Time Published: Monday, July 13, 2026, 14:00 [IST]

Lindsey Graham Death: डोनाल्ड ट्रम्प के बेहद करीबी माने जाने वाले और रिपब्लिकन पार्टी के सीनियर सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) का 71 साल की उम्र में एक छोटी बीमारी के बाद निधन हो गया है। साउथ कैरोलिना से आने वाले ग्राहम अमेरिकी राजनीति के सबसे मुखर और बेबाक नेताओं में से एक थे। उनके निधन की खबर को उनके आधिकारिक ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए कन्फर्म किया है। लिंडसे ग्राहम सिर्फ भाषण नहीं, तीखे तेवर भीनेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी पर अपने बयानों के लिए जाने जाते थे। हालांकि भारत में उन्हें टैरिफ लगाने वाले शख्स के तौर पर जाना गया।

इजरायल के प्लान पर कर रहे थे काम

अपने लंबे राजनीतिक सफर में ग्राहम केवल एक सांसद के तौर पर नहीं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी पर अपने बेबाक और कड़े बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में बने रहे। उनके बयानों पर अक्सर पूरी दुनिया में बड़ी बहस छिड़ जाती थी। जब उनके मौत हुई तब वे इजरायल और अमेरिका के बीच किसी डील पर प्लान कर रहे थे। यहां तक कि ईरान युद्ध में भी उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। यही कारण है कि उनकी मौत पर ईरान में जश्न मनाया जा रहा है। यहां तक कि ईरानी मीडिया ने 13 वर्ल्ड लीडर्स के फोटो वाली एक लिस्ट जारी की है जिसमें लिंडसे ग्राहम की फोटो पर क्रॉस का निशान लगाया हुआ है। इसीलिए कुछ लोग उनकी हत्या होने की संभावनाओं पर भी बात कर रहे हैं।

Lindsey Graham Death

ग्राहम अपनी पॉलिसी के अलावा अपने विवादित बयानों के लिए भी जाने जाते थे। आइए जानते हैं उनके ऐसा पांच बयान जिन्होंने भारत समेत पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरीं:

1. रशियन ऑयल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की मांग

भारत को भी लपेटे में लेने वाला वह 500% टैरिफ का विवादित बयानलिंडसे ग्राहम का सबसे विवादित स्टैंड रूस से कच्चा तेल (Russian Oil) खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ (customs duties) लगाने का था। कुछ समय पहले ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति का सपोर्ट करते हुए मांग की थी कि रूस से एनर्जी और तेल इंपोर्ट करने वाले देशों पर 500% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगा देना चाहिए।ग्राहम का मानना था कि ऐसा करने से रूस की कमाई पूरी तरह रुक जाएगी और यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में उसकी ताकत कमजोर पड़ जाएगी। यह बयान इसलिए बेहद कंट्रोवर्शियल था क्योंकि इसमें भारत का नाम भी शामिल था, जो उस समय रूस से डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों में से एक रहा है।

2. ईरान के सुप्रीम लीडर पर सीधा और तीखा हमला

टीवी इंटरव्यू में अयातुल्ला अली खामेनेई को बताया था ग्लोबल थ्रेटटैरिफ के मुद्दे के अलावा, ग्राहम ईरान की लीडरशिप के खिलाफ सबसे बड़ी और तीखी आवाज उठाने के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने एक बड़े टीवी इंटरव्यू के दौरान ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर सीधा हमला बोला था। ग्राहम ने खामेनेई को क्षेत्रीय स्थिरता (regional stability) और दुनिया की शांति के लिए एक बेहद गंभीर और बड़ा खतरा बताया था।

3. ग्रीनलैंड पर दिए गए कमेंट से छिड़ा बड़ा राजनीतिक विवाद

म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कही थी डिप्लोमेसी से हटकर एक बेबाक बातईरान और रूस के अलावा, ग्रीनलैंड (Greenland) को लेकर दिए गए उनके एक बयान पर भी भारी बवाल मचा था। म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (Munich Security Conference) के दौरान जब यूरोपीय नेताओं ने इस आर्कटिक द्वीप के मालिकाना हक को लेकर चिंता जताई, तो ग्राहम ने सीधे शब्दों में कह दिया कि वे इस क्षेत्र के मालिकाना हक से ज्यादा वहां के स्ट्रेटेजिक आउटकम्स (रणनीतिक नतीजों) में दिलचस्पी रखते हैं। उनकी इस बेहद सीधी और दो-टूक भाषा की काफी आलोचना हुई थी। सोशल मीडिया पर यह बयान तेजी से वायरल हो गया और कई एक्सपर्ट्स ने इसे पूरी तरह से undiplomatic करार दिया था।

4. पाकिस्तान की बिचौलिए की भूमिका पर खड़े किए बड़े सवाल

इजरायल-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान के स्टैंड को घेरा, आरोपों का हुआ खंडन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव में पाकिस्तान की भूमिका और उसके इन्वॉल्वमेंट पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान का जो पुराना और कड़ा स्टैंड रहा है, उसे देखते हुए उसे एक न्यूट्रल पोजीशन पर रख पाना बेहद मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय मध्यस्थता (regional mediation) के नाम पर कुछ और खेल कर सकता है। हालांकि, पाकिस्तान ने ग्राहम के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और उन दावों को पूरी तरह नकारा था जिसमें कहा गया था कि उसने ईरानी मिलिट्री एसेट्स को किसी भी तरह का सपोर्ट दिया है।

5. फॉरेन पॉलिसी के मोर्चे पर एक बेहद मुखर और मजबूत आवाज

अमेरिकी दुश्मनों के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की वकालत करने वाले नेता लिंडसे ग्राहम का पूरा पॉलिटिकल करियर इंटरनेशनल अफेयर्स पर सबसे मजबूत और आक्रामक आवाजों में से एक के रूप में याद किया जाएगा। वे हमेशा उन देशों के खिलाफ सबसे सख्त प्रतिबंधों (stronger sanctions) की वकालत करते थे जिन्हें अमेरिका का विरोधी या दुश्मन माना जाता था। उन्होंने रूस, ईरान, चीन और अन्य विरोधी देशों के खिलाफ हमेशा सख्त से सख्त आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाने की बात पुरजोर तरीके से उठाई।

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