झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के विरोध में सफल अभ्यर्थियों ने बुधवार को रांची स्थित राज्य सचिवालय परिसर में घुसकर जोरदार प्रदर्शन किया। चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने अपनी योग्यता से परीक्षा पास की थी, ऐसे में सरकार का यह निर्णय उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

jharkhand jssc exam cancellation protest

बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी विरोध-प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे राज्य सचिवालय परिसर में दाखिल हो गए।

  • Published: 19 Aug 2026, 05:33 PM IST
  • Last Updated: 19 Aug 2026, 05:33 PM IST

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित धांधली को लेकर लंबे समय से युवाओं का आक्रोश देखने को मिल रहा था। करीब 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष कैबिनेट बैठक में आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) की संलिप्तता वाली परीक्षाओं पर बड़ा निर्णय लिया।

सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और वर्ष 2014 से अब तक आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए अधिसूचना जारी कर दी। हालांकि, सरकार के इस कड़े कदम के बाद उन हजारों अभ्यर्थियों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है, जो इन परीक्षाओं में सफल होकर विभिन्न विभागों में सेवा दे रहे थे।

सचिवालय परिसर में घुसे चयनित अभ्यर्थी, आदेश वापसी की मांग पर अड़े
कैबिनेट के फैसले के बाद मंगलवार देर रात अधिसूचना जारी होते ही चयनित अभ्यर्थी आक्रोशित हो गए। बुधवार को बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी विरोध-प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे राज्य सचिवालय परिसर में दाखिल हो गए। सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) के पद पर तैनात चंदन कुमार और श्याम सुंदर मंडल जैसे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कई दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे।

अभ्यर्थियों ने साफ किया कि उन्होंने कड़ी मेहनत और मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की है, किसी भी एजेंसी की अनियमितता की सजा चयनित युवाओं को नहीं दी जा सकती।

सचिवालय में बीएनएस धारा 163 लागू, पुलिस ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
अभ्यर्थियों के अचानक सचिवालय में प्रवेश करने से प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। हटिया के डीएसपी नीरज कुमार ने लाउडस्पीकर से प्रदर्शनकारियों से परिसर खाली करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, इसलिए परिसर के भीतर किसी भी प्रकार का घेराव या आंदोलन गैरकानूनी है।

नियमों का उल्लंघन करने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई। वहीं, कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भरोसा दिलाया कि सरकार सफल अभ्यर्थियों की चिंताओं को समझती है और जल्द ही इसका सकारात्मक समाधान निकाला जाएगा।

संस्थानों में विश्वास बहाली के लिए लिया गया कड़ा फैसला: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की
झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कैबिनेट के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में घंटों चली गहन बैठक के बाद यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

उन्होंने बताया कि परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के कारण युवाओं के विश्वास को बहाल करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। सरकार पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भविष्य में किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो।