Jamshedpur : दक्षिण पूर्व रेलवे ने बुरामारा-चाकुलिया नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना के लिए वन भूमि की जरूरत का विस्तृत कारण बताया है. रेलवे का कहना है कि यह परियोजना केवल नई रेल लाइन बनाने के लिए नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के बढ़ते रेल यातायात का दबाव कम करने और बंदरगाहों से माल ढुलाई को आसान बनाने के लिए बेहद जरूरी है.


करीब 60 किलोमीटर लंबी बनेगी नई रेल लाइन

रेलवे बोर्ड ने बुरामारा से चाकुलिया तक 59.96 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन को मंजूरी दी है. इसमें झारखंड का हिस्सा करीब 39.70 किलोमीटर होगा. इस परियोजना पर लगभग 971.69 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.


मौजूदा रेल मार्ग पर कम होगा दबाव

रेलवे के अनुसार अभी भद्रक से टाटानगर जाने वाली ट्रेनों को खड़गपुर और निमपुरा होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. नई रेल लाइन बनने के बाद यह दूरी करीब 30 किलोमीटर कम हो जाएगी. इससे समय की बचत होगी और व्यस्त रेल मार्ग पर ट्रेनों का दबाव भी कम होगा.


बंदरगाहों से माल ढुलाई होगी आसान

रेलवे ने बताया कि धामरा पोर्ट के शुरू होने के बाद इस रूट पर मालगाड़ियों की संख्या काफी बढ़ी है. आने वाले समय में सुबर्णरेखा पोर्ट और दूसरे औद्योगिक प्रोजेक्ट शुरू होने पर यातायात और बढ़ेगा. नई रेल लाइन बनने से इस अतिरिक्त ट्रैफिक को संभालने में मदद मिलेगी.


स्टील उद्योगों को मिलेगा फायदा

रेलवे का कहना है कि इस लाइन से टाटा स्टील, सेल बोकारो, सेल राउरकेला जैसे बड़े स्टील प्लांट और धामरा, पारादीप व सुबर्णरेखा जैसे के बीच माल ढुलाई तेज और आसान होगी. इससे उद्योगों की लागत भी कम हो सकती है.


पर्यटन और स्थानीय लोगों को भी मिलेगा लाभ

नई रेल लाइन बनने से ओडिशा के बारिपदा शहर को उत्तर और मध्य भारत से बेहतर रेल संपर्क मिलेगा. इसके साथ ही सिमलीपाल टाइगर रिजर्व, बरेहीपानी जलप्रपात, जरांडा फॉल्स, किचकेश्वर मंदिर और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी. रेलवे का कहना है कि आदिवासी बहुल इलाकों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए भी बेहतर रेल सुविधा मिलेगी.


करीब 100 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत

इस परियोजना के लिए झारखंड में 99.9167 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग प्रस्तावित है. रेलवे ने कहा है कि रेल लाइन का रूट इस तरह तय किया गया है कि जंगल की कम से कम जमीन प्रभावित हो. जहां तक संभव था, वन क्षेत्र से बचने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ हिस्सों में वन भूमि का उपयोग करना जरूरी है.


जमशेदपुर वन प्रमंडल की सबसे ज्यादा जमीन प्रभावित

दस्तावेज के अनुसार परियोजना के लिए जमशेदपुर वन प्रमंडल की 61.3496 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि और 38.5671 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि प्रस्तावित है. रेलवे का कहना है कि सभी जरूरी पर्यावरण और वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की जा रही है.

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