हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि तीन पशु चिकित्सकों और थाना प्रभारी ने फार्म हाउस का निरीक्षण किया। निरीक्षण में वहां डेयरी का संचालन होना पाया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी अनुपस्थिति में फार्म हाउस का निरीक्षण किए जाने पर आपत्ति जताई गई। उन्होंने न्यायालय को बताया कि फार्म हाउस के निरीक्षण के संबंध में उन्होंने पनागर थाना प्रभारी से संपर्क किया था। थाना प्रभारी ने बताया था कि उन्हें महाधिवक्ता कार्यालय से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके बावजूद उनकी अनुपस्थिति में फार्म हाउस का निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई।
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फिलीपींस सरकार ने केंद्र सरकार से शिकायत की थी
जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि हैदराबाद निवासी सुरेश पाल गुडू हॉर्स पावर लीग के सूत्रधार हैं। उन्होंने हैदराबाद रेस क्लब में दो घोड़ों की रेस आयोजित कर ट्रोपंग करेठस्ता नामक एप के माध्यम से फिलीपींस में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग कर सट्टा लगवाया। इस संबंध में फिलीपींस सरकार ने केंद्र सरकार से शिकायत की थी, जिसके बाद इस गतिविधि को बंद कर दिया गया।
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सुरेश पाल गुडू के पास 150 से अधिक घोड़े थे
याचिका के अनुसार, सुरेश पाल गुडू के पास 150 से अधिक घोड़े थे। उन्होंने लगभग चार माह पहले कर्मचारियों का वेतन देना बंद कर दिया था। भोजन और देखभाल के अभाव में करीब 90 घोड़ों की मौत हो गई। आरोप है कि साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से 29 अप्रैल से 3 मई 2025 के बीच 57 घोड़ों को प्रशासन और पशु विभाग को सूचना दिए बिना जबलपुर लाकर पनागर के रैपुरा स्थित सचिन तिवारी के फार्म हाउस में रखा गया। वहां उचित देखभाल, भोजन और उपचार नहीं मिलने के कारण घोड़ों की लगातार मौत हो रही है।
पूर्व में केयरटेकर सचिन तिवारी ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत हलफनामे में बताया था कि हैदराबाद से लाए गए 57 घोड़ों में से 19 की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 22 घोड़े बेच दिए गए हैं और तीन नए घोड़े खरीदे गए हैं। वर्तमान में उसके पास 19 घोड़े हैं, जिनकी खुराक और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उसने दावा किया कि सभी घोड़े स्वस्थ हैं और उनकी देखरेख में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
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याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को जिला पशु चिकित्सा अधिकारी और थाना प्रभारी के साथ फार्म हाउस का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। वहीं, केयरटेकर की ओर से यह भी बताया गया था कि उसने सभी घोड़े बेच दिए हैं।
याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केयरटेकर को निर्देश दिया कि वह यह जानकारी प्रस्तुत करे कि घोड़े किसे और कब बेचे गए। इस संबंध में संपूर्ण विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसल्वा तथा अधिवक्ता सुमेश अवस्थी उपस्थित हुए।