISRO की क्या भूमिका होगी। कर्मचारी इसी बात पर सरकार से साफ जवाब चाहते हैं।
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क्या PSLV और LVM3 भी प्राइवेट कंपनियां बनाएंगी?
कर्मचारियों की चिंता तब और बढ़ गई जब IN-SPACe के चेयरमैन पवन कुमार गोयनका ने कहा कि आगे ISRO खुद कोई रॉकेट नहीं बनाएगा। रॉकेट बनाने का काम सरकारी या प्राइवेट कंपनियां करेंगी। कर्मचारियों का कहना है कि SSLV को लेकर इसकी शुरुआत हो चुकी है। अब उन्हें डर है कि आगे चलकर PSLV और LVM3 जैसे बड़े रॉकेट बनाने का काम भी प्राइवेट कंपनियों को दिया जा सकता है।
सैटेलाइट बनाने का काम भी बाहर जाएगा?
कर्मचारी संगठनों ने सैटेलाइट बनाने के काम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ISRO में अभी जो सैटेलाइट बनाए जाते हैं, उनके काम को भी बाहर देने की बात चल रही है। इसके अलावा तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे नए लॉन्च सेंटर को भी प्राइवेट कंपनियों के इस्तेमाल के लिए खोला जा रहा है। ऐसे में कर्मचारी जानना चाहते हैं कि ISRO खुद कितने काम करेगा और कितने काम प्राइवेट कंपनियों को दिए जाएंगे।
कर्मचारियों की नौकरी और प्रमोशन का क्या होगा?
कर्मचारियों को सबसे ज्यादा चिंता अपनी नौकरी और आगे बढ़ने के मौकों को लेकर है। उनका कहना है कि अगर ISRO रॉकेट और सैटेलाइट बनाने का काम कम कर देता है तो कई कर्मचारियों के पास काम कम हो सकता है। कुछ कर्मचारियों को दूसरे काम में भेजा जा सकता है और कई पद भी कम हो सकते हैं। इसका असर प्रमोशन पर भी पड़ सकता है। साथ ही ISRO में आगे होने वाली भर्तियां कम होने की भी चिंता है।
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प्राइवेट कंपनियों के खिलाफ नहीं हैं कर्मचारी
कर्मचारी संगठनों ने साफ कहा है कि वे प्राइवेट कंपनियों के आने के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि प्राइवेट कंपनियों को काम देना ठीक है, लेकिन यह भी साफ होना चाहिए कि ISRO का अपना काम और ताकत कम नहीं होगी। कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार एक साफ नीति बताए। उन्होंने पूछा है कि आगे PSLV, LVM3 और SSLV जैसे रॉकेटों को बनाने, जांचने और लॉन्च करने का काम ISRO करेगा या प्राइवेट कंपनियों को दिया जाएगा।