इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR File) करने की आज लास्ट डेट है, अगर आपने अब तक इसे नहीं भरा है, तो फिर फटाफट इस काम को निपटा लें. टैक्स विभाग की ओर से भी लगातार इसे लेकर अलर्ट (Income Tax ITR Alert) दिया जा रहा है और बताया जा रहा है कि 30 जुलाई तक 5.5 करोड़ लोग अपना आईटीआर फाइल कर चुके हैं.
अगर आप लास्ट डेट पर ITR भर रहे हैं, तो फिर जल्दबाजी न करें और इस काम को सावधानी से करें. क्योंकि आईटीआर भरने के दौरान की जाने वालीं कुछ कॉमन और सिंपल मिस्टेक भी बड़ा नुकसान कराने वाली साबित हो सकती हैं. इस प्रोसेस में सभी आय, कटौतियों, टैक्स क्रेडिट और खुलासों का सावधानीपूर्वक मिलाना जरूरी है.
पहली गलती: सिर्फ Form-16 के भरोसे न भरें
आईटीआर दाखिल करने के लिए फॉर्म 16 की जानकारी ही काफी नहीं है, बल्कि इससे भी अधिक जानकारी की जरूरत होती है. आमतौर पर कर्मचारी ITR फाइल करते समय Form16 पर निर्भर रहते हैं, जबकि इसमें सिर्फ सैलरी इनकम और TDS की ही जानकारी होती है. यह सेविंग अकाउंट ब्याज, एडफी ब्याज, डिविडेंड आदि की जानकारी नहीं देता है. ऐसे में फॉर्म 16 के अलावा, TIS, बैंक स्टेटमेंट, पूंजीगत लाभ स्टेटमेंट और निवेश रिकॉर्ड संबंधी डॉक्यूमेंट भी देखें.
सम्बंधित ख़बरें
दूसरी गलती: बोनस-बकाया की जानकारी
आप आईटीआर फाइलिंग में जल्दबाजी में कुछ जरूरी चीजों की सही जानकारी देना, बिल्कुल भी न भूलें. इनमें बोनस, बकाया वेतन, एडवांस सैलरी, जॉइनिंग बोनस, रिटेंशन बोनस, सेवरेंस-पे, वीआरएस मुआवजा या रिटायरमेंट लाभ शामिल हैं, इन प्राप्तियों पर लगने वाले टैक्स की सही जानकारी देनी चाहिए.
तीसरी गलती: टैक्स रिजीम का सही चयन
आईटीआर भरते समय टैक्स रिजीम का सही सेलेक्शन जरूरी है. टैक्सपेयर्स पुरानी और नई टैक्स रिजीम में तुलना किए बगैर ही टैक्स रिजीम का सेलेक्शन कर लेते हैं. नई टैक्स व्यवस्था में रियायती स्लैब दरें तो उपलब्ध हैं, लेकिन यह कई छूटों और कटौतियों की उपलब्धता को सीमित करती है, जो पुरानी व्यवस्था के तहत मिलती हैं. इनमें HRA छूट, LTA छूट, स्व-अधिग्रहित मकान संपत्ति पर ब्याज की कटौती, धारा 80C, 80D, 80CCD(1B) के तहत लाभ शामिल हैं. ऐसे में कर्मचारियों को तुलना के बाद भी नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन करना चाहिए.
चौथी गलती: इन संपत्तियों का खुलासा न करना
आयकर विवरण (ITR) में विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय का खुलासा करना अनिवार्य है. इसमें विदेशी बैंक खाते, विदेशी शेयर, विदेशी ईएसओपी, रिटायरमेंट अकाउंट्स, विदेशी संस्थाओं में वित्तीय हित या विदेशी खातों में हस्ताक्षर करने का अधिकार शामिल हो सकता है. विदेशी संपत्तियों और आय का खुलासा न करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है. काला धन अधिनियम (Black Money Act, 2015) की धारा 42 और 43 के तहत भारी भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है.
पांचवीं गलती: ITR वेरिफिकेशन में लेट-लतीफी
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना ही फाइनल नहीं है, बल्कि इसका समय से वेरिफिकेशन भी कराना जरूरी होता है. तय समय सीमा के भीतर आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग, डीमैट खाते या बैंक खाते के वेरिफिकेशन के माध्यम से या लागू होने पर आईटीआर-V भेजकर भी किया जाना चाहिए. अगर रिटर्न का सत्यापन समय पर नहीं होता है, तो उसे अमान्य माना जा सकता है.
---- समाप्त ----