Published: Friday, October 23, 2026, 10:56 [IST]
अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर टकराव को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल में कई जगहों पर भारतीय और चीनी सैनिकों का आमना-सामना हुआ है और ऐसी स्थिति अब भी बनी हुई है। उन्होंने इन हालात में ITBP की शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की तारीफ भी की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अरुणाचल में सीमा पर झड़पों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।
शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार इन टकरावों पर चुप हैं। उन्होंने चीन के साथ सीमा विवाद, पेट्रोलिंग पॉइंट, अरुणाचल में जगहों के नाम बदलने और चीन की बांध परियोजना को लेकर भी चिंता जताई। इस पूरे मामले में एक तरफ सीमा पर तैनात जवानों की भूमिका चर्चा में है, तो दूसरी तरफ चीन के साथ भारत की नीति पर सियासी बहस तेज हो गई है।
अरुणाचल में चीनी सैनिकों से अब भी आमना-सामना? ITBP DG ने क्या बताया
अलवर में गुरुवार (22 अक्तूबर) को ITBP कर्मियों के वार्षिक हिमवीर सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में हाल में बने हालात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीमा पर कई जगहों पर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आए और यह सिलसिला अभी भी जारी है। कपूर के मुताबिक, इन परिस्थितियों में ITBP की हाल ही में गठित शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतरीन काम किया है।
कपूर ने ITBP की भूमिका और उसके पुराने सैन्य अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस फोर्स को मूल रूप से माउंटेन गुरिल्ला फोर्स के तौर पर तैयार किया गया था। साल 2004 में इसे चीन से लगी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले इलाकों में काम करना ITBP की खास ताकत है और इस क्षमता को बनाए रखना जरूरी है।
ITBP प्रमुख ने यह भी बताया कि शौर्य कमांडो की एक पूरी बटालियन तैयार करने की योजना है। हालांकि, उनके बयान में टकराव की सटीक जगहों, घटनाओं की संख्या या किसी विशेष घटना के विस्तृत ब्योरे का उल्लेख नहीं किया गया।
जयराम रमेश ने मोदी सरकार को घेरा?
ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन को लेकर लगातार रियायतें दे रहे हैं, जबकि सीमा पर हो रहे टकरावों पर सरकार की ओर से चुप्पी है। रमेश ने शौर्य कमांडो के प्रदर्शन की तारीफ को जायज बताया, लेकिन सवाल किया कि प्रधानमंत्री और उनका प्रशासन इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से कुछ क्यों नहीं कह रहा।
जयराम रमेश ने पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग में हुए टकराव का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, इसके बाद वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। उन्होंने स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया कि लद्दाख की तरह अरुणाचल में भी भारतीय पेट्रोलिंग पॉइंट पर पहुंच को लेकर दिक्कतें सामने आई हैं। ये दावे कांग्रेस नेता ने किए हैं; ITBP प्रमुख के बयान में पेट्रोलिंग पॉइंट पर कब्जे या पहुंच को लेकर अलग से कोई पुष्टि नहीं की गई।
रमेश ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने और वहां 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बनाने की योजना का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए खतरा बताया। साथ ही, उन्होंने 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि भारतीय सीमा में न कोई घुसा है और न ही किसी भारतीय पोस्ट पर किसी दूसरे का कब्जा है। रमेश ने कहा कि भारत आज भी उस बयान की कीमत चुका रहा है। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है, जबकि सीमा की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी जरूरी है।
चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला कैसे करेगी ITBP?
शत्रुजीत कपूर ने सीमा पर बदलते युद्ध के तरीकों को देखते हुए ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और सैन्य तकनीक पर भारी निवेश किया है। ऐसे में सिर्फ पारंपरिक हथियारों के दम पर मुकाबला करना काफी नहीं होगा। ड्रोन युद्ध के मैदान में बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं और छोटे देश भी इनकी मदद से बड़े सैन्य प्रतिद्वंद्वी को चुनौती दे सकते हैं।
कपूर ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले चार साल में यूक्रेन ने रूस जैसी बड़ी सैन्य ताकत को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने ईरान का भी जिक्र किया और कहा कि ड्रोन ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है। ITBP हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट बनाने, अपने स्तर पर ड्रोन तैयार करने और ड्रोन पायलटों को ट्रेनिंग देने पर काम कर रही है। उन्होंने एक अलग स्ट्राइक कोर तैयार करने की योजना का भी जिक्र किया।
फोर्स के आधुनिकीकरण के लिए 2030 तक ज्यादा फंड मिलने की उम्मीद है। कपूर ने बताया कि ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये रखने की योजना है। इसके साथ ही ऑल-टेरेन व्हीकल, ऑटोनॉमस ग्राउंड व्हीकल और क्विक रिएक्शन व्हीकल जैसे वाहनों की खरीद पर ध्यान दिया जाएगा। हथियारों और गोला-बारूद को भी आधुनिक बनाने की तैयारी है।
LAC पर जमीन के नीचे बन रहे शेल्टर, क्या है इसकी वजह?
ड्रोन और आधुनिक हथियारों से बढ़ते खतरे के बीच ITBP सीमा पर तैनात जवानों और जरूरी संसाधनों की सुरक्षा के लिए भूमिगत शेल्टर भी बना रही है। कपूर के मुताबिक, कई फ्रंटियर यूनिट्स की सीमा चौकियों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसे शेल्टर तैयार किए गए हैं। अब इस तरह के ढांचे को बढ़ाने पर जोर है।
इसकी वजह भी साफ है। आधुनिक युद्ध में जमीन के ऊपर बनी इमारतें और सैन्य ठिकाने निशाना बन सकते हैं। भूमिगत शेल्टर जवानों को हमलों से बचाने में मदद कर सकते हैं। ITBP की योजना सीमा पर अपनी तैनाती, आवाजाही, हथियारों और सुरक्षा ढांचे को नए खतरों के हिसाब से मजबूत करने की है।
चीन से टकराव के बीच क्या समझना जरूरी है?
ITBP प्रमुख का बयान इसलिए अहम है क्योंकि यह अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर जारी टकराव की पहली आधिकारिक पुष्टि के तौर पर सामने आया है। जुलाई से सीमा पर आमना-सामना होने की खबरें आती रही हैं। सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी टकराव जारी रहने की रिपोर्टें सामने आई थीं। 6 सितंबर को वाचा-दमाई में दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत भी हुई थी। इसके बावजूद ITBP प्रमुख ने कहा कि कई जगहों पर स्थिति अब भी जारी है।
हालांकि, सैनिकों के आमने-सामने आने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि किसी इलाके पर कब्जा हो गया है या भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग रोक दी गई है। इन दावों की पुष्टि के लिए अलग आधिकारिक जानकारी जरूरी है। फिलहाल कपूर के बयान से सीमा पर तैनात ITBP की भूमिका, शौर्य कमांडो की तैयारी और आधुनिक युद्ध के लिए ड्रोन व भूमिगत सुरक्षा ढांचे पर बढ़ते फोकस की तस्वीर सामने आती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इसी बयान के आधार पर सरकार से चीन नीति पर जवाब मांगा है।