Time Updated: Sunday, July 12, 2026, 23:09 [IST]

Lucknow Cyber Crime News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार (12 जुलाई) को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े 'म्यूल' का पर्दाफाश हुआ। लखनऊ पुलिस ने धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक अकाउंट्स चलाने में शामिल नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने बताया कि इन बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल साइबर अपराध से मिली रकम को इधर-उधर करने और उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेजने के लिए किया जाता था। इनमें चीन से काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, ये कार्रवाई 'ऑपरेशन CY-VAJRA' के तहत की गईं।

Lucknow Cyber Crime News

ये गिरफ्तारियां नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और जॉइंट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन टीम (JCCT) प्लेटफॉर्म के ज़रिए पहचाने गए म्यूल अकाउंट्स की जांच-पड़ताल के दौरान हुईं। आरोपी कथित तौर पर एक संगठित गिरोह का हिस्सा थे जो अनजान और आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के नाम पर बैंक अकाउंट्स खुलवाते थे और देश भर में साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसे को लेने के लिए उनका इस्तेमाल करते थे। आइए जानते हैं कि कैसे चलता था साइबर ठगी का पूरा खेल?

Lucknow Cyber Crime Police: पुलिस ने क्या-क्या जब्त किया?

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार 9 आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में बैंकिंग-डिजिटल सामग्री जब्त की है। आइए जानते हैं पूरी लिस्ट...

Cyber Fraud Investigation: कैसे चलता था साइबर ठगी का पूरा खेल?

जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह लोगों को बैंक अकाउंट्स खोलने के लिए लुभाता था, उनके ATM कार्ड, चेक बुक, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी दूसरी जानकारी हासिल कर लेता था और उन्हें म्यूल अकाउंट्स के तौर पर इस्तेमाल करता था। पैसे या तो नकद निकाले जाते थे या USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर उन डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिए जाते थे, जिन्हें कथित तौर पर विदेश में बैठे साइबर अपराधी कंट्रोल करते थे। आरोपी कथित तौर पर टेलीग्राम के ज़रिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन लेते थे।

कौन-कौन गिरफ्तार?

जांच के केंद्र में क्या-क्या?

पुलिस ने बताया कि मड़ियाव पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने और इसके अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाने के लिए ज़ब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक अकाउंट्स, डिजिटल वॉलेट्स, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांज़ैक्शन्स और टेलीग्राम चैट्स की फोरेंसिक जांच की जा रही है।

(PTI इनपुट के साथ)