Sep 11, 2026 05:39 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • LPG Supply Updates: एक आम आदमी को रसोई गैस की चिंता सताने लगी है कि कहीं सिलेंडर की किल्लत न शुरू हो जाए
  • पिछली बार जंग शुरू होने के बाद एलपीजी सिलेंडर के लिए गैस गोदामों और एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिखने लगी थीं
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जंग शुरू होने के बाद मार्च में गैस एजेंसियों के बाहर ऐसी ही कतारें लगती थीं।

ईरान और अमेरिका के बीच जंग का मैदान अब होर्मुज स्ट्रेट हो गया है। इस वजह से वहां से तेल और गैस से लदे जहाज निकल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में एक आम आदमी को रसोई गैस की चिंता सताने लगी है कि कहीं सिलेंडर की किल्लत न शुरू हो जाए। पिछली बार जंग शुरू होने के बाद शहर से लेकर गांव-गांव तक एलपीजी सिलेंडर के लिए गैस गोदामों और एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिखने लगी थीं।

बता दें अब आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जंग से पहले भारत के LPG आयात का 90% इसी रास्ते से होता था, लेकिन अब यह सिर्फ एक छोटा हिस्सा रह गया है। वहीं, अब अमेरिका के अलावा कई देशों से एलपीजी आ रही है। होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता घटी है।

रोजाना 37,000-38,000 मीट्रिक टन LPG बना रहा है भारत

भारत अभी रोजाना 37,000-38,000 मीट्रिक टन LPG बना रहा है। अब देश के रिफाइनरियों का लक्ष्य इसमें करीब 4,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन यानी 10% से ज्यादा का इजाफा करना है। द इकनॉमिक टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक, "फिलहाल स्टॉक ठीक है। होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई आ रही है, लेकिन यह रास्ता अब भरोसेमंद नहीं रहा। अगर एक हफ्ते के लिए भी यह रास्ता बंद हो जाए, तो फिर मुश्किल खड़ी हो सकती है।"

आयात में कमी की भरपाई ज्यादातर घरेलू उत्पादन से

आयात में कमी की भरपाई ज्यादातर घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और खपत घटाकर की गई। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में घरेलू LPG खपत सालाना आधार पर 17% कम रही। घरों, कमर्शियल यूजर और उद्योग, सभी प्रभावित हुए। उद्योगों की थोक LPG खपत सबसे ज्यादा घटी, जो जुलाई में करीब 80% गिर गई।

अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के जहाजों पर हमले तेज किए

पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे होर्मुज से आवागमन सामान्य होने की उम्मीदें कम हो गई हैं। यह जलमार्ग बेहद अहम है।

जंग शुरू होने (28 फरवरी) से पहले दुनिया की करीब 20 फीसद कच्चे तेल और गैस की सप्लाई इसी से गुजरती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को संकेत दिया कि नवंबर में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

खपत और आयात में गिरावट

ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारत का LPG आयात और खपत, दोनों काफी घट गए हैं। अगस्त में आयात 25% गिरकर 14.5 लाख टन रह गया, हालांकि यह इस दौर का सबसे अधिक मासिक आंकड़ा है।

Vortexa के वरिष्ठ तेल बाजार विश्लेषक रोहित राठौड़ ने कहा, "दुनिया में LPG की पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध नहीं है। अगस्त में वैश्विक समुद्री LPG निर्यात फरवरी 2026 के स्तर से करीब 6 लाख मीट्रिक टन और पिछले साल से करीब 12.5 लाख मीट्रिक टन कम रहा।"

कुछ उद्योग अधिकारियों का मानना है कि इस कमी की एक वजह पाइप्ड नेचुरल गैस, डीजल या लकड़ी की ओर रुख करना है, जबकि कुछ अनौपचारिक सप्लाई कटौती और मांग नष्ट होने की बात कहते हैं।

उत्पादन का उतार-चढ़ाव

भारत ने जंग से पहले के करीब 36,000 टन प्रतिदिन से मई में उत्पादन बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन के शिखर तक पहुंचाया था। इसके लिए पेट्रोकेमिकल्स जैसे दूसरे उत्पादों को दिए जाने वाले इनपुट में कटौती की गई।

लेकिन, जब प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों की कमी दिखने लगी, तो LPG उत्पादन घटा दिया गया। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज से माल ढुलाई आसान होने पर जुलाई में उत्पादन महीने-दर-महीने 19% गिरकर 12 लाख टन रह गया। जून में औसत उत्पादन करीब 50,000 टन प्रतिदिन था।

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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