Updated On: Aug 03, 2026 | 10:22 PM IST
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सार
PM Modi Video Removal: PM मोदी का वीडियो हटाने पर संसदीय समिति ने मेटा अधिकारियों से तीखे सवाल किए। समिति अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी और 'सेफ हार्बर' समीक्षा की बात कही।

PM मोदी (Image- Insta/@narendramodi)
विस्तार
PM Narendra Modi Video Removal Issue: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमन और डिजिटल जवाबदेही को लेकर आयोजित संसदीय स्थायी समिति की बैठक में मेटा (Meta) के वरिष्ठ अधिकारियों को सांसदों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि इस मामले में मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने पर उठे सवाल
खबरों के अनुसार, बैठक के दौरान एक सांसद ने मेटा के अधिकारियों से पूछा कि प्रधानमंत्री का वीडियो प्लेटफॉर्म से क्यों हटाया गया, यह फैसला किस स्तर पर लिया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद रहती है और उसे हटाने में देरी होती है, तो प्रधानमंत्री से जुड़ा वीडियो हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
Meta ने जताया खेद
खबरों के मुताबिक, मेटा के प्रतिनिधियों ने इस घटना पर खेद व्यक्त किया और कहा कि कंपनी इस मामले में औपचारिक रूप से माफी मांगने के लिए तैयार है। हालांकि, बैठक में मौजूद भाजपा के एक सांसद ने कहा कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए उचित कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
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निशिकांत दुबे की चेतावनी
बैठक के बाद संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने के मामले में मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मेटा की ओर से उचित जवाब और माफी नहीं आती है तो सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) संरक्षण की समीक्षा की जा सकती है। सेफ हार्बर वह कानूनी सुरक्षा है, जिसके तहत मध्यस्थ (Intermediary) प्लेटफॉर्म कुछ परिस्थितियों में यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं माने जाते।
विपक्ष ने भी रखी अपनी बात
खबरों के अनुसार, बैठक में विपक्ष के एक सांसद ने कहा कि सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना या सरकार-विरोधी विचारों को देश-विरोधी गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक बहस और असहमति की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं और वहां विभिन्न विचारों के लिए जगह बनी रहनी चाहिए।
हालांकि, बैठक में सभी सदस्यों की इस बात पर सहमति रही कि बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material) और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर सोशल मीडिया कंपनियों को कड़ी और त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
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बैठक में कौन-कौन शामिल रहा?
संसदीय स्थायी समिति की इस बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों के अलावा प्रमुख डिजिटल कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
