Time Published: Sunday, August 9, 2026, 20:55 [IST]

Manish Kumar Gupta Fake IAS: बिहार के खगड़िया में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर खुद को IAS अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का 'अंडरकवर एजेंट' बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था। आरोपी की पहचान मनीष कुमार गुप्ता उर्फ चिक्कू के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि वह लंबे समय से अलग-अलग जगहों पर सरकारी अधिकारी होने का दिखावा कर लोगों को प्रभावित और कथित तौर पर ठगी करता था।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के ठिकाने पर हुई छापेमारी में महंगी गाड़ियां, मोबाइल फोन, क्रेडिट और डेबिट कार्ड, चेकबुक, विदेशी शराब और वन्यजीवों से जुड़े सामान सहित कई चीजें बरामद हुई हैं। जांच एजेंसियां उसकी कथित संपत्ति और दूसरे राज्यों से लेकर विदेश तक फैले नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे फैलाया ठगी का साम्राज्य?

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Who Is Manish Kumar Gupta: कौन है मनीष कुमार गुप्ता?

पुलिस के अनुसार, मनीष कुमार गुप्ता खगड़िया के जमालपुर बाजार इलाके में रहता था। वह कथित तौर पर खुद को IAS अधिकारी बताता था और अपनी निजी गाड़ियों पर 'IAS' और 'Government of India' जैसे बोर्ड लगाकर चलता था। पुलिस का आरोप है कि वह लोगों के बीच अपनी पहचान और प्रभाव बढ़ाने के लिए खुद को NSA अजीत डोभाल का 'कवर एजेंट' या 'अंडरकवर एजेंट' बताता था। इसके जरिए वह सरकारी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था में अपनी कथित पहुंच का भ्रम पैदा करता था।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अजीत डोभाल से उसके किसी वास्तविक संबंध या सरकारी एजेंसी में उसकी भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है। यह पहचान आरोपी द्वारा खुद बताए जाने का पुलिस का दावा है।

100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का दावा

खगड़िया पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आरोपी के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संपत्ति उसने कैसे अर्जित की। बताया गया है कि बिहार के अलावा दूसरे राज्यों और विदेशों में भी उसकी संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस के लिए यह भी अहम सवाल है कि कथित ठगी से हासिल रकम को उसने किन माध्यमों से निवेश किया और उसके साथ इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।

साढ़े सात घंटे चली छापेमारी

जिला अपराध इकाई (DIU) और गोगरी पुलिस की संयुक्त टीम ने जमालपुर बाजार स्थित आरोपी के ठिकाने पर छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई शनिवार दोपहर करीब 1 बजे शुरू हुई और रात लगभग 8:30 बजे तक चली। छापेमारी के दौरान पुलिस को घर और परिसर में कई ऐसी चीजें मिलीं, जिनकी अब जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच के दायरे में लिया है।

Tesla समेत महंगी गाड़ियां जब्त

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के पास से दो महंगी गाड़ियां जब्त की गई हैं। इनमें Tesla Model Y और Toyota/Dycor Safari बताई गई है। पुलिस का कहना है कि इन वाहनों पर 'भारत सरकार' लिखा हुआ था। गाड़ियों से जुड़े दस्तावेजों और उन पर लगाए गए सरकारी चिह्नों की वैधता की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने इन गाड़ियों पर सरकारी पहचान का इस्तेमाल क्यों किया और क्या इससे किसी सरकारी विभाग या अधिकारी का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ।

घर से विदेशी शराब और हिरण-बारहसिंगा सींग भी जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 31 लीटर विदेशी शराब बरामद करने का दावा किया है। बरामद शराब अलग-अलग ब्रांड की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इनमें एक ऐसी बोतल भी शामिल है जिसकी कीमत एक लाख रुपये से अधिक बताई गई है। इसके अलावा घर से हिरण और बारहसिंगा के सींग भी मिलने की बात सामने आई है। वन्यजीवों से जुड़े इन सामानों की वैधता और उनके स्रोत की भी जांच की जा रही है। अगर इनके पास रखने से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कानूनों के तहत अलग कार्रवाई हो सकती है।

पांच Apple फोन और 20 क्रेडिट कार्ड

पुलिस की कार्रवाई में कई इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें Apple के पांच मोबाइल फोन, 20 क्रेडिट कार्ड, आठ डेबिट कार्ड और चार चेकबुक शामिल हैं। इन सामानों की बरामदगी को पुलिस वित्तीय लेनदेन और कथित ठगी के नेटवर्क की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि इन खातों और कार्ड का इस्तेमाल किन लेनदेन में किया गया।

घर के चारों तरफ लगाए थे करीब 100 कैमरे

पुलिस के मुताबिक, मनीष अपने घर की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क रहता था। उसने कथित तौर पर घर के चारों तरफ करीब 100 CCTV कैमरे लगा रखे थे। स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि वह बहुत कम घर से बाहर निकलता था और आसपास की गतिविधियों पर लगातार नजर रखता था। हालांकि, CCTV कैमरे लगाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

दिल्ली से करीब एक महीने पहले आया था खगड़िया

जानकारी के मुताबिक, मनीष करीब एक महीने पहले दिल्ली से खगड़िया आया था। उसके पिता स्वर्गीय परमेश्वर गुप्ता खगड़िया के केडीएस कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे। मनीष छह भाइयों में सबसे छोटा बताया गया है। उसका एक भाई संजय कुमार गुप्ता दिल्ली में प्रोफेसर है, जबकि डंपी कुमार के कनाडा में रहने की जानकारी सामने आई है। परिवार के दूसरे सदस्यों के बारे में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है।

10 साल से चल रहा था ठगी का खेल

पुलिस का दावा है कि मनीष पिछले करीब 10 सालों से फर्जी पहचान के जरिए लोगों को प्रभावित करने और कथित ठगी की गतिविधियों में शामिल था। अब जांच एजेंसियां उसके पुराने संपर्कों, संपत्ति, बैंक खातों और अलग-अलग शहरों में उसके आने-जाने से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। पुलिस के अनुसार, मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी अधिकारी की फर्जी पहचान इस्तेमाल करने, सरकारी नाम और प्रतीकों के कथित दुरुपयोग तथा लोगों को डराने-धमकाने या गलत प्रभाव डालने से जुड़े पहलुओं पर भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उसकी कथित गतिविधियों का नेटवर्क कितना बड़ा था और 100 करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या है।