Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी में आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है. झमाझम बारिश के बावजूद देश-विदेश से 25 लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं.
Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी में आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है. झमाझम बारिश के बावजूद देश-विदेश से 25 लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं.
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Jagannath Rath Yatra Photograph: (Puri Police/X Account)
Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा की पावन धरती पुरी में आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की सालाना रथ यात्रा की भव्य शुरुआत हो गई है. पूरे देश और दुनिया से आए लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पुरी की सड़कें 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गूंज उठी हैं. इस बार रथ यात्रा पर वरुण देव भी मेहरबान दिख रहे हैं. मंगलवार रात से शुरू हुई झमाझम बारिश का सिलसिला आज भी जारी रहा, जिससे पुरी की मुख्य सड़क बड़दांड के कई हिस्सों में पानी भर गया. इसके बावजूद महाप्रभु के दर्शन की ललक और भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ. भारी बारिश के बीच भी लोग भगवान की एक झलक पाने और उनके रथ की रस्सी छूने के लिए बेताब दिखे. सुरक्षा बल और प्रशासन पूरी मुस्तैदी से भीड़ को संभालने में जुटे हैं.
पहांडी रस्म के साथ मंदिर से बाहर आए भगवान
रथ यात्रा की शुरुआत बेहद खास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई. सुबह से ही जगन्नाथ मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम तेज हो गया था. सबसे पहले तीनों रथों की विधिवत प्रतिष्ठा संपन्न की गई. इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण 'पहांडी' रस्म की शुरुआत हुई. इस रस्म के तहत भगवान बलभद्र को पूरे आदर और भव्यता के साथ जगन्नाथ मंदिर से औपचारिक रूप से बाहर लाया गया. उन्हें देखने के लिए सिंहद्वार पर भक्तों की भारी भीड़ जमा थी. भगवान बलभद्र के बाद देवी सुभद्रा और फिर स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ को उनके रथों तक लाया गया. भगवान का रथ पर सवार होकर दर्शन देना एक ऐसा अद्भुत नजारा था जिसे देखकर हर आंख सजल हो गई.
Jay Jagannath 🙏 pic.twitter.com/HciqJtbpfR
— Puri Police (@SPPuri1) July 16, 2026
सिंहद्वार पर सजे तीन भव्य रथ
भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए तीन विशाल रथों को पुरी जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर खड़ा किया गया है. इन रथों की सुरक्षा और धार्मिक महत्व को देखते हुए विशेष पूजा की गई. नंदीघोष रथ पर श्रीहनुमान, तालध्वज रथ पर श्रीनृसिंह और देवदलन रथ पर मां भुवनेश्वरी की स्थापना की गई है. वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-यज्ञ के बाद इन ध्वज देवताओं को रथों पर स्थापित किया गया. मान्यता है कि यह ध्वज देवता पूरी यात्रा के दौरान महाप्रभु के रथों की रक्षा करते हैं. धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद भगवान अपने भाई और बहन के साथ अलग-अलग रथों पर सवार हुए, जिन्हें भक्त मोटे रस्सों की मदद से खींचकर गुंडिचा मंदिर यानी उनकी मौसी के घर ले जाएंगे.
संस्कृति का रंग और दिग्गजों की मौजूदगी
इस बार रथ यात्रा में शामिल होने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ अपनी मां के साथ पुरी पहुंचे हैं. उन्होंने व्यवस्थाओं की तारीफ करते हुए कहा कि सड़कों और बाजारों में करीब 25 लाख से ज्यादा भक्त जुटे हैं. उन्होंने देश की सुख-समृद्धि और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को पूरा करने की प्रार्थना की. वहीं, सांसद संबित पात्रा ने कहा कि पुरी भगवान जगन्नाथ की वह पवित्र भूमि है जहां राजाओं के राजा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए सिंहासन छोड़कर नीचे उतरते हैं. इस पावन मौके पर मशहूर गायक सोनू निगम भी पहली बार महाप्रभु के साक्षात दर्शन करने पुरी पहुंचे. उन्होंने कहा कि यहां का नजारा और मैनेजमेंट बेहद शानदार है और यह अनुभव उनके साथ जिंदगी भर रहेगा. यात्रा के दौरान ओडिशी नृत्यांगनाओं ने भगवान के सामने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया, जो ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है.
भक्तों ने दिखाई मानवता, एम्बुलेंस को दिया रास्ता
भारी भीड़ और उमस के कारण सिंहद्वार पर कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आईं. भीड़ के दबाव की वजह से कुछ लोगों को स्ट्रेचर पर बाहर निकालना पड़ा. इसी दौरान एक भक्त अचानक बेहोश हो गया. वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने भारी बारिश के बीच तुरंत तत्परता दिखाई और इंसानी दीवार बनाकर एम्बुलेंस के लिए रास्ता साफ किया. लोगों की इस सूझबूझ से मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका. प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे के साथ समाप्त होने वाले इस नौ दिवसीय उत्सव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके.
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