मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज कटनी में बन रही देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग का निरीक्षण करेंगे। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना पूरी होने पर जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।

Narmada Project

देश की सबसे लंबी जल सुरंग का आज निरीक्षण करेंगे CM मोहन यादव

  • Published: 17 Jul 2026, 10:49 AM IST
  • Last Updated: 17 Jul 2026, 10:49 AM IST

कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग (स्लीमनाबाद टनल) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण करेंगे। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पूरी होने के बाद विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के छह जिलों के करीब 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराएगी।

निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है
कटनी जिले में बन रही स्लीमनाबाद जल सुरंग की कुल लंबाई 11.952 किलोमीटर है। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब केवल अंतिम एक मीटर का काम शेष है। इसके बाद देश की सबसे लंबी जल सुरंग का निर्माण पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री परियोजना की प्रगति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को स्थल का दौरा करेंगे।

ऊर्जा की बचत और सिंचाई व्यवस्था अधिक किफायती
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नर्मदा नदी का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के जरिए सोन नदी बेसिन तक पहुंचाया जाएगा। इससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में बिजली या बड़े पंपों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे ऊर्जा की बचत होगी और सिंचाई व्यवस्था अधिक किफायती बनेगी।
परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इन जिलों के लगभग 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में
स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में लगभग 799 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हुई थी। हालांकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, पानी के रिसाव को रोकने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के कारण अब इसकी लागत बढ़कर 1,610.47 करोड़ रुपये हो गई है। परियोजना के तहत 11.95 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग और 12.13 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अब तक कुल 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है।

सरकार के अनुसार मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा शुरू हो चुकी है। अगले चरण में दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाओं में से एक माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।