Mata Kushmanda Aarti Lyrics: शारदीय नवरात्रि का आज चौथा दिन है. यह दिन दुर्गा माता के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा को समर्पित होता है. इस दिन माता कूष्मांडा की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए. उनकी उपासना करने से भक्तों के जीवन के संकट दूर होते हैं. धार्मिक मान्यता है कि देवी कूष्मांडा सूर्यदेव के भीतर समाहित दिव्य प्रकाश में विराजमान रहती है. इसलिए, उन्हें प्रकाश की देवी भी कहा जाता है. उनकी मधुर मुस्कान से ही संपूर्ण संसार की रचना हुई थी. देवी कूष्मांडा को कद्दू की बलि अतिप्रिय होती है. मान्यता है कि माता कूष्मांडा की आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. पढ़ें आरती के लिरिक्स.
नवरात्रि के चौथे दिन पर माता कूष्मांडा को इन चीजों का भोग लगाएं?
दुर्गा मां के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाए. माता रानी को मालपुआ अत्यंत प्रिय होता है. देवी कूष्मांडा को पेठा और ताजे फलों का भोग लगा सकते हैं. नवरात्रि के चौथे दिन माता रानी को लाल रंग के फूल जैसे गुलाब और गुड़हल अर्पित करें. आज देवी मां को बताशे का भोग भी लगा सकते हैं. केसर वाले पेठे भी कूष्मांडा माता को बहुत पसंद होते हैं.
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चौथे दिन शाम को पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है? (Navratri 2026 4th Day Shubh Muhurat)
आज दुर्गा माता की पूजा करने के लिए गोधूलि मुहूर्त का प्रारंभ शाम 5 बजकर 53 मिनट पर होगा. गोधूलि मुहूर्त का समापन शाम 06:18 मिनट पर होगा. सायाह्म संध्या मुहूर्त शाम 05:53 से शाम 07:08 मिनट तक रहेगा.
पढ़ें कूष्मांडा माता की आरती (Kushmanda Aarti Lyrics in Hindi)
कूष्माण्डा जय जग सुखदानी।मुझ पर दया करो महारानी॥
पिङ्गला ज्वालामुखी निराली।शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे। सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भण्डारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याये। भक्त तेरे दर शीश झुकाये॥
माता कुष्मांडा चालीसा (Kushmanda Mata Ki Chalisa)
दोहा
माता कुष्मांडा की जय, करुणा की सागर।
सुख-सम्पत्ति देने वाली, जय मां, जय अंबर॥
चालीसा
जयति जयति जगत की माता।
कुष्मांडा देवी सुखदायी भ्राता॥
शुम्भ-निशुम्भ हरणी माता।
भक्तों की विपदा हरणी भ्राता॥
कुश (कुमार) मंद हर्ष से भरी।
चारों ओर कृपा की झरी॥
हंस पर सवार हे माता।
कृपा का अविरल बहाता॥
कुम्भ करों में जल से भरे।
धन-धान्य से भरे सारे घर॥
आभा से दीप्त हे माता।
भक्तों के संकट मिटाता॥
चतुर्थी तिथि शुभ कहलाती।
व्रत रखने से सब सफल होती॥
मंत्र का जप करों हे प्यारे।
जीवन सुखी हो जाए सारे॥
अंत में सुन लो अरज हमारी।
जीवन सवारे भवसागर से॥
जय माता कुष्मांडा भवानी।
कृपा करो हे जगत की रानी॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)