Published: Tuesday, August 18, 2026, 20:49 [IST]
Maternity Leave: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने रक्षा बंधन यानी 28 अगस्त से पहले महिला सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। इसके तहत, अब तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली महिला सरकारी कर्मचारियों को भी 365 दिन यानी एक साल की सवैतनिक मातृत्व छुट्टी (Paid Maternity Leave) मिलेगी।
पहले तीसरी संतान के मामले में यह छुट्टी महज 12 सप्ताह यानी 84 दिनों तक सीमित थी। यह घोषणा 18 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार में मानव संसाधन प्रबंधन विभाग के मंत्री डी. सरथकुमार ने की। आइए विस्तार से जाते हैं कि किस राज्य में कितनी मातृत्व छुट्टी?
तीसरे बच्चे पर 365 दिन की छुट्टी का ऐलान
तमिलनाडु में अभी तक महिला सरकारी कर्मचारियों को पहले दो बच्चों के जन्म पर 365 दिन की मातृत्व छुट्टी मिलती थी। लेकिन तीसरे बच्चे के जन्म पर यह अवधि घटकर सिर्फ 12 सप्ताह यानी 84 दिन रह जाती थी। महिला कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी। उनका तर्क था कि प्रसव के बाद मां की सेहत संभालने और नवजात की देखभाल के लिए तीन महीने का समय पर्याप्त नहीं है। अब राज्य सरकार ने तीसरे बच्चे के लिए भी मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 365 दिन करने का फैसला किया है। यानी पहले दो बच्चों और तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि में मौजूद बड़ा अंतर खत्म कर दिया गया है।
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार के मुताबिक, इस फैसले के पीछे महिला सरकारी कर्मचारियों का कल्याण और प्रसव के बाद मां-बच्चे की देखभाल से जुड़ी जरूरतें प्रमुख कारण हैं। घोषणा के बाद कर्मचारी संगठनों और महिला कर्मचारियों ने इसका स्वागत किया है। तमिलनाडु सरकार पहले ही अपने सरकारी कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश को 365 दिनों तक बढ़ा चुकी है। राज्य सरकार के 2021 के आधिकारिक रिकॉर्ड में G.O. (Ms) No. 84, Human Resources Management (FR-III), 23 अगस्त 2021 के जरिए मातृत्व अवकाश को 270 दिनों से बढ़ाकर 365 दिन किए जाने का जिक्र है। अब 18 अगस्त 2026 की घोषणा ने तीसरी संतान को लेकर मौजूद सीमा को भी बदलने का रास्ता साफ किया है।
UP Maternity Leave: UP में महिला सरकारी कर्मचारियों को कितनी छुट्टी?
उत्तर प्रदेश में महिला कर्मचारियों के लिए स्थिति तमिलनाडु से अलग है। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के आधिकारिक मानव संसाधन नीति दस्तावेज में संविदा महिला कर्मचारियों के लिए 180 दिन की पेड मैटरनिटी लीव का प्रावधान दर्ज है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में नियमित सरकारी कर्मचारी और संविदा कर्मचारी अलग-अलग सेवा नियमों के तहत आ सकते हैं। इसलिए किसी कर्मचारी की वास्तविक पात्रता उसके विभाग और नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर देखी जानी चाहिए। यानी UP के जिस आधिकारिक NHM दस्तावेज का हवाला दिया जा रहा है, उसमें संविदा महिला कर्मचारियों के लिए 180 दिन की छुट्टी स्पष्ट है।
Delhi Maternity Leave: महिला CM वाले दिल्ली में क्या हाल?
दिल्ली सरकार के विभिन्न कर्मचारी वर्गों के लिए मातृत्व अवकाश के नियम अलग सेवा नियमों के तहत लागू होते हैं। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के आधिकारिक आदेश में Anganwadi Workers और Helpers के लिए 180 दिन का Maternity Leave स्पष्ट रूप से दर्ज है। इस आदेश के मुताबिक, यह सुविधा सेवा में दो बार तक दी जा सकती है।
Bihar Maternity Leave: बिहार में 180 दिन का प्रावधान
बिहार में नियमित सरकारी महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश का आधार बिहार सेवा संहिता है। राज्य सरकार के विभागीय रिकॉर्ड में महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व और अन्य प्रकार के अवकाश से जुड़े आदेश जारी होते रहे हैं।
यहां भी Maternity Leave और Child Care Leave को अलग-अलग समझना जरूरी है। बिहार सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2026 में महिला कर्मचारियों को Child Care Leave दिए जाने के अलग आदेश उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, कला एवं संस्कृति विभाग ने मार्च 2026 में एक महिला कर्मचारी को 180 दिन का शिशु देखभाल अवकाश स्वीकृत किया था। यह मातृत्व अवकाश से अलग है।
Maharashtra Maternity Leave: महाराष्ट्र में 180 दिन
महाराष्ट्र में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए Maharashtra Civil Services (Leave) Rules, 1981 लागू होते हैं। महाराष्ट्र वित्त विभाग ने इन नियमों का 28 जनवरी 2025 तक संशोधित संस्करण भी प्रकाशित किया है। महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 2009 में महिला सरकारी कर्मचारियों के प्रसूति अवकाश की अवधि को 90 से बढ़ाकर 180 दिन किया गया था। बाद में 2016 में इससे जुड़ी सेवा-अवधि की शर्त भी हटाई गई।