Time Published: Monday, August 31, 2026, 23:01 [IST]

Amarmani Tripathi UP 2027 Election: मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट चुके पूर्व मंत्री व बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी ने करीब दो दशक बाद सक्रिय राजनीति में वापसी के संकेत दिए हैं। महराजगंज के आनंदनगर में आयोजित एक जनसंपर्क कार्यक्रम में अमरमणि ने 2027 का विधानसभा चुनाव फरेंदा सीट से लड़ने का ऐलान किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे और नौतनवा के पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी नौतनवा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

हालांकि, अमरमणि ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। उनके सक्रिय होने के साथ ही महराजगंज की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि अमरमणि त्रिपाठी, तीन बार के बीजेपी विधायक को टक्कर दे सकते हैं।

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अमरमणि किस सीट से चुनावी रण में?

30 अगस्त शाम आनंदनगर के कृष्णा मैरिज हॉल में जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच अमरमणि त्रिपाठी ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह 2027 में फरेंदा से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी नौतनवा से चुनाव लड़ेंगे। अमरमणि ने अपने परिवार के लंबे राजनीतिक जुड़ाव का हवाला देते हुए कहा कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से आम लोगों के बीच रहा है और जनता के साथ उनका रिश्ता सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है।

Pharenda Assembly Constituency: फरेंदा विधानसभा सीट पर BJP का कब्जा

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आपको बात दें कि, लगातार तीन बार बीजेपी के टिकट पर बजरंग बहादुर सिंह (Bajrang Bahadur Singh) ने जीत हासिल की है। 2017 की 'मोदी लहर' में भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह ने तीसरी बार वापसी की और फिर से विधायक बने। 2002 में इस सीट पर कांग्रेस के श्याम नारायण विधायक रहे।

बाहुबली के बेटे अमनमणि ने भी मांगा समर्थन

कार्यक्रम में अमनमणि त्रिपाठी भी मौजूद थे। उन्होंने अपने पिता के लिए समर्थन मांगा। अमनमणि ने फरेंदा के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर भी टिप्पणी की और कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा के पूर्व विधायक बजरंग बहादुर सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए। अमनमणि ने दावा किया कि पूर्व विधायक ने बजरी चोरी और ठेकेदारी के जरिए बड़ी संपत्ति बनाई है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण इस कार्यक्रम में पेश नहीं किया गया। संबंधित नेताओं का पक्ष सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।

किस पार्टी से लड़ेंगे चुनाव?

अमरमणि त्रिपाठी ने फिलहाल किसी पार्टी का नाम नहीं बताया है। यही वजह है कि उनके चुनाव लड़ने के ऐलान के बावजूद यह साफ नहीं है कि वह निर्दलीय मैदान में उतरेंगे या किसी राजनीतिक दल से टिकट मांगेंगे। हाल के दिनों में महराजगंज में उनके समर्थकों की सक्रियता जरूर बढ़ी है। नौतनवा में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में भी उनके समर्थकों द्वारा उनके समर्थन में नारे लगाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद से उनके 2027 में चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज हुई थीं।

Who Is Amarmani Tripathi: कौन हैं अमरमणि त्रिपाठी

अमरमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से की थी और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। वह उत्तर प्रदेश की अलग-अलग सरकारों में मंत्री भी रहे। उनका राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से महराजगंज की नौतनवा विधानसभा सीट के आसपास रहा है। वह इस सीट से कई बार विधायक चुने गए। 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहते हुए समाजवादी पार्टी के टिकट पर नौतनवा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। लेकिन इसके बाद मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अदालत के फैसले के चलते उनकी राजनीतिक स्थिति बदल गई।

Madhumita Shukla Murder Case: मधुमिता शुक्ला हत्याकांड क्या था?

मई 2003 में लखनऊ की युवा कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या हुई थी। मामले की जांच आगे बढ़ने पर अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि पर हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप लगे। मामले की सुनवाई देहरादून में हुई। 24 अक्टूबर 2007 को विशेष अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद अमरमणि की विधानसभा सदस्यता भी चली गई। बाद में दोनों ने लंबे समय तक जेल और अस्पताल में समय बिताया।

जेल में रहते हुए भी राजनीति पर असर

अमरमणि के जेल में रहने के दौरान भी उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव खत्म नहीं हुआ। उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी ने राजनीति में कदम रखा। 2017 के विधानसभा चुनाव में अमनमणि नौतनवा से निर्दलीय विधायक चुने गए। यानी अमरमणि के जेल जाने के बाद भी परिवार का राजनीतिक प्रभाव महराजगंज में बना रहा।

अस्पताल में रहने को लेकर भी विवाद रहा

अमरमणि की सजा के दौरान लंबे समय तक अस्पताल में रहने को लेकर भी विवाद हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक, 2013 में उन्हें इलाज के लिए गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। इसके बाद वह लंबे समय तक अस्पताल में रहे। आलोचकों ने उनके अस्पताल में लंबे समय तक रहने और वहां से राजनीतिक गतिविधियां जारी रखने को लेकर सवाल उठाए थे।

करीब 20 साल बाद फिर सार्वजनिक राजनीति में वापसी

मधुमिता हत्याकांड में सजा के बाद अमरमणि लंबे समय तक सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे। अब करीब दो दशक बाद उन्होंने खुद 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इससे महराजगंज की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि अमरमणि का राजनीतिक प्रभाव नौतनवा क्षेत्र में रहा है, जबकि अब उन्होंने फरेंदा सीट को अपना चुनावी मैदान बताया है।

क्या अमरमणि की वापसी से क्या बदलेगा?

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमरमणि की वापसी से किस पार्टी या उम्मीदवार को कितना फायदा या नुकसान होगा। लेकिन उनका मैदान में उतरना महराजगंज की राजनीति में जरूर नया फैक्टर बन सकता है। उनका पुराना राजनीतिक नेटवर्क, परिवार की क्षेत्र में मौजूदगी और बेटे अमनमणि की नौतनवा में सक्रियता, इन सबका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ, मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उनकी सजा और आपराधिक बैकग्राउंड भी चुनावी राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है।