उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित इशी अस्पताल के प्रसिद्ध लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. गणेश यादव ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन कर बड़ी सफलता हासिल की है। डॉ. गणेश यादव और उनकी मेडिकल टीम ने Laparoscopic Cholecystectomy के जरिए एक मरीज की पित्त की थैली से 250 से भी अधिक छोटी-बड़ी पथरियां सुरक्षित बाहर निकाली हैं।

dr ganesh yadav ishi hospital bhadohi

भदोही जैसे जिले में इस तरह की जटिल और सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी होना स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बेहतरीन उदाहरण है।

  • Published: 03 Sep 2026, 08:28 AM IST
  • Last Updated: 03 Sep 2026, 08:31 AM IST

भदोही जिले के इशी अस्पताल में चिकित्सा क्षेत्र का एक अनोखा और दुर्लभ मामला सामने आया है। पेट में लगातार हो रहे असहनीय दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे मरीज की जांच में पित्त की थैली पूरी तरह पथरियों से भरी पाई गई थी।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. गणेश यादव ने तत्काल सर्जरी का फैसला लिया। बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, आधुनिक दूरबीन विधि से किए गए इस ऑपरेशन के बाद डॉक्टर भी मरीज के पित्ताशय से निकली पथरियों की संख्या देखकर हैरान रह गए।

​पित्त की थैली में भरी थीं 250 से अधिक पथरियां 
मरीज जब पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, उल्टी और बदहजमी की शिकायत के साथ अस्पताल आया, तो डॉक्टरों ने उसका अल्ट्रासाउंड कराया। जांच में पता चला कि मरीज की पित्त की थैली का आकार काफी बढ़ गया था और वह सैकड़ों छोटे-बड़े स्टोन से ठसाठस भरी हुई थी।

इतने बड़े पैमाने पर पथरियों का होना मरीज की जान के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता था, क्योंकि इससे इंफेक्शन फैलने और नली में रुकावट आने का खतरा बढ़ गया था।

​दूरबीन विधि से किया गया जटिल ऑपरेशन

लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. गणेश यादव ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ मिलकर Cholecystectomy तकनीक का सहारा लिया। इस प्रक्रिया में मरीज के पेट पर बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, बहुत छोटे छिद्रों के माध्यम से दूरबीन उपकरण डालकर पित्त की थैली को पथरियों समेत बाहर निकाला गया। सफल सर्जरी के बाद जब पथरियों की गिनती की गई, तो उनकी संख्या 250 से भी अधिक निकली।

​मरीज की हालत स्थिर, भदोही में जगी नई उम्मीद 
डॉ. गणेश यादव ने बताया कि अत्यधिक पथरियां होने के बावजूद दूरबीन विधि से ऑपरेशन सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया, जिससे मरीज को ज्यादा दर्द का सामना नहीं करना पड़ा। सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे जल्द ही अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

भदोही जैसे जिले में इस तरह की जटिल और सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी होना स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बेहतरीन उदाहरण है।