Lust Stories Film Review: हमारे समाज में जिन बातों पर अक्सर खामोशी ओढ़ ली जाती है या जिन्हें दबी जुबान में कहकर टाल दिया जाता है, उन्हीं इंसानी जज्बातों को कुरेदने का बीड़ा एक बार फिर नेटफ्लिक्स और बॉलीवुड ने उठाया है. इस बार माहौल में वैसी उत्सुकता हो नहीं थी, क्योंकि इस तरह के विषयों पर दर्शक पहले भी फिल्में देख चुके हैं.

इसके बावजूद दर्शकों की नजरें इसलिए टिकी थीं क्योंकि इस बार बागडोर चार मंझे हुए डायरेक्टर विक्रमजीत मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज के हाथ में थी. तो क्या ये नया पार्ट सिर्फ एक फैंसी बातचीत बनकर रह जाता है या वाकई रिश्तों की उस खाली जगह को छूता है जहां अक्सर दर्द छुपा होता है? चलिए इस पर विस्तार से बातचीत करते हैं.

कैसी हैं ये चार कहानियां?

पहली कड़ी है विक्रमादित्य मोटवाने की. इसमें कोंकणा सेन शर्मा, अभिषेक बनर्जी, राधिका आप्टे और विजय वर्मा आमने-सामने हैं. दो शादीशुदा जोड़े, खंडाला का एक हॉलिडे ट्रिप और दोनों घरों में पसरा अकेलापन. दोनों महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में इमोशनल दूरी और फिजिकल लगाव की कमी से जूझ रही हैं. यहीं से एक अजीब सा खेल शुरू होता है. कोंकणा अपनी सहज अदाकारी से हर बार की तरह दिल जीतती हैं, तो राधिका आप्टे अपने मज़ाकिया लहजे से माहौल को हल्का करती हैं. पतियों के किरदार में विजय और अभिषेक अपनी बेखबर दुनिया में रमे दिखते हैं, लेकिन पूरी कहानी का रुख महिलाओं के हाथ में ही रहता है.

दूसरी कहानी लेकर आती हैं किरण राव, जिसमें गुरफतेह पीरज़ादा और सना थंपी नजर आते हैं. मुंबई की भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच ये किस्सा अचानक हुए खिंचाव और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के इर्द-गिर्द घूमता है. गुरफतेह का दोहरा किरदार कहानी में तनाव पैदा करता है, जबकि सना ने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया है जो पेचीदा और मुश्किल हालात में भी अपनी शर्तों पर समझौता नहीं करती.

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शकुन बत्रा का डायरेक्शन कैसा है?

तीसरा हिस्सा शकुन बत्रा का है, जिसमें अली फजल और राधिका मदान हैं. महज तीन महीने की जान-पहचान में शादी और दो साल के भीतर तलाक की नौबत. दोनों के बीच बातचीत बंद हो चुकी है, गुस्सा उबल रहा है, लेकिन दोनों का शारीरिक खिंचाव अब भी उनके बीच एक टेम्पररी दवा का काम करता है. थेरेपिस्ट का ये सवाल सीधे दिल पर चोट करता है कि क्या ये खिंचाव किसी रिश्ते के दर्द का पक्का इलाज है या सिर्फ कुछ पलों की राहत? राधिका और अली ने टूटते रिश्ते की बेचैनी, झगड़े और भीतर के खालीपन को बहुत ईमानदारी से जिया है.

आखिरी कहानी में विशाल भारद्वाज अपने पूरे शायराना रंग में उतरते हैं, जहां अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ मुख्य भूमिका में हैं. स्क्रीन का हर एक कोना किसी पेंटिंग जैसा नजर आता है. अदिति का किरदार (सायरा) अपनी सारी ख्वाहिशों को किताबों के पन्नों में समेटे हुए है, जबकि उसका शौहर बदरू (सिद्धार्थ) इन बारीकियों को समझने में थोड़ा कच्चा है. एक मोड़ पर आकर दोनों को ये अहसास होता है कि उनका रिश्ता दूरियों से कहीं ज्यादा मजबूत है. दोनों की ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग बहुत ही खूबसूरत दिखती है.

लस्ट स्टोरीज फिल्म का ट्रेलर-

कहां बनी बात और कहां छूट गई लय?

इस फिल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि इसने किसी भी विषय को भद्दा या लाउड नहीं बनाया है. यहां न तो कोई फूहड़ ड्रामा है और न ही बेवजह का तमाशा. महिला के आत्मसम्मान, उसकी पसंद और रिश्तों के खालीपन को बहुत गरिमा के साथ पेश किया गया है. शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज ने अपने-अपने हिस्सों को इतनी परिपक्वता से गढ़ा है कि वो एक आम घर के तनाव की तरह सच्चे लगते हैं.

मगर सिक्के का दूसरा पहलू भी है. चार में से दो कहानियां खासकर किरण राव और विक्रमादित्य की कहानी की शुरुआत तो बहुत दिलचस्प अंदाज में होती हैं, लेकिन अंत तक आते-आते अपनी धार खो देती हैं. स्क्रिप्ट कई जगहों पर इतनी ढीली पड़ जाती है कि दर्शक का ध्यान भटकने लगता है.

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देखें या न देखें?

अगर आप मसालेदार ट्विस्ट, डबल मीनिंग वाली कॉमेडी और ड्रामा ढूंढ रहे हैं, तो ये फिल्म आपको बोरिंग लग सकती है. लेकिन अगर आप रिश्तों की परतों, इंसानी कमजोरियों और कपल की खामोशियों पर बनी संजीदा और नफासत भरी मैचुर कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो ये फिल्म आप देख सकते हैं. ये फिल्म बिना किसी अश्लीलता या दिखावे के रिश्तों की नाज़ुक हकीकत को सामने रखती है. कुछ कहानियों की रफ्तार कमजोर जरूर है, लेकिन उम्दा निर्देशन और कलाकारों की सधी हुई अदाकारी के लिए इसे देखा जा सकता है.

सोनाली नाईक

सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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