मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। डीलर्स ने एमडीआर शुल्क का विरोध किया है।
मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। (Ai Image)
- Published: 19 Sep 2026, 12:24 PM IST
- Last Updated: 19 Sep 2026, 12:24 PM IST
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में वाहन चालकों को जल्द ही फ्यूल भरवाने के दौरान डिजिटल पेमेंट को लेकर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। राज्य के पेट्रोल पंप संचालकों ने 2,000 रुपये से अधिक के ईंधन बिलों के लिए यूपीआई (UPI) भुगतान स्वीकार न करने का बड़ा फैसला किया है। यह नया नियम आगामी 16 अक्टूबर 2026 से राज्य भर के करीब 4,700 पेट्रोल पंपों पर प्रभावी हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि आपके पेट्रोल या डीजल का बिल 2,000 रुपये से ज्यादा बनता है, तो आपको भुगतान के लिए केवल नकद (कैश) का ही इस्तेमाल करना होगा।
पेट्रोल पंपों पर पड़ेगा भारी आर्थिक बोझ
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार, राज्य के सभी 4,700 पेट्रोल पंपों पर इस नियम के लागू होने से कुल मासिक वित्तीय प्रभाव लगभग 8.17 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
अजय सिंह ने इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि 2,000 रुपये से अधिक के हर एक ट्रांजैक्शन पर कुल 5.90 रुपये की लागत आती है, जिसमें 5 रुपये एमडीआर (Merchant Discount Rate) और 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल है। यदि किसी पेट्रोल पंप पर रोजाना औसतन ऐसे 100 लेनदेन होते हैं, तो पंप संचालक को हर महीने लगभग 17,400 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) भोपाल के जिला अध्यक्ष और मध्य प्रदेश के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि राज्य के लगभग 4,700 पेट्रोल पंप इस फैसले से प्रभावित होंगे। उन्होंने इस कदम को यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने के प्रस्ताव से जोड़ा है।
'नो-यूपीआई डे' का ऐलान
इस बीच, व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने शुक्रवार को एक पोस्टर अभियान की शुरुआत की, जिसके तहत व्यापारी आगामी 23 सितंबर को 'नो-यूपीआई डे' मनाएंगे।
CAIT ने केंद्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग की है। संगठन ने अपील की है कि पेट्रोल और डीजल समेत सभी व्यावसायिक लेन-देन को एमडीआर शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाना चाहिए। सीएआईटी के पदाधिकारी ने कहा कि व्यापारी वर्ग पहले से ही भारी लागत, कड़ी प्रतिस्पर्धा और सीमित मुनाफे के बीच अपना कारोबार चला रहा है। डिजिटल भुगतानों पर यदि अतिरिक्त लागत थोपी जाती है, तो इससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और अंततः लोग डिजिटल भुगतान करने से कतराने लगेंगे।
झारखंड के व्यापार संगठन ने भी की फैसले को वापस लेने की मांग
सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी इस फैसले को लेकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। झारखंड के एक प्रमुख व्यापारिक संगठन ने भी केंद्र सरकार से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लगाने के निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के अध्यक्ष तुलसी पटेल ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने इस व्यवस्था के लागू होने के बाद व्यापार और उद्योग जगत के सामने खड़ी होने वाली चिंताओं और समस्याओं से वित्त मंत्री को अवगत कराया है।