Time Updated: Friday, August 21, 2026, 16:14 [IST]

JSSC-CGL, CDPO Exam Cancel: झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच JSSC CGL और CDPO समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनका चयन इन परीक्षाओं के जरिए हुआ था और जो सरकार के रद्दीकरण के फैसले से अपनी नौकरी गंवाने की स्थिति में पहुंच गए थे।

हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल संबंधित चयन और नियुक्तियों पर सरकार के रद्दीकरण फैसले का असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

JSSC-CGL CDPO Examination Cancelling

दरअसल, झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे चले छात्र प्रदर्शन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC CGL समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ा, जो परीक्षा पास करने के बाद चयनित हो चुके थे। कई सरकारी विभागों में नियुक्त होकर नौकरी कर रहे थे। सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अगर, परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा, परिणाम और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करना उचित नहीं है।

JSSC CGL में 1,932 उम्मीदवार हुए थे चयनित

JSSC CGL परीक्षा के परिणाम के बाद कुल 1,932 उम्मीदवारों का चयन हुआ था। इनमें से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सरकारी विभागों में नियुक्ति भी मिल चुकी थी। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट के आधार पर सफल हुए और नियुक्ति हासिल की। ऐसे में यदि परीक्षा में किसी तरह की अनियमितता हुई भी है, तो उसमें शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि जिन उम्मीदवारों की गड़बड़ी में कोई भूमिका नहीं है, उन्हें सामूहिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता।

नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों ने किया था प्रदर्शन

सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद पहले से नियुक्त कई कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया था। ये कर्मचारी 18 अगस्त से JSSC CGL रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। 20 अगस्त को भी इन कर्मचारियों ने प्रोजेक्ट भवन के सामने धरना दिया। शाम को प्रदर्शनकारियों ने मोरहाबादी से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि वे चयन प्रक्रिया में सफल होने के बाद नियुक्त हुए थे और लंबे समय से अपने पद पर काम कर रहे थे। अचानक परीक्षा रद्द किए जाने से उनकी नौकरी और भविष्य दोनों पर संकट खड़ा हो गया।

17 अगस्त तक नौकरी, 18 अगस्त को बदल गया पूरा मामला

सरकार के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि वे सोमवार (17 अगस्त 2026) तक नियमित रूप से अपने कार्यालयों में काम कर रहे थे, लेकिन अगले ही दिन परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उनकी नियुक्तियां ही सवालों के घेरे में आ गईं। इस घटनाक्रम के बाद सचिवालय समेत राज्य के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे चयनित अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारियों का तर्क था कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो उसकी सजा उन अभ्यर्थियों को नहीं मिलनी चाहिए, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की है।

सरकार ने क्यों रद्द की थीं परीक्षाएं?

राज्य सरकार की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों को आधार बनाकर कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया था। बताया गया कि TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले के बाद उन उम्मीदवारों का विरोध तेज हो गया, जो इन परीक्षाओं में सफल होकर नियुक्तियां पा चुके थे। विरोध के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की गई थी। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों और कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया।

JPSC की नियुक्तियों पर भी अदालत ने लगाई रोक

20 अगस्त को हाई कोर्ट ने सिर्फ JSSC से जुड़े मामले में ही राहत नहीं दी, बल्कि JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और खाद्य सुरक्षा अधिकारी से संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर भी रोक लगा दी। अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए संबंधित कर्मचारियों को फिलहाल अपने पद पर काम जारी रखने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि जब तक अदालत इस मामले में आगे कोई आदेश नहीं देती, तब तक संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला प्रभावी नहीं होगा।

अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

झारखंड हाई कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। उस सुनवाई में सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने और नियुक्तियां समाप्त करने के फैसले के आधार बताए जाएंगे। फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश चयनित उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, यह अंतरिम राहत है और अंतिम तौर पर यह तय होना बाकी है कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच चयन और नियुक्तियों को बरकरार रखा जाएगा या नहीं।