देशभर में MBBS Admission 2026 की प्रक्रिया चल रही है. मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के दौरान उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के साथ आरक्षण से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की भी जांच की जा रही है. दिव्यांग कोटे के तहत एडमिशन लेने वाले छात्रों के दस्तावेजों को लेकर मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MMCH), डाल्टनगंज ने खास सतर्कता बरती है. कॉलेज में येलो UDID कार्ड जमा करने वाले उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों का गहराई से वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसका मकसद फर्जी या गलत दिव्यांगता दावे को रोकना और आरक्षण का लाभ सिर्फ योग्य उम्मीदवारों तक पहुंचाना है.

येलो UDID कार्ड क्या होता है?

UDID यानी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान से जुड़ा जरूरी डॉक्यूमेंट है. दिव्यांगता की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग रंग के UDID कार्ड जारी किए जाते हैं. 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले लोगों को सफेद, 40 से 79 प्रतिशत दिव्यांगता वालों को पीला और 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले लोगों को नीला कार्ड दिया जाता है.

MBBS में दिव्यांग कोटे का आरक्षण पाने के लिए निर्धारित दिव्यांगता प्रतिशत जरूरी होता है. ऐसे में काउंसलिंग के दौरान येलो UDID कार्ड जरूरी डॉक्यूमेंट माना जाता है.

हर येलो कार्ड का होगा वेरिफिकेशन

MMCH के प्रिंसिपल डॉ. जक्का श्रीनिवास राव के मुताबिक, MBBS एडमिशन के दौरान जमा किए जाने वाले सभी येलो UDID कार्ड की जांच की जाएगी. इसके साथ ही उम्मीदवारों के निवास, जाति और अन्य जरूरी प्रमाणपत्रों का भी वेरिफिकेशन किया जा रहा है. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य एडमिशन में पारदर्शिता बनाए रखना है.

श्रवण बाधिता (Hearing Impairment) के दावों पर खास नजर

मेडिकल सूत्रों के मुताबिक, श्रवण बाधिता के आधार पर दिव्यांग कोटे का दावा करने वाले उम्मीदवारों की अतिरिक्त जांच की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर ऑडियोमेट्री जैसे मेडिकल टेस्ट भी कराए जा सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में एक उम्मीदवार ने श्रवण बाधिता के आधार पर दिव्यांग कोटे में एडमिशन का दावा किया था. जब उसे ऑडियोमेट्री टेस्ट की जानकारी दी गई तो उसने आगे की प्रवेश प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया.

UDID के तहत दृष्टिबाधिता, श्रवण बाधिता (Hearing Impairment) , चलने-फिरने से जुड़ी दिव्यांगता और बोलने-भाषा से संबंधित दिव्यांगताओं समेत कई श्रेणियां शामिल हैं. कॉलेज का कहना है कि जांच से एलिजिबल उम्मीदवारों को ही आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.

सपना यादव

सपना यादव

दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्‍यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने पत्रकारिता को लक्ष्‍य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्‍यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्‍होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.

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