JPSC-JSSC Exam Protest: प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के आरोपों को लेकर 16 दिन से छात्र आंदोलनरत हैं। सरकार और छात्र संगठनों के बीच शनिवार की वार्ता भी बेनतीजा रही।
छात्रों के समर्थन में MLA जयराम महतो अनशन पर बैठे
- Published: 09 Aug 2026, 10:29 AM IST
- Last Updated: 09 Aug 2026, 10:29 AM IST
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र पिछले 16 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद आंदोलन और तेज होता नजर आ रहा है।
इसी क्रम में डुमरी विधायक और JLKM नेता जयराम महतो ने छात्रों के समर्थन में विधानसभा परिसर के बाहर एकदिवसीय निर्जला अनशन शुरू किया है। उन्होंने साफ किया कि अनशन के दौरान वह पानी भी नहीं पिएंगे।
‘सभी वर्ग छात्र आंदोलन के साथ खड़े हों’
जयराम महतो ने विभिन्न वर्गों के लोगों से छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और अभ्यर्थी निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सीटों को बेचने, घर पर उत्तर पुस्तिका लिखने और OMR शीट में कथित गड़बड़ी जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
जयराम महतो ने मजदूर, वकील, व्यापारी और किसान समेत अलग-अलग वर्गों से जुड़े संगठनों से अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय के लिए छात्रों के समर्थन में कार्यक्रम या अनशन करें।
देवेंद्र नाथ महतो भी कई दिनों से अनशन पर
JLKM के एक अन्य नेता देवेंद्र नाथ महतो भी पिछले कई दिनों से अनशन कर रहे हैं। छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलनकारी संगठन सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
शनिवार को हेमंत सोरेन सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय मंत्री स्तरीय समिति और आंदोलनकारी छात्र संगठनों के बीच बातचीत भी हुई। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
छात्रों के आंदोलन और नेताओं के अनशन के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर झारखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें सरकार की अगली पहल और आंदोलनकारी संगठनों के साथ होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।